प्रधानमंत्री.. 'गंगा किनारे वाला'

प्रधानमंत्री मोदी काशी के देव दीपावली में शामिल हुए. 15 लाख दीयों से जगमग 84 घाट हुए. प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ के भी किए दर्शन, इस मौके पर बनारस नगरी दुल्हन की तरह सजी रही..

प्रधानमंत्री.. 'गंगा किनारे वाला'

वाराणसी: देव दीपावली के शुभ अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काशी विश्वनाथ की धरती पर पहुंचे. बाबा विश्नवनाथ के दरबार से जब पीएम मोदी बाहर आए तो उन्होंने शुरूआत की उस यात्रा की जिसका पल-पल मनोहरी था और इसके साथ ही उन्होंने दीप दीपावली का पहला दीप भी प्रज्विलत किया.

जगमगाती काशी की भव्यता

पीएम मोदी जब क्रूज में सवार हुए तो पतित पावनी गंगा की लहरों के साथ चलते हुए वो जगमगाती काशी की भव्यता को एकटक निहार रहे थे. विश्व की प्रीचनतम सभ्यता के साथ आज की तकनीक का यहां वो तालमेल दिखा, जिसने पीएम मोदी का दिल जीत लिया, काशी का दिल जीत लिया, आपका और हमारा दिल जीत लिया.

अपने ज़ेहन में हर नजारे को जीते पीएम का ये कारवां आगे बढ़ रहा था और हर नई तस्वीर का पीएम ने बाहें खोल कर स्वागत किया औऱ आखिरकार वो लम्हा भी आया, जब देव दीपावली का पहला दीप पीएम मोदी ने प्रजव्लित किया. काशी की धरती से मानो यही संदेश गया. मां गंगा की गोद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधन भी किया. जयकारे के साथ उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि "काशी कोतवाल की जय, माता अन्नपूर्णा की जय, मां गंगा की जय। जो बोले सो निहाल, सत् श्री अकाल। आपको देव दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं. सभी को गुरुनानक देव जी के प्रकाश पर्व की बहुत-बहुत बधाई.."

आपको गंगा किनारे प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की खास बातें बताते हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि "आज मां गंगा के सानिध्य में काशी प्रकाश का उत्सव मना रही है. मुझे भी महादेव के आशीर्वाद से इस प्रकाश गंगा में डुबकी लगाने का सौभाग्य मिल रहा है. काशी के लिए एक और भी विशेष अवसर है. कल मन की बात में भी मैंने इसका जिक्र किया था. सौ साल से भी पहले माता अन्नपूर्णा की जो मूर्ति काशी से चोरी हो गई थी, वो फिर वापस आ रही है. माता अन्नपूर्णा एक बार फिर अपने घर लौटकर वापस आ रही हैं. हमारे देवी देवताओं की ये प्राचीन मूर्तियां, हमारी आस्था के प्रतीक के साथ ही हमारी अमूल्य विरासत भी हैं. ये बात सही है कि इतना प्रयास अगर पहले किया गया होता, तो ऐसी कितनी ही मूर्तियां, देश को काफी पहले वापस मिल जातीं, लेकिन कुछ लोगों की सोच अलग रही है."

उन्होंने कहा कि "हमारे लिए विरासत का मतलब है देश की धरोहर, जबकि कुछ लोगों के लिए विरासत का मतलब होता है, अपना परिवार और अपने परिवार का नाम.. हमारे लिए विरासत का मतलब है हमारी संस्कृति, हमारी आस्था. उनके लिए विरासत का मतलब है अपनी प्रतिमाएं, अपने परिवार की तस्वीरें. ऐसा लग रहा है जैसे आज पूर्णिमा पर देव दीपावली मनाती काशी, महादेव के माथे पर विराजमान चन्द्रमा की तरह चमक रही है. काशी की महिमा ही ऐसी है."

पीएम ने बताया कि "काशी सबको, पूरे विश्व को प्रकाश देने वाली है, पथ प्रदर्शन करने वाली है. हर युग में काशी के इस प्रकाश से किसी ने किसी महापुरुष की तपस्या जुड़ जाती है और काशी दुनिया को रास्ता दिखाती है. आज ये दीपक उन आराध्यों के लिए भी जल रहे हैं, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किये. काशी की ये भावना, देव दीपावली की परंपरा का ये पक्ष भावुक कर जाता है. इस अवसर पर मैं देश की रक्षा में अपनी शहादत देने वाले, हमारे सपूतों को नमन करता हूं."

उन्होंने कहा, "आज हम रिफॉर्म्स की बात करते हैं, लेकिन समाज और व्यवस्था में रिफॉर्म्स के बहुत बड़े प्रतीक तो स्वयं गुरु नानक देव जी ही थे. हमने ये भी देखा है कि जब समाज, राष्ट्रहित में बदलाव होते हैं, तो जाने-अनजाने विरोध के स्वर ज़रूर उठते हैं, लेकिन जब उन सुधारों की सार्थकता सामने आने लगती है तो सबकुछ ठीक हो जाता है. यही सीख हमें गुरुनानक देवजी के जीवन से मिलती है."

अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि "इस बार के पर्व, इस बार की दीपावली जैसे मनाई गई, जैसे देश के लोगों ने लोकल प्रोडक्ट और लोकल गिफ्ट्स के साथ अपने त्योहार मनाए वो वाकई प्रेरणादाई है, लेकिन ये सिर्फ त्योहार के लिए नहीं, ये हमारी जिंदगी का हिस्सा बनने चाहियें. पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आपकी जो लंबे समय से मांग थी, वो पूरी हो गई है. लेजर शो में अब भगवान बुद्ध के करूणा, दया और अहिंसा के संदेश साकार होंगे. ये संदेश आज और भी प्रासंगिक होते जाते हैं. जब दुनिया हिंसा, अशांति और आतंक के खतरे देखकर चिंतित है."

इस संबोधन के बाद पीएम मोदी क्रूज से गंगा पार और चेतसिंह घाट पर आयोजित लेजर शो का नज़ारा देखा.

इससे पहले पीएम मोदी ने बाबा विश्वनाथ के मंदिर पहुंचने के लिए अलकनंदा क्रूज की सवारी की. पीएम मोदी और योगी अलकनंदा क्रूज से ललिता घाट पहुंचे थे. इसके बाद उन्होंने विश्वनाथ कॉरिडोर के विकास कार्यों का जायजा लिया.

काशी की धरती थी बाबा विश्वनाथ का दरबार था और पीएम मोदी बाबा भोलेनाथ की पूजा अर्चना में विलीन थे. प्रधानमंत्री मोदी की शिव भक्ती की तस्वीर नई नहीं है, लेकिन ये मौका बेहद खास था. भोलेनाथ के त्रिशूल पर उनकी कर्मभूमि काशी विराजित है. उसके उद्धार का संकल्प प्रधानमंत्री ने लिया है. बाबा की धरती पर विकासकार्यों को आगे बढ़ाते पीएम मोदी ने एक बार फिर बाबा का आर्शीवाद लिया. इसके बाद गृभगृह से पीएम मोदी बाहर आए औ र मंदिर प्रांगण से निकलते हुए उन्होंने उन कार्यों का जायजा लिया जो पूरे हो चुके हैं. पहली बार वे गंगा मार्ग से काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे औऱ उनकी इस यात्रा का हर पल मनमोहक था. करीब 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्रूज से रविदास घाट पहुंचें और संत रविदास की प्रतिमा को नमन किया.

बाबा के दर पर 'भक्त मोदी'

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