बच्ची से हुआ था दुष्कर्म, बागपत की अदालत ने पांच दिन में सुनाया फैसला

इस घटना से छपरौली थाना क्षेत्र के इस गांव के लोग भी बेहद दुखी हैं. गांव वालों ने बताया कि उस दिन बच्ची घर में खिलौने से खेल रही थी. मां-बाप घर में चिनाई के कार्य में व्यस्त थे. 13 सितंबर को उसका चचेरा भाई उसे अपने साथ ले गया. अदालत  ने उसे उम्र कैद की सजा सुनाई है.

बच्ची से हुआ था दुष्कर्म, बागपत की अदालत ने पांच दिन में सुनाया फैसला

नई दिल्लीः बागपत जिले में एडीजे प्रथम कोर्ट ने एक तीन साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में महज पांच दिन में सुनवाई पूरी कर दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई है. मामला यहां के छपरौली थाने इलाके का है. पुलिस ने दोषी युवक को 29 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था. डीजे प्रथम विशेष अदालत ने शीघ्र फैसला सुनाते हुए देश के सामने मिसाल पेश की है. मामले में युवक को  उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. अदालत में कुल आठ गवाह पेश किए गए. इनमें पीड़ित बच्ची भी शामिल थी. शनिवार को अदालत ने जब बच्ची के कोर्ट में बयान लिए तो बच्ची के बयान सुनकर अदालत में मौजूद हर शख्स का दिल भर आया. 

कब क्या हुआ, जानिए यहां
छपरौली थाना क्षेत्र के एक गांव में 13 सितंबर को तीन साल की बच्ची को उसका चचेरा भाई नमकीन दिलाने के बहाने घर से ले गया था. युवक ने जंगल में ले जाकर बच्ची से दुष्कर्म किया था. पुलिस ने इस युवक को दिल्ली से 29 अक्तूबर को गिरफ्तार किया और 30 अक्तूबर को जेल भेजा था.

केस के आईओ छपरौली थानाध्यक्ष दिनेश कुमार चिकारा ने 15 नवंबर को अदालत में चार्जशीट दाखिल की. एडीजे प्रथम विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम शैलेंद्र पांडेय की कोर्ट में 25 नवंबर को आरोप तय किए. डीजीसी सुनील कुमार और एडीजीसी राजीव कुमार ने बताया कि केस की रोजाना सुनवाई हुई. 29 नवंबर को पांच दिन में केस की सुनवाई पूरी हो गई. शनिवार को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आरोपी युवक को उम्रकैद की सजा सुनाई है.

मामले से ग्रामीणों में दुख
इस घटना से छपरौली थाना क्षेत्र के इस गांव के लोग भी बेहद दुखी हैं. गांव वालों ने बताया कि उस दिन बच्ची घर में खिलौने से खेल रही थी. मां-बाप घर में चिनाई के कार्य में व्यस्त थे. तभी 25 साल का आरोपी चचेरा भाई पहुंचा. कुछ देर घर पर रहा और फिर बच्ची को अपने साथ लेता गया.

बच्ची की हालत बहुत खराब हो गई थी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, तब जाकर उसकी जान बची. पीड़िता की मां बताती हैं कि जब डॉक्टर ने उन्हें बेटी के साथ गलत काम होने की बात बताई, तो उन्हें एक बार तो यकीन ही नहीं हुआ. बच्ची नर्सरी में पढ़ती है. उसके स्कूल की शिक्षिकाओं ने भी उसे संभालने में मदद की. मां ने आरोपी को फांसी की सजा की मांग की. 

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औरेया की अदालत भी कर चुकी है तेज सुनवाई
डीजीसी सुनील कुमार और एडीजीसी राजीव कुमार ने बताया कि केस की रोजाना सुनवाई हुई. कोर्ट में 27 वें दिन युवक पर आरोप तय हो गए थे. 29 नवंबर को पांच दिन में केस की सुनवाई पूरी हो गई. इससे पहले पॉक्सो एक्ट के मामले में औरेया की अदालत ने नौ दिन में फैसला सुनाया गया था.

थानाध्यक्ष दिनेश कुमार चिकारा ने 15 नवंबर को अदालत में चार्जशीट दाखिल की. एडीजे प्रथम विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम शैलेंद्र पांडेय की कोर्ट में 25 नवंबर को आरोप तय किए थे. 

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