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अगर यही रहा तेजस्वी का रवैया, तो कहीं डूब ना जाए महागठबंधन की नैय्या?

बिहार में महागठबंधन के अंदर की खींचतान लोकसभा के समय से ही अब तक ज्यों की त्यों बनी हुई है. महागठबंधन में 'बिग ब्रदर' की भूमिका अदा कर रहा सबसे बड़ा घटक दल राजद इन हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. कम से कम महागठबंधन के अंदर चर्चा तो इसी बात की है.   

अगर यही रहा तेजस्वी का रवैया, तो कहीं डूब ना जाए महागठबंधन की नैय्या?

पटना: समस्तीपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार का प्रचार करने नहीं जा सके तेजस्वी को एक बार फिर लपेटे में लिए जाने की कोशिश की गई. लोकसभा चुनाव के दौरान हम (हिंदुस्तान आवाम मोर्चा) से भाजपा में शामिल हुए महाचंद्र सिंह ने महागठबंधन के अंदर आपसी सांमजस्य की कमी के मामले पर तेजस्वी की चुटकियां लेनी शुरू कर दी.

सभा में क्यों नहीं पहुंचे तेजस्वी

हालांकि, कांग्रेस के नेता ने तेजस्वी का बचाव करते हुए राजद उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी की बात को दोहराया. उन्होंने कहा कि तेजस्वी ने किशनगंज और समस्तीपुर में कांग्रेस प्रत्याशी के चुनावी प्रचार के लिए समय दिया था लेकिन उनकी तबीयत खराब होने और हेलिकॉप्टर में तकनीकी खराबी की वजह से उन्हें यह प्लान रद्द करना पड़ा. तेजस्वी भागलपुर में एक चुनावी दौरे पर थे जिसके बाद उन्हें समस्तीपुर और किशनगंज में चुनाव प्रचार को भी जाना था. 

लोकसभा में बुरी तरह विफल हुए तेजस्वी

ये पहला मौका नहीं था जब महागठबंधन के अंदर सबकुछ ठीक न होने को लेकर एनडीए ने घेराव किया हो. इससे पहले भी राजद के 'बिग ब्रदर' वाले रवैये से महागठबंधन के आंतरिक मतभेद दिखने भी लगे हैं. लोकसभा की हार के बाद से तो कांग्रेस को राजद के महागठबंधन के नेतृत्व पर कुछ खास भरोसा रह नहीं गया है. कांग्रेस के बिहार प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने भी कांग्रेस की अलग राह चुन ही ली. महागठबंधन में कांग्रेस का रहना एक औपचारिकता मात्र ही रह गया है. लालू यादव की गैर-मौजूदगी में राजद की कमान संभाल रहे तेजस्वी यादव न तो लोकसभा चुनाव में ही खुद को लिट्मस टेस्ट में साबित कर पाए ना ही पारिवारिक कलह को मीडिया में आने से बचा पाए. 

पुराने नेताओं से नहीं बिठा पा रहे सांमजस्य

तेजस्वी को लेकर महागठबंधन में इस बात की भी कहासुनी होती रही है कि वे पार्टी के पुराने नेताओं की नहीं सुनते. लोकसभा चुनाव के दौरान एम.ए. फातमी का पार्टी छोड़ देना, रघुवंश प्रसाद सिंह का तेजस्वी को आगाह करना, कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे को लेकर आपसी मतभेद इन तमाम मामलों पर तेजस्वी को खुद को महागठबंधन प्रमुख के रूप में साबित कर पाने में नाकाम रहे हैं. 

बिहार उपचुनाव में जारी है जोर-आजमाइश 

बता दें कि बिहार में 5 विधानसभा सीट और 1 लोकसभा सीट पर उपचुनाव चल रहा है. जिसकी तैयारियों में एनडीए और महागठबंधन दोनों ही पक्ष जी जान से लगे हुए हैं. गुरूवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी सीवान में चुनाव प्रचार में थे. गृहमंत्री अमित शाह के एनडीए की मजबूती को लेकर दिए बयान के बाद कल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी खासे लय में दिखे. वहीं दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बार-बार बिहार की राजधानी पटना में हुए जलजमाव से हुई परेशानी के मामले पर बिहार सरकार को घेरने की कोशिश की. 

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में सियासी खेलों में कितना बदलाव होता है, इसका ठीक-ठीक अंदाजा लगा पाना जरा मुश्किल है लेकिन हालिया राजनीतिक परिदृश्य में महागठबंधन की स्थिति कुछ खास अच्छी नहीं दिख रही. इसके अलावा एनडीए में भी सीट बंटवारे को लेकर खटपट हो सकती है क्योंकि भाजपा-जदयू गठबंधन पर भले गृहमंत्री अमित शाह के बयान के बाद फिलहाल ब्रेक लग गया हो, लेकिन विधानसभा चुनाव में सीट समीकरण पर दांव फिर से फंस सकता है.