वित्त मंत्री ने बताया, क्यों नहीं हटाया जा रहा है कोरोना की दवाओं से जीएसटी

वर्तमान में टीके की घरेलू आपूर्ति और वाणिज्यिक आयात करने पर पांच प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है वहीं कोविड दवाओं और आक्सीजन कंसंट्रेटर्स पर 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी लागू है.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : May 9, 2021, 08:29 PM IST
  • जानिए जीएसटी हटाने से क्यों महंगी हो जाएंगी दवाएं
  • राहत सामग्री की दवाइयों पर नहीं लगता है जीएसटी
वित्त मंत्री ने बताया, क्यों नहीं हटाया जा रहा है कोरोना की दवाओं से जीएसटी

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि कोविड19 की दवाओं, टीका और आक्सीजन कंसन्ट्रेटर्स की घरेलू आपूर्ति और वाणिज्यिक आयात पर माल एवं सेवाकर (जीएसटी) हटाने से ऐसी दवाएं और सामान खरीदारों के लिए महंगे हो जायेंगे.

इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि जीएसटी हटने पर इनके विनिर्माताओं उत्पादन में प्रयोग किए गए कच्चे/मध्यवर्ती माल व सामग्री पर चुकाये गये कर के लिए इनपुट-टैक्स-क्रेडिट का दावा नहीं कर सकेंगे.

वर्तमान में टीके की घरेलू आपूर्ति और वाणिज्यिक आयात करने पर पांच प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है वहीं कोविड दवाओं और आक्सीजन कंसंट्रेटर्स पर 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी लागू है.

जीएसटी हटाने से महंगी हो जाएंगी दवाएं

सीतारमण ने इन सामानों पर जीएसटी से छूट दिये जाने की मांग को लेकर ट्वीट में जवाब देते हुये कहा, 'यदि टीके पर पूरे पांच प्रतिशत की छूट दे दी जाती है, तो टीका विनिर्माताओं को कच्चे माल पर दिये गये कर की कटौती का लाभ नहीं मिलेगा और वह पूरी लागत को ग्राहकों, नागरिकों से वसूलेंगे.

पांच प्रतिशत की दर से जीएसटी लगने से विनिर्माताओं को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ मिलता है और यदि आईटीसी अधिक होता है तो वह रिफंड का दावा कर सकते हैं. इसलिये टीका विनिर्माताओं को जीएसटी से छूट दिये जाने का उपभोक्ताओं को नुकसान होगा.'

सीतारमण ने आगे कहा कि यदि एकीकृत जीएसटी (आईजीएसीटी) के रूप में किसी सामान पर 100 रुपये की प्राप्ति होती है तो इसमें से केन्द्रीय जीएसटी और राज्य जीएसटी के तौर आधी आधी रकम दोनों के खाते में जाती है

इसके अलावा केंद्र को केन्द्रीय जीएसटी के तौर पर मिलने वाली राशि में से 41 प्रतिशत हिस्सा भी दिया जाता है. इस प्रकार प्रत्येक 100 रुपये में से 70.50 रुपये की राशि राज्यों का हिस्सा होता है.

वित्त मंत्री ने कहा कि, 'वास्तव में पांच प्रतिशत की दर से जीएसटी टीका बनाने वाली कंपनियों और लोगों के हित में है.'

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिन में एक पत्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखा है जिसमें उन्होंने विभिन्न संगठनों और एजेंसियों से दान स्वरूप मिलने वाले आक्सीजन कंसंट्रेटर्स, सिलेंडर, क्रायोजिनिक स्टोरेज टेंक और कोविड संबंधी दवाओं को जीएसटी और सीमा शुल्क से छूट दिये जाने की मांग की है.

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राहत सामग्री पर जीएसटी से छूट

सीतारमण ने ट्वीट के जरिए मुख्यमंत्री के पत्र का जवाब देते हुये कहा कि इस तरह के सामानों को पहले ही सीमा शुल्क और स्वास्थ्य उपकर से छूट दी जा चुकी है. इसके साथ ही देश में मुफ्त वितरण के लिये भारतीय रेड क्रास द्वारा आयात की जाने वाली कोविड राहत सामग्री को एकीकृत जीएसटी से भी छूट दी गई है.

इसके अलावा किसी भी कंपनी, राज्य सरकार, राहत एजेंसी अथवा स्वतंत्र निकाय के द्वारा राज्य सरकार से प्राप्त प्रमाणपत्र के आधार पर देश में मुफ्त वितरण के लिये बिना लागत आयात की जाने वाली कोविड सामग्री पर भी आईजीएसटी से छूट दी जा चुकी है.

सीतारमण ने कहा, 'इस प्रकार के सामान की देश में उपलब्धता बढ़ाने के लिये सरकार ने इस प्रकार की सामग्री के वाणिज्यिक तौर पर आयात किए जाने पर भी मूल सीमा शुल्क और स्वास्थ्य उपकर से पूरी तरह छूट दी है.

सरकार ने रेमडेसिविर टीका और इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री (एपीआई), नैदानिक किट, चिकित्सा श्रेणी की ऑक्सीजन, ऑक्सीजन थेरेपी से जुड़ी उपकरण जैसे कि आक्सीजन कंसंट्रेटर्स, क्रायोजेनिक परिवहन टैंक आदि और कोविड टीकों सहित कोविड-19 से जुड़ी राहत सामग्री के आयात को पहले ही सीमा शुल्क से छूट दे दी है.

सरकार ने तीन मई से देश में अनुदान के रूप में निशुल्क वितरण के लिये प्राप्त होने वाली कोविड राहत सामग्री को आईजीएसटी से भी छूट दे दी है. इस कदम से देश में पहुंचने वाली इस प्रकार की राहत सामग्री को सीमा शुल्क से जल्द मंजूरी दिलाने में मदद मिली है.

इस मामले में हालांकि यह देखा जाएगा की राज्य सरकार द्वारा नियुक्त नोडल प्राधिकरण ने सइ प्रकार की राहत सामग्री के निशुल्क वितरण के लिये किस इकाई अथवा राहत एजेंसी अथवा सांवधिक संस्था को नियुक्त किया है.

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