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क्या कभी कांग्रेस से खत्म हो पाएगी चापलूसी की परंपरा?

महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट बंटवारे से नाराज हैं. उन्होंने कांग्रेस पार्टी में चापलूसी की परंपरा का सवाल फिर से उठाया है. लेकिन प्रश्न यह है कि क्या कभी कांग्रेस पार्टी चापलूस नेताओं से निजात पा सकेगी? क्योंकि यह तो कांग्रेसियों के डीएनए में शामिल है, जो कि अब पार्टी की पहचान बन चुका है. इस बात से सभी वाकिफ हैं कि बिना चापलूसी के कांग्रेस पार्टी में कोई भी आगे नहीं बढ़ सकता.  

क्या कभी कांग्रेस से खत्म हो पाएगी चापलूसी की परंपरा?
कांग्रेस में चापलूसी की परंपरा से परेशान निरुपम

नई दिल्ली: महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम से सुर बगावती होते जा रहे हैं. उन्होंने साफ कह दिया है कि हरियाणा और महाराष्ट्र में कांग्रेस की पराजय सुनिश्चित है. इसलिए वह कांग्रेस का प्रचार नहीं करेंगे. ज़ी न्यूज से चर्चा करते हुए निरूपम ने कहा कि ''कांग्रेस के बड़े चार-पांच नेता (उन्हें सब जानते हैं) सिंधिया, खडगे और हुड्डा का नाम ले रहा हूं और दो-तीन दूसरों का नाम बाद में बताऊंगा. ये लोग ही पार्टी का बंटाधार कर रहे हैं और राहुल गांधी के करीबी नेताओं के खिलाफ साजिश रचते हैं. ये पार्टी में चापलूस हैं. ऐसे नेताओं को हटाये बिना पार्टी का बेड़ा पार नहीं होगा.
लेकिन क्या संजय निरुपम के आवाज उठाने से कांग्रेस में चापलूसी की परंपरा समाप्त हो पाएगी? क्योंकि कांग्रेस पार्टी का पूरा आधार ही चापलूसी पर टिका हुआ है. आईए आपको दिखाते हैं कांग्रेस की चापलूसी परंपरा के कुछ क्लासिक उदाहरण-

सोनिया पूरे देश की मां हैं
बात साल दिसंबर 2013 की है. जब यूपीए-2 सरकार का आखिरी समय चल रहा था. उस समय साल 2014 में चुनाव के बाद कांग्रेस की तरफ से पीएम पद के दावेदार का प्रश्न उठा था. तब उस समय के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने चाटुकारिता से लबरेज बयान दिया था कि 'सोनिया गांधी बस राहुल गांधी की मां नहीं हैं, वो हमारी भी मां हैं. सोनिया गांधी पूरे देश की मां हैं.'

सोनिया-राहुल के आदेश पर झाडू़ लगाने के लिए तैयार
जून 2013 में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष चरणदास महंत ने आधिकारिक रुप से जारी अपने बयान में कहा था कि "मैं वही करता हूं जैसा पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी और राहुल आदेश देते हैं. अगर सोनिया गांधी आदेश दें तो मैं छ्त्तीसगढ़ के कांग्रेस कार्यालय में झाड़ू लगाने को भी तैयार हूं. उनका आदेश मेरे लिए सर्वोच्च है."

राहुल गांधी का ... पीने के लिए तैयार कांग्रेसी
चापलूसी में कांग्रेसी नेता इतना आगे निकल जाते हैं कि उसका उल्लेख करना भी शर्मनाक लगता है. अक्टूबर 2018 में एक कांग्रेसी नेता राजा खान ने बकायदा ट्विट करके लिखा कि वह अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष का ..... पान करना गौरव की बात समझते हैं. आपको अगर यकीन नहीं हो तो इस चापलूस द ग्रेट नेता का ट्विट सामने है.

दरअसल यह छुटभैया कांग्रेसी नेता गृह मंत्रालय के पूर्व अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि के उस आरोप पर प्रतिक्रिया दे रहा था. जिसमें मणि ने आरोप लगाया था कि उनसे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कमलनाथ ने एक बार कहा था कि ‘बाहर लोग राहुल गांधी का .... पीने के लिए तैयार हैं और आप इतना भी काम नहीं कर सकते’

इंदिरा के घर में झाड़ू लगाने के लिए तैयार

बात सिर्फ सोनिया-राहुल तक ही सीमित नहीं है. दशकों से कांग्रेस नेता चापलूसी की परंपरा में ही जीते आ रहे हैं. कांग्रेस की सियासत में चापलूसी के बिना आगे बढ़ना संभव ही नहीं है. आज से 38 साल पहले इंदिरा गांधी ने जब ज्ञानी जैल सिंह को 1982 में राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया तो उन्होंने कहा था कि “मैं इंदिरा गांधी के लिए कुछ भी कर सकता हूं. अगर इंदिरा गांधी कहें तो मैं उनके घर में झाड़ू लगाने को भी तैयार हूं.”

इंदिरा इज इंडिया
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष देवकांत बरुआ ने अपने प्रसिद्ध बयान में कहा था कि “इंदिरा भारत हैं, भारत इंदिरा है.” इसे इंदिरा गांधी की चापलूसी की इंतेहा के तौर पर देखा जाता है. देवकांत बरुआ देश में 1975 से 1977 के दौरान लगे आपातकाल के दौरान कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए थे.

इन सभी उदाहरणों से यह स्पष्ट है कि चापलूसी की परंपरा कांग्रेस पार्टी के खून में शामिल है. संजय निरुपम जैसे नेता इसके खिलाफ चाहे जितनी भी आवाज उठाएं, होने वाला कुछ भी नहीं है.

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