क्या है किशोर न्याय संशोधन विधेयक 2021, राज्यसभा में हुआ पारित

महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने 15 मार्च, 2021 को लोकसभा में किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) संशोधन बिल, 2021 को पेश किया था. बिल किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) एक्ट, 2015 में संशोधन करता है. एक्ट में कानून से संघर्षरत बच्चों और देखरेख तथा संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों से संबंधित प्रावधान हैं साथ ही यह विधेयक बाल संरक्षण को मजबूत करने के लिए अधिक जरूरी उपाय बताता है.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Jul 29, 2021, 06:24 AM IST
  • गोद लेने की प्रक्रिया भी बनी आसान
  • हर जिले में बनेंगे सीडब्ल्यूसी
क्या है किशोर न्याय संशोधन विधेयक 2021, राज्यसभा में हुआ पारित

नई दिल्लीः राज्यसभा में चल रहे मानसून सत्र में जारी हंगामे के बीच बुधवार को किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) संशोधन बिल, 2021 पारित किया गया. इसके बाद राज्यसभा गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने मंगलवार को राज्यसभा में विपक्ष के भारी हंगामे के बीच किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) संशोधन विधेयक 2021 पेश किया.

पीठासीन अधिकारी सस्मित पात्रा ने स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही शुरू करते हुए विधेयक पेश करने के लिए ईरानी का नाम पुकारा. इसके साथ ही विपक्ष के सदस्य भी नारे लगाते हुए सभापति  के आसन के समक्ष आ गए. इस बीच ईरानी ने यह विधेयक पेश कर दिया. इसके बाद सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई. मानसूत्र लगातार हंगामे की भेंट चढ़ रहा है. इस बीच किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) संशोधन बिल, 2021 अपनी ओर ध्यान खींचता है.

संबंधित एक्ट 2015 में संशोधन करता है विधेयक
महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने 15 मार्च, 2021 को लोकसभा में किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) संशोधन बिल, 2021 को पेश किया था. बिल किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) एक्ट, 2015 में संशोधन करता है. एक्ट में कानून से संघर्षरत बच्चों और देखरेख तथा संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों से संबंधित प्रावधान हैं साथ ही यह विधेयक बाल संरक्षण को मजबूत करने के लिए अधिक जरूरी उपाय बताता है.

गंभीर अपराध को किया गया विस्तृत
विधेयक में तय कानून के मुताबिक, अगर कोई किशोर गंभीर अपराध का आरोपी है तो किशोर न्याय बोर्ड उस बच्चे की छानबीन करेगा. गंभीर अपराध यानी ऐसे अपराध जिनके लिए तीन से सात वर्ष तक की जेल की सजा दी जाती है. बिल में यह जोड़ा गया है कि गंभीर अपराधों में ऐसे अपराध भी शामिल होंगे जिनके लिए सात वर्ष से अधिक की अधिकतम सजा है, और न्यूनतम सजा नहीं तय की गई है, या सात वर्ष से कम की सजा है.

संज्ञेय और गैर संज्ञेय अपराध
अभी तक एक्ट में प्रावधान है कि जिस अपराध के लिए तीन से सात वर्ष की जेल की सजा है, वह संज्ञेय (जिसमें वॉरंट के बिना गिरफ्तारी की अनुमति होती है) और गैर जमानती होगा. बिल इसमें संशोधन करता है और प्रावधान करता है कि ऐसे अपराध गैर संज्ञेय होंगे.
 
गोद लेने के प्रक्रिया में भी बदलाव
अभी तक एक्ट में शामिल है कि भारत और किसी दूसरे देश के संभावित दत्तक माता-पिता द्वारा बच्चे को स्वीकार करने के बाद एडॉप्शन एजेंसी सिविल अदालत में एडॉप्शन के आदेश प्राप्त करने के लिए आवेदन करते हैं. एक्ट के अनुसार, अगर विदेश में रहने वाला कोई व्यक्ति भारत में अपने किसी संबंधी से बच्चा एडॉप्ट करना चाहता है तो उसे अदालत से एडॉप्शन का आदेश हासिल करना होगा. बिल इसमें संशोधन करता है कि इसके स्थान पर जिला मेजिस्ट्रेट को एडॉप्शन के आदेश जारी करने का अधिकार देता है.
 
इसके साथ ही बिल में प्रावधान है कि जिला मेजिस्ट्रेट के एडॉप्शन के आदेश से पीड़ित व्यक्ति आदेश दिए जाने के 30 दिनों के भीतर डिविजनल कमीशनर के सामने अपील दायर कर सकता है. अपील दायर करने की तारीख से चार हफ्ते के अंदर उसे निपटाया जाना चाहिए.
 
एक्ट में प्रावधान है कि अगर बाल कल्याण कमिटी यह निष्कर्ष देती है कि कोई बच्चा, देखरेख और संरक्षण की जरूरत वाला बच्चा नहीं है, तो कमिटी के इस आदेश के खिलाफ कोई अपील नहीं की जा सकती है. बिल इस प्रावधान को हटाता है.    
 
यह भी है प्रावधान
एक्ट में प्रावधान है कि कानून के अंतर्गत बच्चों के खिलाफ अपराधों, जिनके लिए सात वर्ष से अधिक की जेल की सजा है, का मुकदमा बाल अदालत में चलाया जाएगा. अन्य अपराधों (सात वर्ष से कम की जेल की सजा वाले) के लिए ज्यूडीशियल मेजिस्ट्रेट की अदालत में मुकदमा चलाया जाएगा. बिल में प्रस्ताव है कि एक्ट के अंतर्गत सभी अपराधों के लिए बाल अदालत में मुकदमा चलाया जाएगा.

हर जिले में बनेंगे सीडब्ल्यूसी
एक्ट में प्रावधान है कि देखरेख एवं संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों के हित के लिए राज्य हर जिले में एक या एक से अधिक सीडब्ल्यूसी बनाएंगे. एक्ट सीडब्ल्यूसी के सदस्यों को नियुक्त करने के लिए कुछ मानदंड भी बनाता है, जैसे वह व्यक्ति कम से कम सात वर्षों तक बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा या कल्याण के कार्यों से जुड़ा रहा हो, या वह व्यक्ति बाल मनोविज्ञान, मनोरोग, कानून या सामाजिक कार्य की डिग्री वाला प्रैक्टिसिंग प्रोफेशनल हो.
 
यह भी है प्रावधान
बिल सीडब्ल्यूसी के सदस्यों की नियुक्ति के लिए अतिरिक्त मानदंडों को निर्दिष्ट करता है. इसमें प्रावधान है कि कोई व्यक्ति सीडब्ल्यूसी का सदस्य बनने का पात्र नहीं है, अगर उसका मानवाधिकार या बाल अधिकारों के उल्लंघन का कोई रिकॉर्ड हो, अगर उसे नैतिक अधमता (भ्रष्टता) से जुड़े अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो और उस आरोप को पलटा न गया हो, उसे केंद्र सरकार, या राज्य सरकार, या सरकार के स्वामित्व वाले किसी उपक्रम से हटाया या बर्खास्त नहीं गया हो, या वह जिले के बाल देखभाल संस्थान में प्रबंधन का एक हिस्सा हो.  

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