ज्ञानवापी मस्जिद विवाद: ASI सर्वेक्षण के आदेश के खिलाफ इलाहाबाद HC में अर्जी दायर

काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद केस में पुरातात्विक सर्वेक्षण के फैसले पर रोक लगाने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी गई है. याचिका में सर्वेक्षण पर रोक की मांग की गई है.

Written by - Sumit Kumar | Last Updated : Apr 13, 2021, 03:19 PM IST
  • ज्ञानवापी के ASI सर्वेक्षण के खिलाफ याचिका
  • कोर्ट के आदेश पर जल्द रोक लगाने की मांग
ज्ञानवापी मस्जिद विवाद: ASI सर्वेक्षण के आदेश के खिलाफ इलाहाबाद HC में अर्जी दायर

नई दिल्ली: काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद मामले में वाराणसी कोर्ट के आदेश के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक अर्जी दायर की गई है. ये अर्जी वाराणसी की ही अंजुमन इन्तेजामिया मस्जिद ने दायर की है. अर्जी में वाराणसी फास्ट ट्रैक कोर्ट के 8 अप्रैल के आदेश पर जल्द रोक लगाने की मांग की गई है.

कोर्ट के फैसले को बताया असंवैधानिक

उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने के जिला अदालत के फैसले के खिलाफ मंगलवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की.

दरअसल, 8 अप्रैल को वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने ज्ञानवापी मंदिर परिसर का ASI से सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया था. अर्जी में कहा गया है कि यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित है और इसपर हाईकोर्ट का फैसला आने है, ऐसे में हाईकोर्ट का फैसला आने तक ASI को जांच का आदेश देना असंवैधानिक है.

ज्ञानवापी मस्जिद की प्रबंधन समिति ‘अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी’ ने सोमवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक अति आवश्यक अर्जी दाखिल कर स्थानीय अदालत के आदेश पर रोक लगाने की मांग की.

अर्जी में ये भी कहा गया है कि वाराणसी कोर्ट ने 1991 के पूजा स्थलों कानून की अनदेखी की है. आपको बता दें कि वाराणसी कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण होगा, जिसका खर्च सरकार उठाएगी.

उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने दी जानकारी

उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के स्थायी अधिवक्ता पुनीत कुमार गुप्ता ने मीडिया से बताया, 'हमने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय का आज रुख किया और एक याचिका दायर की. चूंकि इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने 15 मार्च 2021 को निर्णय सुरक्षित रख लिया है, ऐसे में निचली अदालत कैसे इस मामले पर सुनवाई कर आदेश पारित कर सकती है.'

मस्जिद कमेटी के वकील एसएफए नकवी ने मीडिया से बात करते हुए ये भी कहा कि को बताया कि निचली अदालत के आदेश में पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) कानून, 1991 आड़े आता है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में उच्च न्यायालय में पहले से सुनवाई चल रही थी और फैसला सुरक्षित रख लिया गया है.

नकवी ने कहा, 'उच्च न्यायालय में फैसला सुरक्षित रखे जाने के बावजूद निचली अदालत ने इस पर सुनवाई कर आदेश पारित किया जोकि गैर कानूनी है. हमारी उच्च न्यायालय से गुजारिश है कि वह इस मामले में निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाए.'

हिन्दू पक्ष ने भी दायर की याचिका

वहीं हिन्दू पक्ष ने भी हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल की, कहा बिना उनका पक्ष सुने कोर्ट कोई आदेश जारी न करें.

कोर्ट ने मंदिर पक्ष के पक्षकार विजय शंकर रस्तोगी की अर्जी स्वीकार करते हुए पुरातात्विक सर्वेक्षण को मंजूरी दे दी थी. दिसंबर 2019 में वकील विजय शंकर रस्तोगी ने सिविल जज की अदालत में स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर की ओर से अर्जी दायर की थी.

इस तरह से होना है मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण

वाराणसी फास्ट ट्रेक कोर्ट के आदेश के मुताबिक 5 सदस्यी टीम जब पुरातात्विक सर्वेक्षण करेगी तो इस दौरान न तो मस्जिद की सामान्य गतिविधियां रुकेंगी और न ही नमाज. सर्वे की जानकारी भी पूरी तरह गोपनीय रहेगी. यह आम लोगों या मीडिया के साथ साझा नहीं की जाएगी.

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अगर सर्वे टीम को कुछ परेशानी आती है तो मस्जिद के भीतर ही नमाज के लिए वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराई जाएगी. कोर्ट ने सर्वे टीम में अल्पसंख्यक समुदाय के दो लोगों के साथ ही एक ऑबजर्वर रखने को भी कहा था.

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