तेजस Mk1A बनेगा हवाई 'दैत्य', DRDO कर रहा 'खूंखार' BVRAAM मिसाइल से लैस; दुश्मन को बगैर दिखे मार गिराएगी IAF

Tejas Mk1A Astra missile: भारतीय वायुसेना ने अपने स्वदेशी फाइटर जेट तेजस Mk1A के हथियार बेड़े के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है. इंडियन एयरफोर्स ने फैसला किया है कि तेजस Mk1A में अब विदेशी 'डर्बी' मिसाइलों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.

Written by - Prashant Singh | Last Updated : Nov 15, 2025, 10:05 AM IST
  • DRDO ने तेजस के लिए किया डिजाइन
  • भारत का टेक्नोलॉजी पर होगा पूरा कंट्रोल
तेजस Mk1A बनेगा हवाई 'दैत्य', DRDO कर रहा 'खूंखार' BVRAAM मिसाइल से लैस; दुश्मन को बगैर दिखे मार गिराएगी IAF

Tejas Mk1A Astra missile: इंडियन एयरफोर्स का स्वदेशी हथियारों पर भरोसा बढ़ता जा रहा है. यही वजह है कि अपने भरोसेमंद लड़ाकू विमानों से विदेशी मिसाइलों को अलविदा कहना शुरू कर दिया है. आपको बता दें, तेजस को IAF की रीढ़ की हड्डी माना जाता है. जिसमें अब केवल DRDO द्वारा बनाई गई स्वदेशी 'अस्त्र' BVRAAM यानी Beyond Visual Range Air-to-Air Missile मिसाइल को ही प्राथमिकता दी जाएगी. IAF का यह फैसला दिखाता है कि वह अब अपने स्वदेशी हथियारों की क्षमता और विश्वसनीयता पर पूरा भरोसा कर रही है.

भारत को क्या फायदा?
इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह विदेशी निर्भरता को खत्म करता है. 'डर्बी' मिसाइल इजरायल की कंपनी राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम्स से आती है, जिसके लिए भारत को हर बार पुर्जों और अपग्रेड के लिए बाहर देखना पड़ता था. अब 'अस्त्र' के आने से, मिसाइलों की आपूर्ति हमेशा सुनिश्चित रहेगी और जरूरत के हिसाब से इसे आसानी से अपग्रेड भी किया जा सकेगा.

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अस्त्र मिसाइल क्यों है 'सुपीरियर'?
'अस्त्र' मिसाइल में कई ऐसी तकनीकें हैं जो इसे डर्बी से बेहतर बनाती हैं. 'अस्त्र' मिसाइल की रेंज डर्बी मिसाइल की रेंज से काफी ज्यादा है. यह तेजस Mk1A को दुश्मन के विमानों को बहुत दूर से ही मार गिराने की ताकत देती है, यानी दुश्मन हमला करने की रेंज में आ ही नहीं पाएगा. वहीं, 'अस्त्र' मिसाइल की स्पीड और दुश्मन के पीछे मुड़ने की क्षमता बेहतर है, जिससे दुश्मन के तेज फाइटर जेट्स के लिए इससे बचना मुश्किल हो जाता है.

इतना ही नहीं, 'अस्त्र' को DRDO ने तेजस के लिए ही खास तौर पर डिजाइन किया है, इसलिए यह तेजस Mk1A के रडार और सिस्टम के साथ आसानी से और पूरी तरह से तालमेल बिठा लेती है.

टेक्नोलॉजी पर भारत का कंट्रोल
यह फैसला सिर्फ टेक्नोलॉजी का नहीं, बल्कि देश की रणनीति का भी हिस्सा है. दरअसल, जंग के समय विदेशी हथियार और उनके पुर्जे मिलने में रुकावट आ सकती है. स्वदेशी अस्त्र के इस्तेमाल से यह खतरा पूरी तरह से ख़त्म हो जाता है.

वहीं, इससे टेक्नोलॉजी पर भारत का पूरा कंट्रोल रहेगा. इसका मतलब है DRDO और भारतीय कंपनियां अब इस मिसाइल को भारतीय युद्ध की जरूरतों के हिसाब से लगातार अपग्रेड कर सकती हैं. आखिरी में कह सकते हैं कि तेजस Mk1A में 'अस्त्र' मिसाइल की तैनाती IAF को स्वदेशी हथियारों से मिलने वाली ताकत का एक मजबूत उदाहरण है, जो भारत की हवाई सुरक्षा को और भी ज्यादा मजबूत करेगा.

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