सदन से आवाज आई, राहुल गांधी कहां हैं ? जवाब आया- छुट्टी पर

संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है, लेकिन राहुल गांधी गायब हैं. उनकी अनुपस्थिति में सदन में उनकी तलाश जारी है. खबर है कि राहुल गांधी छुट्टियों पर हैं

सदन से आवाज आई, राहुल गांधी कहां हैं ? जवाब आया- छुट्टी पर

नई दिल्लीः संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो चुका है. केंद्र अपने हर मुद्दे, मसले और मामले तय किया बैठा है. विपक्ष (जो कि दिखता नहीं) को सवाल तैयार करके आने हैं. सवाल-जवाब का लंबा दौर चलना है, जो कि चल रहा है. लेकिन मंगलावार जारी इस दौर के बीच अचानक स्पीकर महोदय की सवालिया आवाज गूंजती है. राहुल गांधी कहां हैं, अपनी सीट पर तो नहीं दिख रहे. मैं उन्हें सवाल पूछने का मौका देना चाहता हूं. वह सवाल जो उनके नाम पर सूची बद्ध है. वह हैं नहीं और उनका नाम दिख रहा है.

ऐसा क्या हुआ था सदन में
हुआ ऐसा था कि कांग्रेस के अन्य सांसद के. सुरेश राहुल गांधी की सीट पर आकर जीरो ऑवर (शून्य काल) के दौरान बोल रहे थे. इस दौरान स्पीकर ओम बिड़ला का ध्यान गया एलईडी स्क्रीन पर, जहां राहुल गांधी का नाम चमक रहा था. स्पीकर ने कहा कि आप अपनी सीट पर जाएं. आपकी सीट रिक्त बता रही है. राहुल गांधी सदन में हैं नहीं और उनका नाम दिख रहा है. फिर कहा कि राहुल गांधी कहां हैं. वह तो आज छुट्टी पर हैं. उन्होंने के सुरे्श से फिर दोहराया कि आप अपनी ही सीट पर जाकर बोलें.

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सत्र शुरू हुए दूसरा दिन, राहुल नहीं दिखे
स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि राहुल गांधी का सवाल प्रश्नकाल के लिए सूची बद्ध है. वह उपस्थित रहते हैं तो मैं उन्हें प्रश्न पूछने के लिए मौका देना चाहता हूं. लोकसभा के शेड्यूल के मुताबिक 28 नंबर का प्रश्न राहुल गांधी के लिए था. वह केरल में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के संबंध में सवाल पूछने वाले थे. सोमवार से शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस नेता राहुल गांधी अभी तक सदन में नहीं दिखे हैं. भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी ने भी स्पीकर से अनुरोध किया कि सदन के सदस्यों को उनकी निर्धारित सीटों से ही बोलने का निर्देश दिया जाए. उन्होंने कहा, ‘पूरा देश हमें देख रहा है। ऐसे में यह जरूरी है कि टीवी स्क्रीन पर हमारा नाम सही-सही दिखे.

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लेकिन राहुल गांधी, हर जरूरत पर गैर मौजूद क्यों रहते हैं
अभी कुछ दिनों पहले हरियाणा-महाराष्ट्र में चुनाव थे. जहां एक ओर भाजपा, हरियाणा का स्थानीय दल जजपा और महाराष्ट्र में शिवसेना नए जनाधार बनाने में लगी थीं, वहीं कांग्रेस शुरुआत दिनों में जमीन से ही नदारद थी. चुनाव आयोग की तरफ से चुनाव की तारीखें घोषित कर दी गईं, इसके बाद चाहिए था कि पार्टी नेतृत्व कार्यकर्ताओं के बीच जाकर उनका प्रोत्साहन करे. उनसे नए समीकरण पर बात करे. नई चुनावी रणनीतियां तय करे. इसके उलट राहुल गांधी कहीं विदेश यात्रा पर निकल गए. कभी उनके बैंकॉक जाने की खबरें आती रहीं तो कभी कंबोडियां. वह कहीं भी गए हों, लेकिन हरियाणा में तो नहीं थे. नतीजा यह हुआ कि अंतिम समय में उन्होंने सैलजा कुमारी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया और इस तरह पार्टी में भी असंतोष बना रहा. चुनाव प्रचार में इस तनाव का असर दिखता रहा, लेकिन राहुल गांधी नहीं दिखे.

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बिहार में विधानसभा चुनाव थे, राहुल छुट्टी पर थे
साल था 2015. बिहार में विधानसभा चुनाव जोरों पर थे. सभी दल अपनी रणनीति बनाने में जुटे थे और कांग्रेस अपने शीर्ष नेतृत्व से दिशा-निर्देश मिलने का इंतजार कर रही थी. वजह थी बस एक ही. राहुल गांधी छुट्टी पर थे. यानी कि कार्यकर्ता उनकी बाट जोह रहे थे कि कब राहुल जी आएं, कुछ बताएं तो हम लोग भी जनता-जनार्दन के बीच निकलें. शुरुआत में तो कुछ दिन पता ही नहीं चला कि कहां हैं. फिर बताया गया कि वह कोलराडो के एस्पेन में हैं और कि्सी कॉन्फ्रेंस में शिरकत करने वहां पहुंचे हैं. हालांकि इसके पहले वह दो चुनावी रैलियों को संबोधित कर चुके थे, लेकिन उसका कोई जोश भरा असर नहीं पड़ा था. जरूरत थी कि अगली रैलियों के लिए मुद्दे खोजे जाएं, दोबारा जोश और उत्साह से लौटने की तैयारी की जाए, लेकिन राहुल नहीं थे. क्योंकि राहुल छुट्टी पर थे.