दलितों के आंदोलन की हुई जीत, दिल्ली में बनेगा भव्य रविदास मंदिर

दिल्ली में संत रविदास के जिस मंदिर को ढहा दिया था. उसे फिर से बनाया जाएगा. यह पहले से बेहतर बनाया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने भी इसके लिए अनुमति दे दी है. 

दलितों के आंदोलन की हुई जीत, दिल्ली में बनेगा भव्य रविदास मंदिर

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अगस्त के महीने में बड़ा बवाल हुआ था. दलित संगठनों ने तुगलकाबाद स्थित रविदास मंदिर गिरा दिए जाने के बाद सड़कों पर उग्र प्रदर्शन किया था. क्योंकि प्रसिद्ध संत रविदास जी का मंदिर तोड़ दिया गया था.  लेकिन अब समस्या का समाधान हो गया है. 

मान गया सुप्रीम कोर्ट 
संत रविदास मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि पुरानी जगह पर रविदास मंदिर का पक्का ढांचा तैयार किया जाएगा. यह कोई अस्थायी ढांचा नहीं होगा. रविदास मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने 400 वर्ग मीटर जमीन देने का प्रस्ताव दिया था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था और जिस जगह मंदिर गिराया गया था उसी जगह मंदिर निर्माण की इजाजत दे दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा था कि वह छह हफ्ते में मंदिर निर्माण पर नजर रखने के लिए कमिटी का गठन करे.

कांग्रेस नेताओं ने दाखिल की थी अर्जी
रविदास मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर और पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीन जैन ने अर्जी दायर कर कहा था कि 21 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश दिया था उसमें बदलाव किया जाए. मंदिर स्थल पर एक स्थाई मंदिर बनाने का आदेश दिया जाए न कि लकड़ी से बना केबिन. इसके साथ ही मांग की गई थी कि मंदिर के पास के तलाब को मंदिर परिसर में शामिल किया जाए. याचिका में कहा गया था कि मंदिर 600 साल से भी ऊपर पुरानी है लिहाजा इस पर नए कानून लागू नहीं होते. याचिका में पूजा के अधिकार और आर्टिकल 21ए का भी हवाला देते हिुए कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने कभी मंदिर तोड़ने का आदेश नहीं दिया बल्कि उसे शिफ्ट करने की बात कही थी और जिस तरह से मंदिर को तोड़ा गया वह बड़ी साजिश का हिस्सा है. याचिका में कहा गया था कि कोर्ट अपने फैसले में पुनर्विचार करें और मंदिर के निर्माण का आदेश पारित करें.

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सुप्रीम कोर्ट ने भी समाधान के संकेत देते हुए याचिकाकर्ताओं अशोक तंवर और प्रदीप जैन से मामले में समाधान लेकर आने को कहा था. 

ये था पूरा मामला
दलित समुदाय के लोग 10 अगस्त को तब उद्वेलित हो उठे, जब भक्तिकाल के महान संत रविदास जी का मंदिर दिल्ली से हटा दिया गया. यह मंदिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली विकास प्राधिकरण ने हटाया था. लेकिन इस कदम के बाद पूरे देश के दलित समुदाय में जबरदस्त नाराजगी देखी गई थी. पंजाब में तो इस मुद्दे पर कई दिनों तक हंगामा मचा रहा. इस मुद्दे पर दिल्ली में हिंसक प्रदर्शन हुआ. 24 अगस्त को दलित संगठनों ने पूरी दिल्ली घेर ली और मध्य दिल्ली के झंडेवालान से रामलीला मैदान तक विरोध स्वरुप रैली निकाली थी. 

विरोध प्रदर्शनों पर सुप्रीम कोर्ट की भी नजर थी
इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली, पंजाब और हरियाणा की सरकारों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि कानून और व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने न पाए. कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली के तुगलकाबाद में गुरु रविदास के मंदिर मामले को राजनीतिक रंग नहीं दिया जा सकता है. जस्टिस अरुण मिश्रा और एमआर शाह की पीठ ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की सरकारों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि मंदिर विध्वंस को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़नी नहीं चाहिए.


सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सब कुछ राजनीतिक नहीं हो सकता है. हमारे आदेश को किसी भी व्‍यक्ति के द्वारा राजनीतिक रंग नहीं दिया जा सकता है. 

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हालांकि दिल्‍ली विकास प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद मंदिर को ध्वस्त किया था.गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 9 अगस्‍त को गुरु रविदास जयंती समरोह समिति को जंगल क्षेत्र से कब्‍जा छोड़ने का निर्देश जारी किया था. कोर्ट के आदेशों के बावजूद समिति ने जमीन खाली नहीं की थी.