अदालत के इस फैसले की अवमानना से नप गए रैनबैक्सी प्रोमोटर सिंह बंधु

रेलिगेयर फिनवेस्ट धोखाधड़ी मामले में रैनबैक्सी के पूर्व प्रोमोटर मालविंदर सिंह और शिविंदर सिंह को गिरफ्तार किया गया था. अब जापानी दवा कंपनी दाइची सांक्यो की ओर से दाखिल की गई अवमानना मामले में दोनों पूर्व प्रोमोटरों को अदालत ने दोषी करार दे दिया है.   

अदालत के इस फैसले की अवमानना से नप गए रैनबैक्सी प्रोमोटर सिंह बंधु

नई दिल्ली: भारत में धोखाधड़ी के केसों की लिस्ट लंबी होती चली जा रही है. इसी कड़ी में अब दुनिया की लीडिंग दवा कंपनियों में से एक रैनबैक्सी के पूर्व प्रोमोटर भी नप गए हैं. सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने दोनों प्रोमोटरों पर जापानी कंपनी द्वारा दायर किए गए अवमानना के मुकदमे में उन्हें दोषी करार दे दिया है. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि पूर्व प्रोमोटर मालविंदर सिंह और शिविंदर सिंह ने जानबूझ कर कोर्ट की अवमानना की है. फिलहाल दोनों को 18 नवंबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है. हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा है कि उनकी सजा कमा हो सकती है अगर वे कोर्ट की अवमानना करने के एवज में 1170-1170 करोड़ की राशि जमा कर सकें तो.

सिंह बंधुओं के अलावा नप गए हैं और कई नाम

असमंजस वाली बात यह है कि अदालत ने इतनी बड़ी राशि कोर्ट को सुपुर्द करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है. इस मामले में सिर्फ मालविंदर सिंह और शिविंदर सिंह ही नहीं उनके अलावा भी कई लोग नप गए हैं. रेलिगेयर इंटरप्राइज लिमिटेड के सुनील गोधवानी के अलावा इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड और इंडियाबुल्स वेंचर्स लिमिटेड के डायरेक्टर्स समीर गहलोत, गगन बांगा, सचिन चौधरी, दिव्येश भारत कुमार शाह, अश्विनी कुमार हुड्डा और पिनाक जयंत शाह का भी नाम मामले में दर्ज है और इन्हें भी कोर्ट के अवमानना मामले में दोषी पाया गया है. शिविंदर सिंह फोर्टिस के पूर्व प्रोमोटर भी हैं. रैनबैक्सी फार्मा कंपनी में मनी लांड्रिंग और धोखाधड़ी का मामला दवा कंपनियों के लिए खलबली मचा देने वाला था. 

क्या है पूरा मामला ?

यह पूरा मामला रेलिगेयर फिनवेस्ट कंपनी के फंड में धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है जिसमें तफ्तीश के बाद पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई थी. इसमें मालविंदर सिंह, शिविंदर सिंह, अनिल सक्सेना, सुनील गोधवानी के अलावा कवि अरोड़ा का नाम है. बताया जाता है कि यह मामला 2397 करोड़ के फ्रॉड से संबंधित है. आर्थिक आपराधिक शाखा ने इन सभी को गिरफ्तार किया गया है. रेलिगेयर कंपनी के प्रबंधन में शामिल इन सभी अभियु्कतों पर धारा 409 और धारा 420 के तहत मामले दर्ज किए गए थे. रेलिगेयर फिनवेस्ट की ओर से दिल्ली पुलिस के आर्थिक आपराधिक शाखा में पिछले ही साल दिसंबर में कंपनी के प्रबंधन में शामिल इन सभी पर आपराधिक मामलों की शिकायत की गई थी. इसके बाद सिंह बंधुओं के घर मनी लांड्रिंग के केस में छापेमारी की गई. इसके अलावा जापानी कंपनी दाईची सांक्यो ने भी इन सभी पर धोखाधड़ी के मामले दर्ज कराए थे. जिसकी सुनवाई होनी बाकी थी. 

तो इसलिए मिली सजा 

बाद के दिनों में कंपनी के प्रोमोटर मालविंदर सिंह और शिविंदर सिंह को फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड में अपने शेयर को बांटने या यूं कहें कि स्थानांन्तरण करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया था. इसकी अपील उसी जापानी दाईची सांक्यो कंपनी ने की थी. दरअसल, कंपनी ने सिंगापुर में रैनबैक्सी शाखा को लेकर सिंह बंधुओं से कुछ डील किया था जिसके लिए उन्हें जिम्मेदारी दी गई थी. कोर्ट ने कहा था कि वे बताएं कि किस तरह से सिंगापुर ट्रिब्यूनल की ओर से जारी 3500 करोड़ के इनवेस्टमेंट का प्लान बनाएंगे या करेंगे. जापानी कंपनी दाईची सांक्यो ने इस मामले को वहां उठाया था. लेकिन सिंह बंधुओं ने अदालत के उस फैसले के बाद भी कोई रिएक्शन नहीं दिया ना ही प्लान के अनुसार काम किया, जिसके बाद उनपर अदालत की अवमानना करने के लिए सजा सुनाई गई. 

रैनबैक्सी कंपनी का इतिहास और वर्तमान

रैनबैक्सी कंपनी को खड़ा करने के पीछे भी अन्य सिंह बंधुओं की मेहनत थी. 1937 में रनबीर सिंह और गुरूबक्श सिंह ने अपने नामों को मिलाकर इस कंपनी का नामकरण किया था. रैनबैक्सी में रन रनबीर के नाम से और बक्शी गुरूबक्श के नाम से लिया गया था. 1990 के अंतिम दिनों में रैनबैक्सी कंपनी ने यूएस कंपनी रैनबैक्सी फार्मास्यूटिकल के नाम से अमेरिका में शाखा बढ़ाया. जून 2008 में जापान की दाईची सांक्यो इस कंपनी में 34.8 फीसदी का शेयरहोल्डर बन चुका था. जापानी कंपनी ने सिंह परिवार के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर मालविंदर मोहन सिंह को कुल 10,000 हजार करोड़ की रकम अदा कर यह शेयर खरीद ली थी. देखा जाए तो कंपनी ने प्रति शेयर 737 रुपए चुकाए थे. नवंबर 2008 तक दाईची सांक्यो ने 4.6 बिलियन डॉलर चुका कर कंपनी को सिंह परिवार से पूरी तरह से अपने अधिकार में कर लेने का समझौता कर लिया. अब जापानी कंपनी के पास 63.92 फीसदी के शेयर थे. हालांकि, तब तक भी मालविंदर सिंह ही रैनबैक्सी कंपनी के सीईओ थे. 

भारतीय कंपनी सन फार्मास्यूटिकल की हो गई रैनबैक्सी

बाद के दिनों में दाईची सांक्यो ने अपने हिस्से के शेयर को भारतीय कंपनी सन फार्मास्यूटिकल को बेचने का फैसला लिया. इसके लिए सन फार्मास्यूटिकल ने दाईची सांक्यो को कुल 4 बिलियन डॉलर की रकम दी. इस डील में दाईची सांक्यो ने सन फार्मास्यूटिकल के शेयर में 9 फीसदी की हिस्सेदारी की शर्त रखी थी, जिसे भारतीय कंपनी ने मान लिया था. बाद के दिनों में कंपनी के दो कर्मचारियों ने व्हिसिलब्लोवर का काम किया और कंपनी पर ड्रग्स टेस्ट का मामला उठा कर नुकसान में डाल दिया. इसके बाद से ही कंपनी लगातार विवादों में घिरती नजर आ रही है.