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"राजनीति में राहुल गांधी 15 साल से कर रहे हैं इंटर्नशिप"

लगातार मात खा रही कांग्रेस के अच्छे दिन कब लौटेंगे, यह सवाल पार्टी के पुराने नेताओं से लेकर करीबियों की भी मुश्किलें बढ़ा रही है. एक-एक कर के बगावत की आवाजें मुख्यधारा में आती जा रही हैं.   

 "राजनीति में राहुल गांधी 15 साल से कर रहे हैं इंटर्नशिप"

नई दिल्ली: पहले लोकसभा में कई पुराने नेताओं ने पार्टी का दामन छोड़ा, फिर राज्य के विधानसभा चुनावों में रसूखदार करीबी निकलते चले गए और इसी बीच कभी राहुल गांधी के बेहद खास लोगों में से एक माने जाने वाले संजय निरूपम ने भी कांग्रेस से खार खा कर पार्टी छोड़ दी. कहते हैं कि जब समय अच्छा ना चल रहा हो तो अपने भी साथ नहीं देते. अब कांग्रेस युवराज राहुल गांधी के सहयोगी रहे पंकज शंकर ने पार्टी को अच्छी-खासी लताड़ लगा दी. उन्होंने राहुल गांधी को राजनीति का नौसिखिया करार दिया है. 

राहुल अब तक कर रहे हैं इंटर्नशिप

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी 2004 से ही सक्रिय राजनीति करते आ रहे हैं. अब तक 15 साल हो गए लेकिन फिर भी राहुल किसी नौसिखिए की तरह ही राजनीतिक दांवपेंच में कच्चे हैं. वे यहीं नहीं रूके उन्होंने कहा कि 15 सालों से सक्रिय रहने के बाद भी कांग्रेस के युवराज अब तक इंटर्नशिप ही कर रहे हैं. इतने प्रयोग के बाद भी राहुल गांधी अपना गढ़ तक गंवा बैठे हैं. वायनाड़ से सांसद राहुल गांधी ने अपनी अध्यक्षीय पारी के दौरान लोकसभा में नेतृत्व किया जो असफल ही माना जाता है. कारण कि कांग्रेस 10 फीसदी सीट भी नहीं ला पाई और राहुल गांधी समेत कई दिग्गज नेता अपनी पारंपरिक सीट तक नहीं बचा सके. 

कांग्रेस की नेतृत्व-क्षमता कमजोर

पंकज शंकर कभी राहुल गांधी के बेहद खास लोगों की टीम का हिस्सा रहे हैं. लेकिन पिछले दिनों कांग्रेस की नेतृत्व-क्षमता पर सवालिया निशान लगाते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी पुत्र-मोह में पड़ कर गर्त में जा रही है. प्रियंका गांधी को राजनीतिक वारिस नहीं बनाए जाने के कांग्रेस के फैसले को गलत ठहराते हुए उन्होंने कहा कि आखिर प्रियंका को राजनीति में आने से रोका क्यों जा रहा है ? जबकि उनकी राजनीतिक समझ राहुल गांधी से बेहतर है. कांग्रेस उन्हें आगे लाने से डर रही है. इसके बाद उन्होंने सफाई देते हुए यह भी कहा कि वे राहुल गांधी का विरोध नहीं कर रहे लेकिन पार्टी को हो रहे नुकसान पर किसी न किसी को तो आवाज उठाना ही होगा. 

पार्टी नेताओं में लगातार हो रही अनबन

पंकज शंकर ने पिछले दिनों ट्वीट भी किया था जब राहुल गांधी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर विदेश यात्रा में मशगूल थे. कांग्रेस के अंदर ये बगावती तेवर पार्टी को अंदर ही अंदर खोखला करते जा रहा है. कांग्रेस के रसूखदार नेताओं ने मुखर हो कर विरोध करना शुरू कर दिया है. मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री चुने जाने को लेकर CM  कमलनाथ और कभी राहुल गांधी के करीबी नेताओं में से एक ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच नोंक-झोंक से पार्टी के अंदर खेमेबाजी भी शुरू हो गई है. इसके अलावा भी पार्टी के अंदर कई जिच की खबरें भी आती ही रहती हैं. हरियाणा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर ने पद छीने जाने के बाद कांग्रेस की सदस्यता ही छोड़ दी. 

जानकारों ने भी बदलाव करने की दी नसीहत

पार्टी की हालिया स्थिति पर यह विशेषज्ञों की ओर से की गई पहली टिप्पणी नहीं है. इससे पहले भी कई बार कांग्रेस को गांधी परिवार से इतर किसी चेहरे की तलाश करने की सलाह दी गई है. रामचंद्र गुहा की ओर से भी पार्टी आलाकमान को नसीहत दी गई थी कि कांग्रेस में जल्द से जल्द आमूलचूल बदलाव किए जाएं. इस तरह के व्यवहार और पार्टी की ढ़ीली स्थिति काफी नुकसान पहुंचा रही है, खासकर पार्टी के पुराने नेताओं का, जिनका मोहभंग भी हो रहा है.