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आरे कॉलोनी के कटते हुए पेड़ आखिरकार पर्यावरण को बचाएंगे ही, सुनने में लगता है अजीब लेकिन है बिल्कुल सच

मुंबई मेट्रो के लिए पेड़ काटे जाने पर लोगों के भारी विरोध के बाद भले ही सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया है. लेकिन कुछ हजार पेड़ों की बलि लेने वाली यह योजना आखिरकार पर्यावरण को बचाने के लिए ही है. हालांकि यह सुनने में बड़ा अजीब लगता है लेकिन वास्तविकता यही है. अभी का छोटा नुकसान भविष्य के बड़े लाभ में तब्दील होगा. आइए आपको बताते हैं कैसे होगा यह- 

आरे कॉलोनी के कटते हुए पेड़ आखिरकार पर्यावरण को बचाएंगे ही, सुनने में लगता है अजीब लेकिन है बिल्कुल सच
भले ही कट रहे हैं पेड़, लेकिन यहां बनी मुंबई मेट्रो से कम होगा प्रदूषण

मुंबई: मायानगरी मुंबई के लोग मेट्रो परियोजना के लिए पेड़ काटे जाने की वजह से परेशान हो रहे हैं. उनका दुखी होना लाजिमी भी है, क्योंकि दशकों से फलते फूलते हरे भरे पेड़ों को धराशायी होते देखना बेहद दुखदायी है. वो भी तब जब पूरी दुनिया में हरियाली समाप्त होती जा रही है. लेकिन छोटी कड़वाहट के पीछे एक खुश करने वाली मिठास भी छुपी हुई है. जिसपर कोई ध्यान नहीं दे रहा है.  

पहले जानते हैं पूरा मामला

बृहन्नमुंबई नगर निगम (बीएमसी) की ट्री अथॉरिटी ने 29 अगस्त 2019 को आरे कॉलोनी में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए कार शेड बनाने की मंजूरी दे दी है. लेकिन इसके लिए लगभग 2,185 पेड़ों की बलि चढ़ानी पड़ेगी. इसके अलावा 461 पेड़ों की जगह भी बदलनी होगी. इसकी वजह से लोग आंदोलित हैं और वो पेड़ों को कटने से बचाने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं. इसमें आम लोगों से लेकर बॉलीवुड सेलिब्रिटीज भी शामिल हैं. इसके खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में भी अपील की गई, लेकिन अदालत ने भी आरे कॉलोनी को जंगल मानने से इनकार करते हुए पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. इसके बाद से पेड़ों की कटाई का काम शुरु हो गया है.

मुंबई मेट्रो है पर्यावरण के लिए जरुरी

आरे कॉलोनी में पेड़ काटे जाने का विरोध कर रहे लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि वह पेड़ों को काटने का नहीं बल्कि मुंबई मेट्रो का विरोध कर रहे हैं. जो कि पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद जरुरी है. क्योंकि मुंबई मेट्रो की लाइन-3 में 2021 से दैनिक 13.9 लाख यात्री सवार होंगे. जिसकी वजह से मुंबई की सड़कों पर प्रति दिन 6.65 लाख कम गाड़ियां उतरेंगी. इसके कारण हर रोज 3.54 लाख लीटर डीजल पेट्रोल बचेगा और हर साल 2.61 लाख टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा. यानी पर्यावरण में कम जहर घुलेगा.

आरे कॉलोनी की भरपाई करने के लिए मुंबई मेट्रो कर रहा है तैयारी

मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने आरे कॉलोनी में काटे जाने वाले 2,185 पेड़ों से पर्यावरण को होने वाले नुकसान का अंदाजा पहले ही लगा लिया था. इसीलिए मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने पहले ही संजय गांधी राष्ट्रीय वन में 20,900 पेड़ लगा दिए हैं. यही नहीं अभी 11400 और पेड़ लगाए जाने की योजना भी है. यानी लगभग 2 हजार पेड़ों की जगह 32 हजार पेड़ लहलहाने के लिए तैयार बैठे हैं.

सरकारी योजना का विरोध लेकिन प्राईवेट बिल्डरों का किसी ने नहीं किया विरोध

आरे मिल्क कॉलोनी लगभग 1280 हेक्टेयर में फैली हुई है, जिसमें से 33 हेक्टेयर में मुंबई मेट्रो-3 कार शेड परियोजना चल रही है. जो कि कुल क्षेत्रफल का मात्र 2.5 प्रतिशत है. लेकिन इसी आरे कॉलोनी इलाके में 210 हेक्टेयर में फिल्म सिटी बनी हुई है और 97 फीसदी हिस्से में रॉयल पाम्स सोसायटी है. जिनके निर्माण के समय किसी पर्यावरण प्रेमी ने कोई आपत्ति नहीं जताई. जबकि इन दोनों से पर्यावरण को लगातार क्षति हो रही है. जबकि मेट्रो परियोजना आखिरकार पर्यावरण को बचाने के लिए ही है.