शिवसेना छोड़ चार सौ कार्यकर्ता हुए भाजपा में शामिल, कहा-ठगे गए हैं हम

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे ने अपने पुराने सहयोगी दल भाजपा से मुंह फेरा और पार्टी लाइन के विपरीत विचारधारा वाली कांग्रेस और एनसीपी से जा मिले. सरकार भी बन गई. महाविकास अघाड़ी की सरकार. लेकिन जब कार्यकरता ही नाराज होने लग जाएं तो सरकार किसके बलबूते अपना वर्चस्व दिखा पाएगी. महाराष्ट्र में तकरीबन 400 कार्यकर्ता शिवसेना से नाराज हो कर पार्टी छोड़ गए और भाजपा के पाले में नया ठिकाना खोज लिया. 

शिवसेना छोड़ चार सौ कार्यकर्ता हुए भाजपा में शामिल, कहा-ठगे गए हैं हम

मुबंई: महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस की सरकार बने चंद दिन ही हुए कि इसी बीच धीरे-धीरे पार्टी कार्यकर्रताओं का गुस्सा परवान चढ़ने लगा. बुधवार को शिवसेना के तकरीबन 400 कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़ भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली. नाराज पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि शिवसेना ने भ्रष्ट और विरोधी दलों से हाथ मिला लिया है. मुबंई के धारावी में सभी 400 शिवसेना कार्यकर्ता ने एक साथ एक भगवा पार्टी का दामन छोड़ा और दूसरी भगवा पार्टी के पाले में जा पहुंचे. 

कार्यकर्ताओं ने कहा पार्टी ने विचारधारा से किया समझौता

भाजपा में शामिल होने वाले कार्यकर्ता मुबंई के अलग-अलग जगहों से आते हैं. उनका कहना है कि पार्टी ने अपनी विचारधारा से समझौता किया है. शिवसेना को एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाने के लालच में नहीं आना चाहिए था. कार्यकर्ता कहते हैं कि महाविकास अघाड़ी की सरकार में शामिल होने के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता करने वाली शिवसेना को आगे के बारे में भी सोचना चाहिए था. 

हिंदू विरोधी पार्टियों से हाथ मिला कर शिवसेना ने की गलती

भाजपा में शामिल होने वाले कार्यकर्ताओं में से रमेश नडार कहते हैं कि सभी कार्यकर्ताओं ने भाजपा इसलिए ज्वाइन कर लिया है क्योंकि शिवसेना ने हिंदू विरोधी पार्टी के साथ हाथ मिला लिया है. इससे वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. कार्यकर्ताओं की नाराजगी का यह कारण है कि अब उन्हें उनके मुद्दे से भटकना होगा या समझौता करना होगा, जो उन्हें कतई मंजूर नहीं. 

भ्रष्ट सरकार में हिस्सेदारी नहीं पसंद

नडार ने कहा कि कई और भी कार्यकर्ता हैं जो बहुत दिनों तक शिवसेना के पाले में नहीं रहेंगे. जल्द ही नाराज शिवसैनिक भाजपाई हो सकते हैं. पिछले सात साल से एनसीपी और कांग्रेस के खिलाफ लड़ रहे हैं और अब उनसे ही दोस्ती कर लें. चुनाव के दौरान जब घर-घर जा कर वोट मांगते थे, उनके खिलाफ मांगते थे. अब वे ही हमारे साथ हो गए हैं तो लोगों को क्या मुंह दिखाएंगे. यह सरकार ईमानदार सरकार नहीं हो सकती जो भ्रष्टाचार में खुद ही संलिप्त हो. इसलिए कार्यकर्ता अब शिवसेना से अपनी राहें जुदा कर चुके हैं. 

शिवसेना ने पिछले दिनों कहा था कि शिवसैनिक अपना रास्ता नहीं बदलते लेकिन पिछले कुछ दिनों से प्रदेश की राजनीति पर नजर डालें तो लगता है कि पहले तो पार्टी आलाकमान ने ही विचारधारा से समझौता किया तो अब कार्यकर्ता भी कर रहे हैं. ऐसे में सरकार कितने दिनों चल पाएगी यह देखना दिलचस्प होगा.