रूस के Su-57 ने खोल दिया अपना 'सीक्रेट', जेट में यूं छिपाकर रखी मिसाइलें; IAF के लिए SEAD मिशन को देगा अंजाम!

Su-57 internal bays: रूस के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट Su-57 'फेलॉन' की कुछ नई तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें पहली बार इसके अंदरूनी हथियार खांचों को लोड होते हुए दिखाया गया है. इन खांचों का मतलब है कि मिसाइलें विमान के अंदर रखी जाती हैं, जिससे यह रडार पर अदृश्य यानी स्टील्थ बना रहता है.

Written by - Prashant Singh | Last Updated : Nov 12, 2025, 02:16 PM IST
  • हथियार अंदर रखने से रडार सिग्नेचर कम होता
  • IAF के लिए रणनीतिक मायने रखते हैं ये खुलासे
रूस के Su-57 ने खोल दिया अपना 'सीक्रेट', जेट में यूं छिपाकर रखी मिसाइलें; IAF के लिए SEAD मिशन को देगा अंजाम!

Su-57 internal bays: Su-57 को रूस का सबसे आधुनिक फाइटर जेट माना जाता है. स्टील्थ फाइटर जेट्स की सबसे बड़ी पहचान यही होती है कि वे अपने हथियारों को विमान के बाहरी हिस्से पर लगाने के बजाय अंदरूनी खांचों में रखते हैं. इससे विमान का रडार सिग्नेचर बहुत कम हो जाता है और दुश्मन के रडार को उसे पकड़ना लगभग असंभव हो जाता है. सामने आई तस्वीरों में Su-57 के मुख्य और साइड के छोटे हथियार खांचों को दिखाया गया है, जिनमें एयर-टू-एयर मिसाइल लोड की जा रही हैं.

IAF को SEAD मिशन को मिलेगी ताकत
दी वॉर जोन की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय वायुसेना लंबे समय से अपने SEAD यानी दुश्मन के एयर डिफेंस को दबाना मिशन के लिए एक ऐसे फाइटर जेट की तलाश में है जो दुश्मन के इलाके में घुसकर उनके रडार और मिसाइल साइट्स को खत्म कर सके. Su-57 की स्टील्थ क्षमता और अंदरूनी हथियार खांचों का डिजाइन इसे इस काम के लिए एकदम सही बनाता है. यह विमान भारतीय वायुसेना की हमलावर ताकत को कई गुना बढ़ा सकता है.

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स्टील्थ का सीक्रेट- इनसाइड वेपन बे
हथियारों को विमान के अंदर रखने की तकनीक ही Su-57 को इतना खतरनाक स्टील्थ फाइटर बनाती है. जब मिसाइलें पंखों के नीचे लटकाई जाती हैं, तो वे रडार पर बड़ा सिग्नल बनाती हैं. अंदरूनी खांचों में रखने से मिसाइलें छिप जाती हैं और विमान रडार की पकड़ से बाहर रहता है.

हथियार अंदर होने से हवा का बहाव कम खराब होता है, जिससे विमान ज्यादा तेज रफ्तार से उड़ सकता है. Su-57 में दो बड़े मुख्य खांचे बीच में हैं, और दो छोटे खांचे विंग्स के पास हैं. बड़े खांचों में मिसाइलें या बम रखे जाते हैं, जबकि छोटे खांचों में नजदीकी लड़ाई की मिसाइलें रखी जाती हैं.

IAF के SEAD मिशन के लिए क्यों खास?
SEAD मिशन में विमान को दुश्मन के एयर डिफेंस के सबसे खतरनाक इलाके में घुसना होता है. Su-57 इसमें सबसे बेहतर हो सकता है. इसकी एडवांस स्टील्थ इसे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम के अंदर तक घुसने और उनके रडार पर हमला करने की जबरदस्त क्षमता देती है. Su-57 में लगे सेंसर इसे दुश्मन के रडार से निकलने वाले सिग्नल को पहचानकर उन पर एंटी-रेडिएशन मिसाइल से हमला करने में मदद करते हैं.

भारत ने पहले रूस के साथ मिलकर FGFA यानी फिफ्थ जनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट पर काम किया था, जो Su-57 पर आधारित था. इससे भारत को इस जेट की टेक्नोलॉजी को समझने में फायदा हो सकता है. अगर भारतीय वायुसेना Su-57 को खरीदने का फैसला करती है, तो यह विमान भारत की हवाई श्रेष्ठता को बढ़ाएगा और सीमाओं पर सुरक्षा की रणनीति को पूरी तरह से बदल देगा.

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