शाह ने कांग्रेस-एनसीपी को दी चुनौती. शिवसेना को भी दिखाया आईना

 कुल मिलाकर महाराष्ट्र के राजनीतिक रण का युद्ध पूरा हो चुका है. अब यहां बाकी रह गई हैं तो केवल बातें. अभी सबसे बड़ा सवाल यह चल रहा है कि भाजपा ने अजित पवार पर भरोसा क्यों किया. अमित शाह ने इस सवाल का जवाब दिया है. उन्होंने कहा है कि उनके पास ही सरकार बनाने का अधिकार था. 

शाह ने कांग्रेस-एनसीपी को दी चुनौती. शिवसेना को भी दिखाया आईना

नई दिल्लीः महाराष्ट्र में महीने भर के लंबे नाटक के बाद आखिरकार सरकार बन गई है. आज शाम इस नई सरकार का शपथ ग्रहण हो जाएगा और इसी के साथ उद्धव ठाकरे सीएम कहलाएंगे. कुल मिलाकर महाराष्ट्र के राजनीतिक रण का युद्ध पूरा हो चुका है. अब यहां बाकी रह गई हैं तो केवल बातें. यह बातें आरोपों से भरी हैं और इन्हें कड़वा है, लेकिन सच है जैसा बताया जा रहा है. कई सवाल-कई जवाब और कई राज-रहस्य वाली बातें भी इनमें शामिल हैं. कुल मिलाकर जितने मुंह उतनी बातें अभी चल रही हैं. लेकिन भाजपा के अंदर कई सवाल उठते देख केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपना मुंह खोला है, और खोला है तो जमकर बोला है.

सीधा सवाल, अजित पर भरोसा क्यों, जवाब गड्ड-मड्ड
महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस का गठबंधन उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में सरकार बनाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन इन सबके बीच सियासी हवा में यह सवाल अभी भी बाकी है कि आखिर भाजपा ने अजित पवार पर दांव क्यों लगाया था. भाजपा के भीतर से भी इस पर सवाल उठ रहे हैं.

पार्टी के वरिष्ठ नेता एकनाथ खडसे ने पार्टी की रणनीति पर सवाल उठाए हैं. अजित पवार का समर्थन लेने पर बीजेपी के नेता घुमा-फिराकर जवाब दे रहे हैं. इस बीच, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि विधायक दल का नेता होने के कारण पार्टी ने उन पर भरोसा किया था, हालांकि फडणवीस 'सही समय' पर जवाब देने की बात कहते हुए चुप्पी साध गए.

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मुख्यमंत्री बनाने का लालच देना भी खरीद-फरोख्त:शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर एनसीपी प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी चुनौती दी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद का लालच देकर समर्थन लेना खरीद-फरोख्त नहीं है क्या? उन्होंने कहा, 'मैं शरद जी और सोनिया जी को कहता हूं कि एक बार बोलकर देखें कि मुख्यमंत्री उनका होगा और फिर शिवसेना का समर्थन लें. लगभग 100 सीटों वाला गठबंधन 56 सीट वाली पार्टी को मुख्यमंत्री पद दे रहा है, ये खरीद-फरोख्त ही है.

गृह मंत्री अमित शाह ने एक अन्य ट्वीट कर कहा कि शिवसेना के सभी विधायक हमारे साथ लड़कर ही चुनाव जीते हैं. उनका एक भी विधायक ऐसा नहीं है, जिसने मोदी जी का पोस्टर ना लगाया हो. उनकी विधानसभाओं में बीजेपी की विधानसभाओं से भी बड़े कटआउट्स मोदी जी के लगे थे. क्या ये सब देश और महाराष्ट्र की जनता नहीं जानती है?

अजित पर भरोसे का शाह ने दिया जवाब
अमित शाह ने बुधवार को एक न्यूज चैनल से बाचतीत में अजित पवार से समर्थन लेने के सवाल का भी जवाब दिया. उन्होंने कहा, अजित पवार को एनसीपी विधायक दल का नेता चुना गया था. उन्हें सरकार बनाने का अधिकार दिया गया था. राज्यपाल ने भी सरकार बनाने के लिए उनसे ही बात की थी. एनसीपी ने जब पहली बार सरकार बनाने में असमर्थता जताई तो उस पत्र पर भी अजित पवार के ही हस्ताक्षर थे. अब हमारे पास जो समर्थन पत्र आया, उस पर भी अजित पवार के ही हस्ताक्षर थे. शाह ने बताया, उनके समर्थन के बाद ही हमने सरकार बनाने की पहल की. उसके बाद उन्होंने समर्थन न होने की बात कहकर इस्तीफा दे दिया. इस कारण बीजेपी के पास भी बहुमत नहीं रहा. इस दौरान अजित पवार से जुड़े केस वापस लिए जाने के सवाल पर शाह ने कहा कि उनसे जुड़ा कोई केस वापस नहीं लिया गया है.

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सीएम पद पर कभी कोई बात ही नहीं हुई
इस दौरान अमित शाह ने बताया, 'हम चुनाव में गए. हमारा शिवसेना का गठबंधन हुआ. दोनों पार्टियों को एक-दूसरे के वोट मिले. हमारे गठबंधन को बहुमत मिला. यह जनादेश सिटिंग सीएम देवेंद्र जी को मिला. कई रैलियों में हमने कहा था कि सीएम देवेंद्र जी होंगे. किसी ने कोई विरोध नहीं किया. मैं साफ करना चाहता हूं कि पहले ढाई साल छोड़ दें, सीएम पद को लेकर भी कोई आश्वासन नहीं दिया गया था. हर रैली में हमने देवेंद्र फडणवीस को सीएम कहा है.

इनमें कई रैलियों में शिवसेना नेता मंच पर मौजूद थे, लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा. शिवसेना का कोई भी एमएलए ऐसा नहीं है, जिसने नरेंद्र मोदी जी का पोस्टर लगाकर वोट नहीं मांगे हैं. आदित्य ठाकरे ने भी लगाए थे.

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