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क्या लालू की विरासत बिखेर रहे हैं तेजस्वी ?

लालू यादव के नेतृत्व में बिहार की सबसे मजबूत जनाधार वाली पार्टी राजद की स्थिति उनके सुपुत्र तेजस्वी से नहीं संभल पा रही, शायद यहीं कारण है कि संकट की इस घड़ी में राजद का साथ उसके पुराने नेता भी नहीं देना चाहते. कही इसका कारण तेजस्वी तो नहीं, आइए जानते हैं.

क्या लालू की विरासत बिखेर रहे हैं तेजस्वी ?

पटना: क्या तेजस्वी यादव राजद की विरासत को संभाल पाएंगे? क्या लालू यादव की गैर-मौजूदगी में तेजस्वी को महागठबंधन का मुखिया मान लिया जाएगा ? ये सवाल इसलिए जरूरी हैं क्योंकि एक समय में बिहार की सबसे बड़ी और जनाधार वाली पार्टी राजद का कोई आधार ही अब नहीं नजर आ रहा. तमाम पुराने नेताओं की नाराजगी झेल रहे फिलहाल राजद के सर्वेसर्वा के खिलाफ उनकी यह पार्टी में एक धड़ा खड़ा होने लग गया है. इसकी पुष्टि लालू यादव के करीबी रहे विधायक महेश्वर यादव के तीखे बयानों से की जा सकती है. विधायक महेश्वर यादव ने कहा कि राजद के कुछ नेताओं के अंदर बगावत के ज्वर उभरने लगे हैं. पार्टी में जल्द ही दरार पड़ सकती है. 

राजद के शीर्ष नेतृत्व पर नहीं है भरोसा 

उन्होंने ये भी कहा कि बिहार उपचुनाव के बाद राजद गुट के कई समाजवादी नेता पार्टी छोड़ नीतीश कुमार की अध्यक्षता में जदयू में शामिल हो सकते हैं. पार्टी में महेश्वर प्रसाद के इस बयान के बाद राजद के शीर्ष नेतृत्व की चिंता बढ़ सकती है. महेश्वर यादव ने इशारों-इशारों में तेजस्वी के राजद की कमान संभालने की क्षमता पर ही सवालिया निशान खड़े कर दिए. उन्होंने कहा कि राजद की स्थिति बिल्कुल खराब है. पार्टी में कम योग्य नेता पार्टी चला रहे हैं तो वही योग्य और अनुभवी नेता उपेक्षित हैं. हालांकि, ये सब कुछ अभी ही शुरू नहीं हुआ. इसकी उधेड़-बुन की कहानी तो लोकसभा के दौरान ही शुरू हो गई थी. लोकसभा चुनाव के दौरान राजद के पुराने नेता अली अरशद फातमी भी तेजस्वी के नाराज हो कर पार्टी छोड़ दिया और बाद में जदयू के बैनर तले आ गए. 

तेजस्वी के नेतृत्व में बैकफुट पर राजद 

इसके अलावा राजद के कद्दावर नेता रघुवंश प्रसाद सिंह भी तेजस्वी के नेतृत्व शैली पर प्रश्न-चिन्ह लगा चुके हैं. उन्होंने तेजस्वी को आगाह किया था कि राजद के कुछ पुराने नेता टूट सकते हैं. राजद के लोकसभा चुनाव में नीरस प्रदर्शन के बाद तो जैसे राजद बैकफुट पर आ गई है. जिसका असर बिहार उपचुनाव पर भी दिख रहा है. महागठबंधन में शामिल घटक दलों में चुनाव प्रचार और सीटों बंटवारे पर भी आपसी सहमति नहीं बन पाई है. एक विधानसभा सीट पर तो राजद और मुकेश साहनी की वीआईपी (विकासशील इंसान पार्टी) दोनों ही ने अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं. ऐसे में महागठबंधन कितनी मजबूत है, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा.

पारिवारिक कलह से हो रहा पार्टी का नुकसान

राजद में आंतरिक कलह सिर्फ नेताओं के अंदर ही नहीं है. इसकी जद् में लालू यादव का पूरा परिवार ही है. दरअसल, राजद नेताओं की एक चिंता ये भी है कि तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव में उत्तराधिकार को ले कर भी खींच-तान होती रहती है. तेजप्रताप यादव की पत्नी ऐश्वर्या राय के साथ खराब रिश्ते हर बार सुर्खियों में बने रहते हैं. हाल ही में तलाक तक पहुंची दोनों की पारिवारिक कलह के बाद राजद नेताओं को इसके साइड-इफेक्ट का अंदाजा होने लगा है. शायद यहीं कारण है कि लोकसभा में इस पारिवारिक कलह के विपरीत परिणाम देखने के बाद अब और राजनीतिक नुकसान नहीं सहना चाहते और पार्टी से किनारा करने का मन बना लिया है. खैर, आगामी विधानसभा चुनाव में राजद की डूबती नैय्या को किसका सहारा मिलता है, ये देखना दिलचस्प होगा.