शाहीन बाग में प्रदर्शन के लिए महिलाओं को मिलता है 500-500 रूपये, लगती है शिफ्ट

पिछले एक महीने से दिल्ली के शाहीन बाग में हो रहे प्रदर्शन को लेकर भाजपा ने बड़ा दावा करते हुए एक वीडियो जारी किया है. इस वीडियो के मुताबिक यहां प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को रोजाना 500-500 रूपये मिलता है. साथ ही इनकी शिफ्ट भी लगाई जाती है.

शाहीन बाग में प्रदर्शन के लिए महिलाओं को मिलता है 500-500 रूपये, लगती है शिफ्ट

नई दिल्ली: शाहीन बाग इलाके में पिछले 33 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन को लेकर BJP ने एक सनसनीखेज दावा किया है. भाजपा नेता संबित पात्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है. साथ ही दावा किया है कि शाहीन बाग में प्रदर्शन कर रही महिलाएं. 500 रूपये दिन के भाड़े पर प्रदर्शन कर रही हैं.

वीडियो के जरिए सामने आया सच!

आपको एक वीडियो दिखाते हैं जो महज कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल चुका है. इस वीडियो को भाजपा नेता और प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए दावा किया है कि दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में जारी नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ लोगों का विरोध प्रदर्शन ना सिर्फ सोची समझी साजिश है. बल्कि प्रदर्शन में आ रही भीड़ भी किराये की भीड़ है.

संबित पात्रा ने ट्वीट करके जो वीडियो शेयर किया है उसके साथ उन्होंने कैप्शन में ये भी लिखा है कि 'कश्मीर में 500₹ में पत्थरबाज़ी कराते थे शहीन बाग में 500₹ में बगावत कारते है. ये कौन है जो चंद रुपयों के लिए बेबस हिंदुओं, सिखों, जैनियों, बौध और ईसाइयों के पीड़ा को नजरअन्दाज कर केवल अपने जेबों की चिंता करते है?'

प्रदर्शन के लिये मिलता है 500-500 रूपये

उपर दिए वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे इस  जिसे लेकर BJP ने दावा किया है कि शाहीन बाग में सिर्फ 500-500 रूपये भाड़े पर प्रदर्शन के लिये पहुंच रही है. इस वीडियो में लड़का कहता सुनाई दे रहा है कि '500-700 रूपये बंट रहे हैं उनके, और इनकी शिफ्ट चेंज होती है.' 

दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में हो रहे प्रदर्शन की वजह से एक तरफ 10 लाख से ज्यादा लोग पिछले 33 दिनों से लगभग हर दिन ट्रैफिक जाम से जूझने को मजबूर हैं. जबकि, शाहीन बाग में दिल्ली को बेबस करने वाले प्रदर्शनकारी आराम फरमा रहे हैं. कोई क्रिकेट खेलने में, कोई गिल्ली डंडा खेलने में, तो कोई बिरयानी खाने में जुटा हुआ है. 

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ऐसे में शाहीन बाग में जारी विरोध प्रदर्शन के अस्तित्व पर सवाल उठाया ये वीडियो सिस्टम पर कई सवाल खड़े करता है. वो भी तब जब दिल्ली हाईकोर्ट स्वयं इस बंद रास्ते को खोलने का फैसला दिल्ली पुलिस पर छोड़ चुका है.

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