राजनीति के बाजार में भाव बढ़ाने की ये है ''पवार ट्रिक''

महाराष्ट्र का सियासी घमासान बार-बार इस बात को साबित करने पर तुला हुआ है कि 'राजनीति में कुछ भी संभव है'. लेकिन शरद पवार ने पीएम मोदी से मुलाकात को लेकर जैसे पलटी मारी है, उससे ये कहना गलत नहीं होगा कि राजनीति के बाजार में भाव बढ़ाने की ये 'पवार ट्रिक' है.

राजनीति के बाजार में भाव बढ़ाने की ये है ''पवार ट्रिक''

नई दिल्ली: महाराष्ट्र की राजनीति में जोरदार उठापटक का खेल चल रहा है. कभी कोई किसी के साथ मेल मिलाप करता है, तो कोई कभी सामने वाले की टांग खींचने में जुट जाता है. हम यहां, शरद पवार के उस बयानों का बखान कर रहे हैं, जिसे उन्होंने एक मराठी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू के दौरान दिया था. लेकिन सबसे पहले एक सवाल है, जो हर कोई एनसीपी प्रमुख से पूछ रहा है कि क्या 'सियासत' ने कमजोर की पवार की 'याददाश्त'?

पहले किसानों का नाम, अब पीएम को करेंगे 'बदनाम'?

पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात पर बदले एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बोल आखिरकार 15 दिन के अंदर ही कैसे बदल गए, ये वाकई बड़ा और गंभीर सवाल है. दरअसल, इस मसले को दो तरीके से समझा जा सकता है.

1). 20 नवंबर को पवार की जुबान

जब बीते 20 नवंबर को शरद पवार ने दिल्ली में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी, तो उस वक्त उन्होंने ये दुहाई दी थी कि इस मुलाकात में किसानों के मुद्दे पर बात हुई. उन्होंने मीडिया के सामने आकर ये कहा कि प्रधानमंत्री का ध्यान फसलों को हुए नुकसान की ओर खींचा. गौर करने वाली बात तो ये है, कि उस वक्त 'शरद दादा' ने सीधे-सीधे शब्दों में ये कहा था कि पीएम मोदी से मुलाकात में कोई राजनीतिक बात नहीं हुई है.

2). अब पलट गएं 'जनाब'

अब शरद पावर अपने 20 तारीख वाले बयान से पूरी तरह पलट गए हैं. उन्होंने ये बता दिया कि इस मुलाकात में सुप्रिया सुले यानी उनकी बेटी को कैबिनेट मंत्री बनाने की पेशकश की. अब पवार साहब बोल रहे हैं कि 'मैंने पीएम से कहा कि साथ रहकर काम करना संभव नहीं है, हमारे संबंध अच्छे हैं और अच्छे रहेंगे.' 

बात कुछ हजम नहीं हो रही है, करीब 15 दिन पहले शरद पवार ने सरकार बनने से पहले कुछ और ही बात कही थी और अब कुछ और ही राग अलाप रहे हैं. इसके पीछे एक बड़ी वजह ये भी है कि राजनीति के बाजार में भाव बढ़ाने के लिए ये पवार की पावर ट्रिक तो नहीं है.

'पलटू राम' का इतिहास

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुखिया शरद पवार के पटली मारने की दास्तां बड़ी लंबी और पुरानी है. ये कहानी साल 1978 से शुरू हो गई थी, जब वो महज 38 साल की उम्र में ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए थे. वो उस वक्त से सबसे युवा सीएम थे, लेकिन उन्होंने 1978 के मुख्यमंत्री वसंत दादा पाटील की सरकार के कैबिनेट में उद्योग मंत्री रहने के बावजूद पलटी मारी थी, उसका किस्सा जानने के बाद उनके 'दोमुहे' बयान से किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए. उस वक्त एक रोज सीएम पाटील ने अपने सबसे खास और करीबी मंत्री शरद पवार को दोपहर के भोजन पर बुलाया था. खाने-पीने के बाद जब पवार जाने लगे तो बोलें कि 'दादा अब मैं चलता हूं, भूल चूक माफ कर देना'. इस बात को वसंत दादा पाटील समझ नहीं पाए, लेकिन शाम तक जब पवार ने अपने 'पवार ट्रिक' का इस्तेमाल करके 38 विधायकों को तोड़ दिया, तो उन्हें समझ में आ गया था कि पवार साहब ने उनसे किस बात की माफी मांगी थी. इसके अलावा पवार ऐसे कई दफा पलटी मारें कि सिलसिला और संख्या बढ़ती चली गई.

पवार के 5 'पंच'

1). भारतीय जनता पार्टी को महाराष्ट्र की सत्ता से बाहर किया'
2). केंद्र को महाराष्ट्र से राष्ट्रपति शासन हटाने पर मजबूर किया
3). NCP को तीसरे नंबर की पार्टी से सीधे सत्ता में हिस्सेदार बनाया
4). भ्रष्टाचार के आरोपी अजित पवार का शुद्धिकरण कराया
5). महाराष्ट्र की राजनीति में NCP और खुद का कद और बढ़ाया

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शरद पवार ने पुराने बयान से पलटी मारकर हर किसी को उलझा दिया है, हर कोई जानना चाहता है कि महाराष्ट्र पर मोदी-पवार की डील का सच क्या है? और सियासत में कौन सच्चा और कौन झूठा है? लेकिन कहीं ये सबकुछ सियासत में भाव बढ़ाने की पावर ट्रिक जैसी ही प्रतीत हो रही है.

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