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चिदंबरम को रियायतें मिली, राहत नहीं, जानिए कितने मामलों में हैं आरोपी

पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम सलाखों के पीछे से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. उन पर आईएनएक्स मीडिया केस के अलावा एयरसेल मैक्सिस और अगस्ता वेस्टलैंड के मामले भी लंबित हैं. ऐसे में सीनियर चिदंबरम क्या कभी जेल से बाहर भी निकल पाएंगे ये तो तमाम फाइलें खुलने के बाद ही पता चलेगा. उससे पहले आईएनएक्स मीडिया केस का इतिहास, वर्तमान और भविष्य जान लेते हैं. 

चिदंबरम को रियायतें मिली, राहत नहीं, जानिए कितने मामलों में हैं आरोपी

नई दिल्ली: INX मीडिया मनी लॉ्ड्रिंग मामले में अभियुक्त कांग्रेस सरकार में वित्त मंत्री रहे पलनीयप्पन चिदंबरम को राहत नहीं मिल रही. दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व वित्तमंत्री को 13 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में रखा है. इस दौरान चिदंबरम की सेहत को देखते हुए कुछ रियायतें भी बरती गईं हैं. उन्हें घर के खाने और कुछ घरेलू सुविधाएं दी जाने की हिदायत भी दी है. इसके अलावा कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय की चिदंबरम से पूछताछ करने के लिए एक दिन की हिरासत की मांग को ठुकरा दिया है. 

सीबीआई और ईडी के जांच के बाद नपे चिदंबरम
दरअसल, पी चिदंबरम पर आईएएक्स मीडिया केस में FIPB के नियमों के विरूद्ध जा कर निर्धारित रकम से ज्यादा के विदेशी निवेश को गलत तरीके से मंजूरी देने का मामला चल रहा है. उनपर भारतीय दण्डाधिकार के कई नियमों के तहत कई धाराएं लगाई गईं हैं. सीबीआई के एक मामले में उन्हें बरी भी कर दिया गया है. लेकिन पूरे केस को देखते हुए यह नहीं लगता कि चिदंबरम को सजा से राहत मिल सकेगी. प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई के अलग-अलग चार्जशीट में सीनियर चिदंबरम और जूनियर चिदंबरम के खिलाफ INX मीडिया की मालकिन इंद्राणी मुखर्जी के बयान के अलावा भी कई अहम सबूत जुटाए हैं. 
 
कहां से शुरू हुआ पूरा खेल
पूरा मामला तब का है जब चिदंबरम को कांग्रेस सरकार में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के ऊपर वरीयता दी और वित्तमंत्री बनाया. उस वक्त तक देवगौड़ा सरकार में चिदंबरम की ओर से पेश किए गए बजट को आयकर भरने के नए नियमों के हिसाब से ड्रीम बजट कहा जा रहा था. इसके अलावा शुरूआती समय में लेफ्ट की राजनीति से मेनस्ट्रीम में जगह बनाने वाले चिदंबरम यूपीए-1 की सरकार में बजट और वित्तमंत्रालय में अपनी प्रखरता से थोड़ा नाम कमा चुके थे. लेकिन पुत्रमोह ने चिदंबरम को कहीं का नहीं छोड़ा. बात यूपीए 2.0 सरकार की है जब चिदंबरम को फिर से वित्त मंत्रालय दिया गया. 

300 करोड़ से भी ज्यादा के रकम को मिली मंजूरी
शीना बोरा केस के मुख्य अभियुक्त इंद्राणी मुखर्जी तब मीडिया के क्षेत्र में हाथ आजमाना चाहते थे. जाहिर उसके लिए उन्हें बड़े निवेश की आवश्यकता थी. वो निवेश कहीं और से नहीं विदेशों से आने वाला था, लेकिन सरकारी तंत्र में FIPB नाम की एक संस्था थी जिसका काम था विदेशी निवेश की जांच-परख कर मंजूरी देना. उसने आईएनएक्स मीडिया के मालिकों की 300 करोड़ से भी ज्यादा के विदेशी निवेश की मांग को ठुकरा दिया. अब इंद्राणी मु्खर्जी पहुंची चेज ग्लोबल कंसल्टेंसी फर्म के पास कि आखिर कहीं से निवेश को मंजूरी दिलाने का रास्ता निकले. रास्ता निकला और निकलना ही था क्योंकि चेज ग्लोबल के मालिक थे कार्ति चिदंबरम जो वित्तमंत्री के बेटे थे. संयोग से या योजना ही वहीं थी, ये इंद्राणी मुखर्जी और जूनियर चिदंबरम ही जानते हैं. 

पुत्रमोह में नियमों को लांघ गए सीनियर चिदंबरम
अब कार्ति चिदंबरम के कहने पर मुखर्जी दंपति ने फिर से निवेश के लिए ज्ञापन दिया और इस बार उसे मंजूरी भी मिल गई और कार्ति चिदंबरम के चेज ग्लोबल कंसल्टेंसी के खाते में 3 करोड़ से भी ज्यादा रकम आ गई, 10 लाख की एडवाइजरी फी के अलावा. इसके अलावा कई दफा आईएनएक्स मीडिया के मालिकों और वित्तमंत्री जी की मुलाकात का प्रमाण भी मीडिया के हवाले से मिला. 2017 में पता चला कि यह तो मनी लॉड्रिंग का पूरा खेल है. पहले कार्ति चिदंबरम की 54 करोड़ की प्रॉपर्टी को अटैच कर लिया गया. बाद में सीबीआई ने जांच शुरू की तो पी चिदंबरम भी नप गए. 300 करोड़ से ज्यादा के निवेश को गलत तरीके से मंजूरी आखिर चिदंबरम ने वित्त मंत्रालय के संसदीय समिति के बिना ही ले लिया था और शायद कार्ति चिदंबरम ने इस एहसान के बदले बड़ी रकम भी ली थी. ईडी की नजर पड़ी और मामला कोर्ट तक पहुंचा. कोर्ट ने सीनियर चिदंबरम और जूनियर चिदंबरम पर सुनावाई करनी शुरू की और जैसे-जैसे केस खुलता गया, इंद्राणी मुखर्जी ने उसकी साफ तस्वीर पूछताछ में सीबीआई और ईडी के सामने रख दी.

अभी और एक केस की फाइल का खुलना बाकी


अब इस सुनवाई से पहले पिता-पुत्र पर और भी पैसों के गबन के सबूत मिलने लगे हैं. INX मीडिया के अलावा Aircel Maxis का एक केस भी है जहां चिदंबरम के वित्तमंत्री रहते 3200 करोड़ की विदेशी रकम को जाने कौन सा फॉर्मूला लगा कर न सिर्फ 180 करोड़ में बदल दिया गया बल्कि उसे मंजूरी भी मिल गई. संसदीय समिति के पास मामला गया भी नहीं. 600 करोड़ की निर्धारित मंजूरी के रोड़े को पार करने के लिए किस होशियारी से 180 करोड़ में तब्दील कर दिया गया, ये किसी को पता नहीं, पर शायद चिदंबरम को पता है. हालांकि, इस केस की सुनवाई होनी अभी बाकी ही है.