सोरेन सरकार ने की पहली कैबिनेट बैठक, लिए गए खास फैसले

सीएम हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट मीटिंग में फैसला लिया गया कि राज्य की पांचवीं विधानसभा का प्रहला सत्र 6 जनवरी 2020 से आठ जनवरी 2020 तक चलेगा. विधानसभा के सदस्यों को शपथ दिलाने के लिए जेएमएम विधायक स्टीफन मरांडी कार्यवाहक अध्यक्ष बनाए जाएंगे.

सोरेन सरकार ने की पहली कैबिनेट बैठक, लिए गए खास फैसले

रांचीः झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) नेता हेमंत सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री बन गए हैं. सीएम बनते ही हेमंत सोरेन ने पहली कैबिनेट में फैसला लिया है कि पत्थलगड़ी, सीएनटी और सीपीटी आंदोलन के दौरान लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमे वापस लिए जाएंगे. हेमंत सोरेन और उनकी पार्टी लंबे समय से मांग करती रही है कि पत्थलगड़ी आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए केस वापस लिए जाएं.
सीएम हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट मीटिंग में फैसला लिया गया कि राज्य की पांचवीं विधानसभा का प्रहला सत्र 6 जनवरी 2020 से आठ जनवरी 2020 तक चलेगा. विधानसभा के सदस्यों को शपथ दिलाने के लिए जेएमएम विधायक स्टीफन मरांडी कार्यवाहक अध्यक्ष बनाए जाएंगे.

हेमंत सोरेन की पहली कैबिनेट मीटिंग में लिए गए महत्वपूर्ण फैसले:-

  • राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में खाली पड़े पदों को जल्द भरा जाएगा.
  • महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ हो रहे यौन उत्पीड़न और अपराधों के संबंध में हर जिले में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा और न्यायिक पदाधिकारियों के पद का भी सृजन किया जाएगा.
  • आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका और अनुबंधित कर्मियों के साथ-साथ विभिन्न श्रेणियों के पेंशनभोगियों, सभी प्रकार की छात्रवृत्तियों से संबंधित लंबित भुगतान कैंप लगाकर दिए जाएंगे.
  • सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं हर जिले में गरीब और पात्र व्यक्तियों के बीच कंबल, ऊनी टोपी वितरण का काम करें. जाड़े से राहत के लिए सार्वजनिक स्थलों पर अलाव की व्यवस्था करने का फैसला लिया गया है.
  • झारखंड राज्य सरकार के प्रतीक चिह्न (लोगो) को भी नया रूप देने का फैसला लिया गया है. सरकार के मुताबिक, इसे झारखंड राज्य की संस्कृति, परंपरा, इतिहास एवं स्वर्णिम भविष्य के अनुरूप संशोधित करने की आवश्यकता है.

पिछली बीजेपी सरकार ने छोटा नागपुर टेनेंसी ऐक्ट (सीएनटी) और संथाल परगना टेनेंसी ऐक्ट (एसपीटी) में कुछ बदलाव किए थे. इन बदलावों के खिलाफ लोगों ने प्रदर्शन किए थे. इन प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के चलते कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. नई सरकार ने फैसला लिया है कि ऐसे सभी मुकदमे वापस लिए जाएंगे.

जानिए, क्या है पत्थलगड़ी
पत्थलगड़ी का चलन आदिवासियों में सदियों से रहा है. वे गांव और जमीन का सीमांकन के लिए, मृत व्यक्ति की याद में, किसी की शहादत की याद में, खास घटनाओं को याद रखने के लिए पत्थर गाड़ते हैं. वे इसे जमीन की रजिस्ट्री के पेपर से भी ज्यादा अहम मानते हैं. इसके साथ ही किसी खास निर्णय को सार्वजनिक करना, सामूहिक मान्यताओं को सार्वजनिक करने के लिए भी पत्थलगड़ी किया जाता है. यह मुंडा, संथाल, हो, खड़िया आदिवासियों में सबसे ज्यादा प्रचलित है.

झारखंड में कैसे बना मुद्दा
साल 2017 के अगस्त में खूंटी जिले में पत्थलगड़ी की सूचना पाकर कुछ पुलिसकर्मी वहां पहुंचे. वहां ग्रामीणों ने बैरिकेडिंग कर रखी थी. थानेदार जब कुछ पुलिसबल के साथ वहां पहुंचे तो उन्हें बंधक बना लिया गया. सूचना पाकर जिले के एसपी अश्विनी कुमार लगभग 300 पुलिसकर्मियों को लेकर उन्हें छुड़ाने पहुंचे तो उन्हें भी वहां बंधक बना लिया गया. लगभग रातभर उन्हें बिठाए रखा, सुबह जब खूंटी के जिलाधिकारी वहां पहुंचे तब लंबी बातचीत के बाद गांववालों ने उन्हें छोड़ा. इसके बाद यह मामला तूल पकड़ता गया.

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