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अंतरात्मा की आवाज पर पीएम मोदी ने किया फैसला, भारत नहीं होगा RCEP में शामिल

हमारा देश रीजनल कांप्रिहेन्सिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप यानी आरसीईपी में शामिल नहीं होगा. सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि पीएम मोदी ने भारत की स्थिति को स्पष्ट करते हुए RCEP में जुड़ने से इनकार कर दिया है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी उनसे कुछ ऐसी ही अपील की थी. 

अंतरात्मा की आवाज पर पीएम मोदी ने किया फैसला, भारत नहीं होगा RCEP में शामिल
RCEP में शामिल होने से पीएम मोदी का इनकार

बैंकॉक: सरकारी सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि RCEP बैठक में सम्मिलित होने गए पीएम मोदी ने कहा है कि 'मैंने सभी भारतीयों के हितों के संबंध में आरसीईपी समझौते को मापा, लेकिन मुझे कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला. न तो गांधीजी के सिद्धांतों ने और न ही मेरी अंतरात्मा ने मुझे आरसीईपी में शामिल होने की अनुमति दी.'
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि भारत इस व्यापारिक सहयोग संगठन का हिस्सा नहीं बनेगा. 

भारत के पक्ष में नहीं था RCEP 
दरअसल भारत का मानना है कि RCEP समझौता अपनी मूल मंशा को नहीं दर्शा रहा है और इसके नतीजे संतुलित और उचित नहीं हैं. पीएम मोदी ने इस बैठक में कहा कि 'ऐसे फैसलों में हमारे किसान, व्यापारी, प्रफेशनल्स और उद्योगों की भी बराबर भागीदारी होनी चाहिए. कामगार और ग्राहक दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, जो भारत को एक विशाल बाजार और क्रय शक्ति के मामले में देश को तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनाते हैं. आरसीईपी की कल्पना से हजारों साल पहले भारतीय व्यापारियों, उद्यमियों और आम लोगों ने इस क्षेत्र के साथ संपर्क स्थापित किया था. सदियों से इन संबंधों ने हमारी साझा समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.'

दरअसल पिछले कुछ समय से भारत ने अपना बाजार दूसरे देशों के लिए खोल दिया था. लेकिन इसकी वजह से घरेलू उत्पादन को नुकसान उठाना पड़ रहा था. RCEP में शामिल देश भारत के बाजार का तो भरपूर उपयोग कर रहे थे. लेकिन अपने देशों के  बाजार उस अनुपात में भारतीय उद्योग जगत के लिए नहीं खोल रहे थे. 

कांग्रेस सरकार के शासनकाल में खुला था बाजार
मनमोहन सिंह के शासनकाल में भारत सरकार ने असियान देशों के लिए 74 फीसदी मार्केट खोला लेकिन इंडोनेशिया जैसे धनी देशों ने भारत में केवल 50 फीसदी मार्केट ही खोला. जिसकी वजह से व्यापार असंतुलन बढ़ा. इसके अलावा यूपीए सरकार ने साल 2007 में भारत-चीन FTA के लिए भी सहमति दी थी और 2011-12 में चीन के साथ RCEP समझौते पर भी मान गई थी. 


लेकिन इसका असर ये हुआ कि इन फैसलों के कारण घरेलू उद्योग अभी भी संकट से जूझ रहा है. 
मोदी सरकार के आने के बाद इस असंतुलन को दूर करने की कोशिश की जा रही है. इस मुद्दे को हल किये बिना भारत द्वारा RCEP के तहत एक और असमान समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करना उचित नहीं होगा. 

भारत ने खुलकर अपनी चिंता जाहिर की
भारत की तरफ से पीएम मोदी RCEP की बैठक में शामिल तो हुए, लेकिन देश के हितों को ध्यान में रखते हुए इस पार्टनरशिप में शामिल होने से इनकार कर दिया. उन्होंने भारतीय सेवाओं और निवेशों के लिए वैश्विक बाजार खोलने की आवश्यकता पर जोर दिया. जिससे देश के गरीबों के हितों की रक्षा के साथ साथ सर्विस सेक्टर को भी फायदा होने की उम्मीद है. 

RCEP का उद्देश्य क्या है 
आरसीईपी एक व्यापारिक गठबंधन है. जिसके सदस्य देश एक दूसरे के साथ बेहद सहूलियत से व्यापार कर सकते हैं. इसके सदस्य देशों को आयात और निर्यात पर टैक्स नहीं देना पड़ता है या इसकी मात्रा बहुत कम होती है. RCEP की बैठक में आसियान के 10 देशों के अलावा भारत, चीन, जापान, साउथ कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यू जीलैंड भी के शामिल हुए थे. लेकिन भारत ने अब इससे बाहर रहने का फैसला किया है.