सरकार में आते ही चढ़ गए शिवसेना के तेवर, भाजपा को दे दिया ये आदेश

सत्ता के सिंहासन पर काबिज होकर उद्धव ठाकरे ने इतिहास के पन्नों पर अपना नाम दर्ज करा लिया है. ठाकरे खानदान का पहला सदस्य सत्ता की बागडोर संभाल रहा है. अपने मुखपत्र सामना के जरिए शिवसेना ने भाजपा को एक बड़ा आदेश दिया है.

सरकार में आते ही चढ़ गए शिवसेना के तेवर, भाजपा को दे दिया ये आदेश

नई दिल्ली: उद्धव ठाकरे के महाराष्ट्र का महाराज बनते ही शिवसेना की दशकों पुरानी मन की वो मुराद पूरी हो गई. जिसका सपना बाला साहब ठाकरे ने देखा था और पूरा उनके सुपुत्र उद्दव ठाकरे ने किया. शिवसेना के लिए ये वो उपलब्धि है जो अब तक ठाकरे परिवार को नसीब नहीं हुई थी. अब जब हुई है तो हर शिवसैनिक का मन अतिउत्साह से लबरेज है. यही उत्साह शिवसेना के मुखपत्र सामना में नजर आया.

सामना के संपादकीय का शीर्षक "देखते क्या हो? शामिल हो!" 

आदेश देने के अंदाज में ये शीर्षक देकखर सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि ये लाइन किसके लिए लिखी गई है. इसमें कोई 2 राय नहीं कि शिवसेना ने भाजपा को सरकार बनाकर दिखा दिया. शायद इसीलिए अब शिवसेना कह रही है कि अब देखते ही मत रहो. आओ महाराष्ट्र के उत्थान में उद्दव सरकार का सहयोग करो.

शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने सामना के संपादकीय में केंद्र की मोदी सरकार से आग्रह भी किया है और आंखे भी दिखाई हैं. सामना के संपादकीय की इन 5 पंक्तियों पर नजर डालें तो, 

1).
संजय राउत ने पीएम मोदी को उद्धव का बड़ा भाई बताते हुए लिखा है कि 'महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा-शिवसेना में अन-बन है लेकिन नरेंद्र मोदी और उद्धव ठाकरे का रिश्ता भाई-भाई का है. इसलिए महाराष्ट्र के छोटे भाई को प्रधानमंत्री के रूप में साथ देने की जिम्मेदारी श्री मोदी की है.'

2).
रिश्ते की दुहाई देने वाले संजय राउत ने अपनी अगली लाइन में प्रधानमंत्री को नसीहत भी देने की कोशिश की है. उन्होंने लिखा है कि 'प्रधानमंत्री पूरे देश के होते हैं, सिर्फ एक पार्टी के नहीं होते. इसे स्वीकार करें तो जो हमारे विचारों के नहीं हैं, उनके लिए सरकार अपने मन में राग-लोभ क्यों रखे? संघर्ष और लड़ाई हमारे जीवन का हिस्सा हैं.'

3). 
इसके अगली ही लाइन में संजय राउत केंद्र सरकार को आंखे भी दिखा रहे हैं. उन्होंने लिखा है कि 'दिल्ली देश की राजधानी भले ही है लेकिन महाराष्ट्र दिल्लीश्वरों का गुलाम नहीं और यह तेवर दिखानेवाले बालासाहेब ठाकरे के सुपुत्र आज महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद पर विराजमान हैं. इसलिए महाराष्ट्र का तेवर और सरकार का सीना तना रहेगा, ऐसा विश्वास करने में कोई दिक्कत नहीं है. छत्रपति शिवराय ने महाराष्ट्र को जो कुछ दिया, उसमें स्वाभिमान महत्वपूर्ण है.

4).
संजय राउत ने अपने संपादकीय में आगे केंद्र सरकार पर महाराष्ट्र का हक भी जताने में गुरेज नहीं किया है. उन्होंने लिखा है कि 'महाराष्ट्र दिल्ली को सबसे ज्यादा पैसा देता है. देश की अर्थव्यवस्था मुंबई के भरोसे चल रही है. देश को सबसे ज्यादा रोजगार मुंबई जैसा शहर देता है. देश की सीमा पर महाराष्ट्र के जवान शहीद हो रहे हैं. देश की सीमा की रक्षा तो महाराष्ट्र की परंपरा रही है. इसलिए अब महाराष्ट्र से अन्याय नहीं होगा और उसका सम्मान किया जाएगा, इसका ध्यान नए मुख्यमंत्री को रखना होगा. दिल्ली के दरबार में महाराष्ट्र चौथी-पांचवीं कतार में नहीं खड़ा रहेगा बल्कि आगे रहकर ही काम करेगा, परंपरा यही रही है. इसी परंपरा का भगवा ध्वज महाराष्ट्र के विधानसभा और मंत्रालय पर लहराया है.'

5).
संपादकीय की आखिरी पंक्तियों में संजय राउत ने अपने वो तेवर भी दिखाने की कोशिश की है जिसके लिए वो और उनकी पार्टी मशहूर है. उन्होंने लिखा है कि 'भगवा ध्वज से दुश्मनी मोल मत लो. दुश्मनी करोगे तो खुद का ही नुकसान करोगे. महाराष्ट्र में सुराज्य का उत्सव शुरू हो गया है. देखते क्या हो? शामिल हो!'

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