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खत्म हो जाएगी 'सुप्रीम' सुनवाई! 17 नवंबर से पहले राम मंदिर पर आ सकता है फैसला

अगले 48 घंटे अयोध्या के लिए बेहद अहम है. क्योंकि अगले 48 घंटे के भीतर सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या केस की सुनवाई खत्म हो जाएगी. अयोध्या केस में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई खत्म होने के बाद हर किसी को फैसले का इंतजार रहेगा.

खत्म हो जाएगी 'सुप्रीम' सुनवाई! 17 नवंबर से पहले राम मंदिर पर आ सकता है फैसला

नई दिल्ली: कई सालों से अदालत में चल रहे अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई अब अंतिम दौर में पहुंच चुकी है. सुप्रीम कोर्ट में 17 अक्टूबर से पहले ही इस मामले की सुनवाई खत्म होनी है यानी अब सिर्फ 2 दिन बचे है. सोमवार को अदालत में मुस्लिम पक्ष की ओर से दलीलें रखी गईं, तो मंगलवार को हिंदू पक्ष ने  वक्फ बोर्ड की दलीलों का जवाब दिया.

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ कर रही है. मध्यस्थता की कोशिशें असफल होने के बाद से 6 अगस्त को इस मामले की रोजाना सुनवाई शुरू हुई थी, तब से लेकर अबतक हफ्ते में पांच दिन सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है. लेकिन संवैधानिक पीठ के अध्यक्ष चीफ जस्टिस रंजन गोगोई आगामी 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि 17 नवंबर से देश के इस के सबसे बड़े मामले पर फैसला आ सकता है.

एक ओर जहां अयोध्या पर फैसला की खड़ी नजदीक आ रही है तो वहीं दूसरी ओर अयोध्या में अब इस बात की तैयारी हो रही है कि फैसला आने के बाद रामलला को किस रंग का और कौन सा कपड़ा पहनाया जाएगा. भगवान को किस चीज का भोग लगाया जाएगा.

पुजारी ने क्या कहा?

रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सतेंद्र दास का कहना है कि 'एक प्रकार से ये उत्सव है. रामलला के पक्ष में आएगा. उस दिन है हम विशेष रूप से जो भी मिष्ठान हमें मिलेगा वो भोग लगाएंगे. जो फल मिल जाएगा वो भोग लगाएंगे. वहां जो बनता है उसमें खीर, पूरी, हलवा बनवाएंगे. उसका वितरण करेंगे और श्रृंगार के लिए इत्र से उनका अभिषेक करेंगे. उसके बाद जो सबसे अच्छे कपड़े होंगे उस कपड़े को पहनाएंगे.'

अयोध्या पर फैसले की घड़ी करीब है प्रशासन की सतर्क हो गया है. अयोध्या में सुरक्षा को बढ़ाया दिया गया है. यूपी सरकार की ओर से अयोध्या जिले में धारा 144 लगा दी गई है. अब सबकी नजरें अदालत पर टिकी है. देखना अब ये है कि देश की सबसे बड़ी अदालत विवादित 2.77 एकड़ जमीन पर किसके दावे को सही करार देती है. और किसके दावे को खारिज करती है.

अयोध्या विवाद की शुरुआत

बात साल 1528 की है, जब बाबर ने यहां एक मस्जिद का निर्माण कराया था. जिसे बाबरी मस्जिद कहते हैं. हिंदू मान्यता के मुताबिक इसी जगह पर भगवान राम का जन्म हुआ था. इसके करीब 325 साल बाद मामले ने उस वक्त तूल पकड़ा जब वर्ष 1853 में हिंदू पक्षकारों एक आरोप लगाया. जिसमें कहा गया कि भगवान राम के मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण हुआ है. उस वक्त मुद्दे पर हिंदुओं और मुसलमानों के बीच पहली हिंसा हुई. इसके बाद 1859 में ब्रिटिश सरकार ने एक सुलह का तरीका खोजा. इसके तहत तारों की एक बाड़ खड़ी करके विवादित भूमि के आंतरिक और बाहरी परिसर में मुस्लिमों और हिदुओं को अलग-अलग प्रार्थनाओं की इजाजत दे दी. और फिर सन् 1885 में मामला पहली बाद अदालत के दरवाजे पर पहुंचा. महंत रघुबर दास ने फैजाबाद अदालत में बाबरी मस्जिद से लगे एक राम मंदिर के निर्माण की इजाजत के लिए अपील दायर की. इतने सालों में अबतक अयोध्या विवाद पर फाइनल फैसला नहीं आया है. 

फिलहाल सुनवाई अंतिम चरण में है, और अगले कुछ घंटे अयोध्या के लिए बेहद ही अहम हैं. हर कोई टकटकी लगाए इस इंतजार में बैठा है कि आखिर मंदिर-मस्जिद विवाद का निष्कर्ष क्या निकलता है.