देखिए, लॉकडाउन में कैसे मनी रामनवमी, बिल्कुल बाहर नहीं निकले लोग, घरों में ही किया पूजन

साल भर का त्योहार, नौ दिन का व्रत, मंदिर में देव दर्शन और कन्या खिलाने का संकल्प, इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ. लोगों ने घर में ही नवमी पूजा की और सोशल डिस्टेंसिंग को अपनाते हुए राष्ट्रहित के धर्म को सबसे ऊपर माना. मंदिरों में पुजारियों ने पूजा की. सनातनी संस्कार देश हित को सबसे ऊंचा बताते हैं, श्रद्धालुओं ने गुरुवार को इसे साबित किया. 

देखिए, लॉकडाउन में कैसे मनी रामनवमी, बिल्कुल बाहर नहीं निकले लोग, घरों में ही किया पूजन

नई दिल्लीः रामनवमी का उत्सव और चैत्रनवरात्रि की नवमी तिथि की पूजा गुरुवार को की गई. हालांकि यह दोनों ही व्रत और उत्सव इस बार कहीं भी धूम-धाम से नहीं हुए. श्रद्धालु नवमी के दिन घरों में कन्या पूजन और भोज कराते हैं जो कि इस बार नहीं हो सका. लोगों ने सिर्फ व्रत और पूजन ही किया. वहीं मंदिरों के भी पट बंद हैं, ऐसे में देव दर्शन भी नहीं हुए. अयोध्या से लेकर प्रयाग और सुदूर दक्षिण तक के मंदिरों में केवल महंत व पुजारियों ने ही राम जन्म उत्सव मनाया और पूजन किया. 

दोपहर को हुआ था श्रीराम का जन्म
रामचरित मानस के अनुसार श्रीराम जन्म नवमी तिथि को दोपहर में हुआ था. हालांकि नवमी तिथि होने से व्रत और पूजन दिन भर हुआ, लेकिन मंदिरों में विशेष मुहूर्त में जन्म पूजा की गई. इस दौरान शंख-घंटे घड़ियाल बज उठे. श्रीराम जन्म के विषय में तुलसी लिखते हैं 
नवमी तिथि मधुमास पुनीता, सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता,
मध्य दिवस अति सीत न घामा, पावन काल लोक बिश्रामा.

मथुरा में भगवान ने दिए ऑनलाइन दर्शन
रामनवमी पर भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में लॉकडाउन के कारण प्रमुख मंदिरों के पट बंद हैं. ऐसे में भक्तों ने भगवान के दर्शन ऑनलाइन किए. कुछ मंदिरों ने रामनवमी पूजन का लाइव प्रसारण किया. इसके बाद लोगों ने घरों में विधि-विधान के साथ भगवान की आराधना की.

शहर के भगवान श्री दीर्घ विष्णु मंदिर में सेवायतों ने भगवान का महापंचामृत अभिषेक बृहस्पतिवार प्रात: 8 बजे किया. इसका सीधा प्रसारण फेसबुक एवं यू-ट्यूब पर किया गया. मंदिर के सेवायत महंत कांतानाथ चतुर्वेदी ने बताया कि कोरोना को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने भक्तों से घर पर ही रहने की अपील की है. 

अयोध्याः कोरोना न होता तो होना था भव्य आयोजन
मंदिर मामले में फैसला आने के बाद यहां पहला श्रीराम जन्म उत्सव होना था, लेकिन कोरोना के कारण सन्नाटा रहा. रामनवमी मेले में यह पहली बार है जब सरयू घाट से लेकर मठ-मंदिरों में शांति है.  संत-धर्माचार्य कहते हैं कि कोरोना से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है.

इसलिए गुरुवार को राम जन्मोत्सव का पर्व सीमित अनुष्ठानों के बीच मठ-मंदिरों में ही मनाया गया. इसके पहले प्रदेश सरकार ने भी लोगों से रामनवमी पर्व घर पर ही मनाने की अपील की थी. लोगों ने भी घरों में ही पूजा-अर्चना की. ऐसा कोई आयोजन नहीं हुआ, जिसमें भीड़ लगे. 

वाराणसीः राम के आराध्य की नगरी भी सूनी
इस बार काशी में भी कोई आयोजन नहीं हो सका. हालांकि मंदिरों महंत-पुजारियों ने विधिवत पूजा की, जिसमें परिसर में रहने वाले लोग ही शामिल रहे. गंगा की लहरों पर निकलने वाली रामकथा मंदाकिनी शोभायात्रा भी लॉकडाउन के कारण स्थगित कर दी गई है.

पंचकोशी, अंतरगृही, द्वादश ज्योतिर्लिगिं, नौ दुर्गा, नौ गौरी की परिक्रमा यात्रा वाले शहर में गंगा की लहरों पर रामनवमी के दिन रामकथा मंदाकिनी शोभायात्रा का आयोजन होता है. भक्तों ने भी घर में ही माता का पूजन किया. हालांकि इस बार कन्या भोज न हो पाने से लोग अनुष्ठान पूरा न हो पाने की दुविधा में रहे.

दरअसल, नौ दिन का व्रत रखते हुए नवें दिन कन्या भोज का संकल्प लिया जाता है. कोरोना वायरस की वजह से कोई भी घर से बाहर नहीं जा पा रहा है.

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गोरखनाथः मंदिर की कन्याओं का किया पूजन
कोरोना वायरस के कारण गोरखनाथ मंदिर में भी अबकी बार विधिवत देवी पूजन का आयोजन नहीं हो सका है. अबकी बार कन्याओं को मंदिर में एकत्रित नहीं किया गया. मंदिर के सचिव द्वारका तिवारी ने बताया कि सब कुछ पहले जैसा ही हुआ है फर्क सिर्फ इतना है कि मंदिर में जहां सैकड़ों की संख्या में कन्याएं आती थीं, वह नहीं हुआ है.

भीड़ से बचने के लिए सिर्फ मंदिर परिसर में ही रहने वाले  कर्मचारियों की पुत्रियों का कन्या पूजन किया गया. राम जन्म उत्सव भी केवल पूजन तक ही सीमित रहा. 

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तिरुमला मंदिर में भी हुआ पूजन
आंध्र प्रदेश के तिरुमला में भगवान बालाजी मंदिर में श्री राम नवमी उत्सव मनाया गया. यहां देव प्रतिमाओं का पुष्प श्रृंगार किया गया. इसके बाद उचित तय मुहूर्त में पूजा की गई. मंदिर में केवल महंत व पुजारी ही शामिल रहे. इस दौरान कोई बाहरी श्रद्धालु शामिल नहीं हुआ.

यहां भी लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग को फॉलो करते हुए पूजन व उत्सव मनाया गया.