कश्मीर में आतंकियों के पास मिले सैटेलाइट फोन, सुरक्षा एजेंसियां चौकन्ना

गांदरबल के जंगलों में हुई मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए थे, उनके पास एक थुराया सैटेलाइट फोन की बरामदगी हुई थी. इसके अलावा श्रीनगर के बाहरी इलाके सौरा के अंचर में एक सैटेलाइट फोन की लोकेशन डिटेक्ट की गई थी.आतंकवादी 90 के दशक की तरह एक बार फिर सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल करने लगे हैं.

कश्मीर में आतंकियों के पास मिले सैटेलाइट फोन, सुरक्षा एजेंसियां चौकन्ना

श्रीनगरः घाटी में सेना व सुरक्षा बलों ने आतंकियों की एक साजिश से पर्दा उठाया है. सामने आया है कि आतंकी संचार के लिए सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे सुरक्षा के लिहाज से बड़ा संकट माना जा रहा है. आतंकी इसके जरिए सरहद पार बैठे हैंडलरों से आतंकी गतिविधियों के लिए निर्देश लेते हैं. अगस्त में घाटी में 370 में बदलाव के कारण पाबंदियां लगाई गई थीं, इनमें इंटरनेट बंदी भी शामिल थी. सूबे से विवादित अनुच्छेद 370 व 35ए को हटाए जाने व इसके पुनर्गठन के बाद से पाकिस्तान लगातार बौखलाया हुआ है. उसके दम पर पल रहे आतंकी रोज कोई साजिश कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षाबलों की कड़ी चौकसी के कारण आतंकी अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं. 

मुठभेड़ के बाद सामने आई हकीकत 
गांदरबल के जंगलों में हुई मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए थे, उनके पास एक थुराया सैटेलाइट फोन की बरामदगी हुई थी. इसके अलावा श्रीनगर के बाहरी इलाके सौरा के अंचर में एक सैटेलाइट फोन की लोकेशन डिटेक्ट की गई थी.

इसके बाद वहां तलाशी अभियान चलाया गया. माना जा रहा है कि आतंकवादी इसे अपनी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करते हैं लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती पैदा हुई जब पता चला कि आतंकवादी 90 के दशक की तरह एक बार फिर सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल करने लगे हैं. कहा जा रहा है कि घाटी में तकरीबन 250 आतंकी छिपे हैं, लेकिन आकाओं से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं. 

सतर्क हैं सुरक्षा एजेंसियां
लगभग 20 साल बाद जम्मू कश्मीर में आतंकियों की तरफ से सैटेलाइट फोन के इस्तेमाल में तेजी एक बड़ा संकेत दे रही है. इससे यह तो साफ है कि इंटरनेट के इस्तेमाल पर पाबंदी की वजह से आतंकियों के लिए अपनी साजिश को अंजाम देना बेहद मुश्किल हो गया है.

इसलिए वह सूचना के लिए फिर से पुराने तरीके को इस्तेमाल कर रहे हैं. यह एक बड़ा खतरा है. दरअसल, सैटेलाइट फोन कहीं भी किसी भी हालात में काम कर सकता है. इसके लिए टावर की कोई जरूरत नहीं होती. यह फोन सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए संचालित होते हैं. इसलिए सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं. 

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मुंबई हमले में प्रयोग हुआ था सैटेलाइट फोन
सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल मुंबई हमले के दौरान भी हुआ था. इस दौरान आतंकवादियों ने जिस तरीके से कत्लेआम किया था उसके लिए उन्हें सैटेलाइट फोन के जरिए सीधे पाकिस्तानी आकाओं से आदेश मिल रहे थे. कई बार पहले भी समंदर के रास्ते देश में घुसपैठ करने वाले आतंकियों के पास से सैटेलाइट फोन बरामद किए जा चुके हैं. रक्षा विशेषज्ञ, प्रफुल्ल बख्शी का कहना है कि अब जो प्रशासन में बदलाव आ गया है..उससे स्थानीय प्रशासन की ताकत खत्म हो गई है. सीधे केंद्र के हाथ में प्रशासन आ चुका है.

इससे बड़ा असर हुआ है. सुरक्षाबलों और पुलिस में बेहतर सहयोग है. इसकी ही जरूरत थी. हम हैरान थे कि यह पहले क्यों नहीं हुआ. यह चीज पहले होनी चाहिए थी, खैर. देर आए ..दुरुस्त आए. कर दिया है..तो अच्छा है. उन्होंने इंटरनेट की पाबंदी को स्थिति के आधार पर जरूरी बताया है.

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भर्ती की रिपोर्ट भी आई सामने
सूत्रों के अनुसार सामने आया है कि आतंकी संगठन लश्‍कर-ए-तैयबा से जुड़ा आतंकी अबु इस्‍लाम घाटी में हमले के लिए नए ठिकाने की तलाश में है. पिछले कुछ दिनों में घाटी में बड़ी संख्‍या में आतंकियों की भर्ती की रिपोर्ट भी सामने आई है, इसने भी एजेंसियों की चिंताएं बढ़ाई हैं.

कुछ दिन पहले ही हिज्बुल मुजाहिदीन ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के एक अधिकारी के भाई की एक तस्वीर जारी करते हुए दावा किया था वह इस आतंकी संगठन में शामिल हो गया है. फोटो में आईपीएस का भाई शमसुल हक मेंगनू तस्वीर में एके-47 राइफल लिए दिखता है. मेंगनू यूनानी चिकित्सा की पढ़ाई कर रहा था.

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