OBC वोटबैंक पर टिकी है यूपी की सियासत

योगी मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए बीजेपी उत्तर प्रदेश में सबसे बड़े बैंक यानि ओबीसी समाज में अपनी पकड़ को और ज्यादा मजबूत करना चाहती है. इधर समाजवादी पार्टी की नजर भी इस वोट बैंक पर जमी हुई है. ऐसे में अखिलेश यादव भी बीजेपी पर ओबीसी की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं. इस रिपोर्ट में समझिए कि ओबीसी वोटबैंक की लड़ाई यूपी में इतनी बड़ी क्यों होती जा रही है.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Jul 24, 2021, 11:34 PM IST
  • यूपी चुनाव में ओबीसी के बिना जीत असंभव
  • योगी मंत्रिमंडल में 6 नए मंत्री शामिल होंगे-सूत्र
OBC वोटबैंक पर टिकी है यूपी की सियासत

नई दिल्ली: यूपी मंत्रिमंडल में विस्तार की खबर के साथ एक खबर और बड़ी हो गई है कि योगी मं​त्रिमंडल में सबसे ज्यादा नए मंत्री ओबीसी के बनेंगे, लेकिन ऐसा क्यों होगा ये समझना भी जरूरी है.

यूपी में ओबीसी का समीकरण

मंत्रिमंडल विस्तार में योगी सरकार ओबीसी कोटे से सबसे ज्यादा मंत्री बनाने की तैयारी कर रही है, क्योंकि उत्तर प्रदेश के चुनाव में ओबीसी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत मंत्रिमंडल में पहले से बड़े ओबीसी चेहरे शामिल हैं. लेकिन विपक्षी पार्टियों की रणनीति को देखते हुए बीजेपी कोई भी मौका नहीं देना चाहती.

वैसे बीजेपी की इस योजना को अखिलेश यादव भी समझते हैं यही वजह है ओबीसी को लेकर वो बीजेपी पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ते, फिलहाल आखिलेश यादव ने बीजेपी पर ओबीसी को आरक्षण से वंचित करने का आरोप लगाया है.

'ओबीसी का हक औरों को दिया'

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा ने ओबीसी का हक औरों को दिया. भाजपा सरकार की दुर्भावनावश OBC समाज निरंतर आरक्षण से वंचित हो रहा है. अब स्वयं राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने केंद्र सरकार से शिकायत की है कि बीते 3 सालों में मेडिकल व अन्य जगह OBC का हक औरों को दिया जा रहा है. भाजपा से सामाजिक न्याय की उम्मीद बेमानी है.

अब आप ये समझिए अखिलेश यादव को चुनाव से पहले ऐसे बयान क्यों देने पड़ रहे हैं, ऐसे मुद्दे क्यों उठाने पड़ रहे हैं? यूपी में लगभग 36-38 प्रतिशत ओबीसी मतदाता हैं. यूपी में बीजेपी और सपा के बीच ओबीसी वोट बैंक को लेकर लड़ाई है यूपी में ओबीसी वोटबैंक अलग अलग जातियों में बंटा है.

ओबीसी वोटबैंक की लड़ाई में बीजेपी की तैयारी

यूपी में ओबीसी वोटबैंक की लड़ाई चल रही है, अब सवाल है कि बीजेपी की क्या तैयारी है? गैर यादव ओबीसी को बीजेपी अपने साथ एकजुट रखना चाहती है. 2014 से गैर यादव ओबीसी का एक बड़ा तबका यूपी में बीजेपी के साथ है. यूपी में बीजेपी ने स्वतंत्र देव सिंह को अध्यक्ष बनाया है, जो ओबीसी हैं. यूपी में केशव प्रसाद मौर्य डिप्टी सीएम हैं जो कि ओबीसी समाज से आते हैं. वहीं अनिल राजभर, दारा सिंह चौहान, स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे मंत्री यूपी सरकार में हैं.

केन्द्र सरकार में इस बार के मंत्रिमंडल विस्तार में अनुप्रिया पटेल, बीएल वर्मा, पंकज चौधरी को यूपी से मंत्री बनाया गया, ये भी ओबीसी समाज से हैं. वहीं निषाद पार्टी और अपना दल ये यूपी में बीजेपी का गठबंधन है, जो की ओबीसी राजनीति के लिए जानी जाती है. इसके अलावा बीजेपी लगातार ओबीसी को लेकर खुद अखिलेश यादव को कटघर में खड़ा करती रहती है.

यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि 'एक हफ्ते पहले आई थी, जिसमें पूछा था अखिलेश ने ओबीसी के किलए क्या किया.' लेकिन बीजेपी की तैयारी पर समाजवादी पार्टी सतर्क है. यही वजह है अखिलेश यादव अपने पुराने OBC और MBC वोट बैंक को सपा के साथ वापस जोड़ने पर काम कर रहे हैं.

बीजेपी के अलावा समाजवादी पार्टी भी विधानसभा चुनाव 2022 में ओबीसी का दावा खेलने को तैयार है. अखिलेश यादव एक तरफ ओबीसी हितों की आवाज उठा रहे हैं, दूसरी तरफ अपनी पार्टी में ओबीसी नेताओं के कुंबे को भी बढ़ा रहे हैं.

ओबीसी वोटबैंक की लड़ाई में अखिलेश की तैयारी

कोविड के बाद अखिलेश यादव ने अपनी पहली यात्रा की शुरुआत निषाद समाज के बीच उन्नाव से की, जो कि ओबीसी वोट बैंक का 4 फीसदी है.

यूपी में समाजवादी पार्टी ने भी अपना अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल को बनाया है, जो कि ओबीसी समाज से हैं. ओबीसी समाज से लीलावती कुशवाहा को यूपी महिला सभा का अध्यक्ष बनाया. राजपाल कश्यप को सपा के यूपी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ का अध्यक्ष बनाया. बीजेपी और बीएसपी के ओबीसी नेताओं को अखिलेश यादव सपा में शामिल करा रहे हैं.

यूपी में सपा ने संजय चौहान की जनवादी पार्टी और केशव देव मौर्य के महान दल से गठबंधन भी किया है. ये दोनों पार्टियां भी ओबीसी राजनीति ही करती हैं. साफ है चुनावी से पहले सभी राजनीतिक पार्टियां ओबीसी को लुभाना चाहती हैं और चुनाव की तारीख आते आते ये लड़ाई और तेज हो गई.

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