शरद पवार के इस दावे से राजनीति में मच गई खलबली! कितनी सच्चाई?

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने एक बड़ा दावा किया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें साथ में मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया था. लेकिन उन्होंने पीएम के इस ऑफर को रिजेक्ट कर दिया. अब ये दावा कितना सच्चा है, ये समझ पाना बेहद ही मुश्किल होगा.

शरद पवार के इस दावे से राजनीति में मच गई खलबली! कितनी सच्चाई?

नई दिल्ली: महाराष्ट्र की सियासत में एक छोर की खींचतान कम नहीं हो रही है कि दूसरी धड़े पर भी भारी उठापटक का दौर शुरू हो गया. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार ने ये दावा किया है कि पीएम मोदी ने उन्हें एकसाथ मिलकर काम करने का ऑफर दिया था. 

एनसीपी प्रमुख का बहुत बड़ा दावा

शरद पवार के मुताबिक जब पीएम मोदी ने इस ऑफर को उनके सामने रखा तो पवार ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि दोनों के निजी संबंध हमेशा अच्छे रहेंगे. हालांकि इन सबके बीच एनसीपी प्रमुख ने ऐसी हवा को गलत बताया कि मोदी सरकार ने उन्हें देश का राष्ट्रपति बनाने का कोई भी प्रस्ताव दिया. इसके अलावा उन्होंने इस बात का खुलासा किया कि मोदी नेतृत्व वाली कैबिनेट में सुप्रिया सुले को मंत्री बनाने का एक प्रस्ताव जरूर मिला था.

भतीजे पर क्या बोले शरद चाचा?

NCP अध्यक्ष शरद पवार ने उद्धव सरकार में अजित पवार को शपथ नहीं दिलाए जाने के कदम को एक 'सोचा-समझा फैसला' बताया है. उन्होंने कहा कि अजित ने अचानक से भाजपा का साथ देकर देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाकर खुद डिप्टी सीएम बन गए थे. हालांकि, उन्होंने इसके बाद इस्तीफा दे दिया तो, फडणवीस को सीएम की कुर्सी छो़ड़नी पड़ी. चाचा पवार ने बताया कि उन्होंने शिवसेना प्रमुख को इस बात का भरोसा दिलाया था कि वो अपने भतीजे अजित के बगावत को कुचल देंगे और ऐसा ही हुई. एनसीपी प्रमुख ने अपने भतीजे के इस कदम को गलत करार दिया.

पीएम मोदी ने की थी पवार की तारीफ

शरद पवार की पीएम मोदी ने संसद में जमकर तारीफ की थी. 18 नवंबर को पीएम मोदी ने राज्यसभा में एनसीपी की प्रशंसा में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. ये तारीफ संसदीय नियमों के पालन के लिए थी. लेकिन अटकलें तेज हो गईं, इसके सियासी मतलब निकाले जाने लगे.

इस तारीफ के दो दिन बाद यानी 20 नवंबर को शरद पवार ने पीएम मोदी से खास मुलाकात की. पवार ने कहा कि ये मुलाकात किसानों के मुद्दे पर थी. लेकिन महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक अस्थिरता के माहौल में इस मीटिंग के कई मतलब निकाले गए.

उस वक्त क्यों नहीं बोले पवार?

पवार का दावा कितना सच्चा है या कितना झूठा? इसका फैसला करना तो फिलहाल के वक्त में काफी मुश्किलें है, लेकिन यहां एक सवाल जरूर उठता है कि अगर उस वक्त पीएम मोदी ने शरद पवार को कुछ ऐसा ऑफर दिया था, तो उस वक्त जब दोनों बड़े नेताओं की मुलाकात सुर्खियों में थी, तब उन्होंने इस मामले पर चुप्पी क्यों नहीं तोड़ी थी.

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शरद पवार के इस दावे के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल का तेज होना लाजमी है. लेकिन हर किसी के जेहन में इस वक्त सिर्फ एक ही सवाल चल रहा है कि महाराष्ट्र में शुरू हुए महाड्रामे पर फुलस्टॉप आखिरकार कब लगेगा

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