पैसे के बल पर रुस-अमेरिका दोनो को संभाल लेगा भारत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज इस स्थिति में है कि रुस और अमेरिका जैसे दुनिया के दो ध्रुवों को एक साथ संभाल सकता है. भारत रुस से एस-400 डिफेन्स सिस्टम खरीद रहा है. जिसपर अमेरिका आपत्ति जता रहा था. जिसके बाद यूएस से भी 7.5 अरब डॉलर यानी 52 हजार करोड़ के हथियार मंगाने की तैयारी कर ली गई है. क्या इसके बाद भी अमेरिका रुस से हथियार खरीदने पर कुछ कह पाएगा?   

पैसे के बल पर रुस-अमेरिका दोनो को संभाल लेगा भारत
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नई दिल्ली: भारत रुस से जल्दी ही S-400 मिसाइल डिफेन्स सिस्टम हासिल कर लेगा. इसके लिए रुस को डील की 15 फीसदी यानी 800 मिलियन डॉ़लर रकम दी जा चुकी है. अमेरिका इस डील पर लगातार नजर रखे हुए है और लगातार इसे लेकर भारत और रूस के लिए धमकी वाली भाषा बोल रहा था. लेकिन भारत ने साफ कर दिया था कि वह इस डील को करने की दिशा में आगे बढ़ेगा. इसका तोड़ ये निकाला गया है कि  भारत अमेरिका से भी 7.5 अरब डॉलर (लगभग 52 हजार करोड़) के रक्षा उपकरण खरीदने की तैयारी कर चुका है. 

ट्रंप दे चुके हैं मंजूरी
भारत अमेरिका से सशस्त्र ड्रोन और नौसेना के लिए 12 जासूसी विमान खरीदना चाहता है. इसमें सी गार्जियन ड्रोन और पी-8 आई एंटी-सबमरीन युद्ध और निगरानी विमान शामिल हैं. तीन सैन्य सेवाओं की क्षमता आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार से अमेरिकी सरकार को इस संबंध में अनुरोध पत्र दो महीने के अंदर यानी जनवरी 2020 तक जारी कर दिया जाएगा. 


ट्रंप प्रशासन ने इस साल की शुरुआत में भारत को ड्रोन बेचने की मंजूरी दी थी. इसमें भारतीय जरुरतों के मुताबिक मिसाइल और अन्य हथियार लोड किए जाएंगे. ये सशस्त्र ड्रोन से बहुत ऊंचाई से भी जमीन पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखते हुए जरुरत के वक्त हमला भी कर सकते हैं. इसके मिलने से नौसेना के साथ ही अन्य सशस्त्र बलों की क्षमता में वृद्धि होगी।

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लगातार बढ़ रहा है भारत अमेरिका रक्षा सहयोग
भारत आगे भी अमेरिका से दस P-8I पनडुब्बी रोधी युद्ध और लंबी दूरी के निगरानी विमान लेने की योजना बना रहा है. पिछले दस सालों में भारत ने सैन्य बेड़ों में बड़ी संख्या में अमेरिकी हथियारों को शामिल किया है, जिसमें अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर, चिनूक हेवी-लिफ्ट हेलीकॉप्टर और सी -17 ग्लोबमास्टर शामिल हैं. 

रुस से भी S-400 सिस्टम खरीदने की प्रक्रिया तेज
रॉयटर के हवाले से खबर आई है कि भारत ने S-400 एंटी एयरक्रॉफ्ट मिसाइल सिस्‍टम के लिए रूस को 800 मिलियन(85 करोड़) डॉलर का भुगतान कर दिया है. रूसी समूह रोसटेक के सीईओ रोस्टेक सर्गेई केमेजोव ने सोमवार को बताया कि भारत की ओर से रकम का भुगतान किए जाने के बावजूद बातचीत का दौर जारी है.  भारत के साथ किए गए इस करार के 2025 तक पूरा होने की उम्‍मीद है. 


नए पैमेंट के बाद अब पहला S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम 16 से 18 महीने में भारत को मिल जाएगा. रूस के अधिकारियों के मुताबिक 2020 तक पहला सिस्टम मिल जाएगा. इसके बाद अगले पांच साल में सभी हथियार भारत में तैनात होकर पूरी तरह एक्टिव हो जाएंगे. 

भारत के लिए इसलिए जरुरी है S-400
भारत को बदमाश पाकिस्तान की तरफ से किसी भी आकस्मिक खतरे से बचने के लिए मिसाइल डिफेन्स सिस्टम की सख्त जरुरत है. ये हवाई क्षेत्र से किसी भी हमले को ध्वस्त कर सकता है. यह भारत में दुश्मन की मिसाइलों और हवाई जहाजों दोनों पर एक जैसा सटीक रुप से कारगर होगा. यह डिफेंस सिस्टम पाकिस्तान के साथ साथ चीन की भी न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइलों के सामने रक्षा कवच का काम करेगा. यह सिस्टम दुश्मन देश की सीमा में उड़ रहे विमानों को धराशायी कर सकता है. 
 S-400 ट्रायम्फ को United States of America के एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल डिफेंस सिस्टम 'थाड' से भी ज्यादा बेहतर माना जाता है. यह एक साथ तीन दिशाओं में मिसाइल दाग सकता है. 

अमेरिका बना रहा था भारत पर दबाव
अमेरिका लगातार भारत पर दबाव बना रहा था कि वो उस डील से  बाहर निकल जाए. अमेरिकी अधिकारियों की चिंता थी कि एस-400 अमेरिकी मूल के सैन्य उपकरणों और भारत द्वारा उपयोग किए जाने वाले हवाई प्लेटफार्मों पर कब्जा कर सकता है.
अक्टूबर में अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर बीच हुई मीटिंग में भी इसका मुद्दा उठा था. तब भारत ने अपनी संप्रभुता की बात कही थी. तब जयशंकर ने कहा कोई देश किसी को ये नहीं कह सकता कि आप रूस से हथियार नहीं खरीद सकते.

भारत के अलावा तुर्की भी रूस से एस-400 डिफेंस मिसाइल खरीद रहा है. ऐसे में अमेरिका उस पर भी दबाव डाल रहा है. ट्रंप एर्दोगन को धमकी दे चुके हैं कि अगर उन्होंने एस-400 डिफेंस सिस्टम खरीदा तो अमेरिका तुर्की पर प्रतिबंध लगा देगा.

लेकिन भारत ने अमेरिका से भी डिफेन्स डील करके उसका मुंह बंद करने का फैसला कर लिया है. 

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