पाकिस्तान हो या चीन, भारत के इस नक्शे से उड़ जाएगी दोनो की नींद

भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख का नया मानचित्र जारी किया है. इसमें दर्शाई गई सीमाएं पाकिस्तान साथ साथ चीन की भी नींद उड़ा देगी.   

पाकिस्तान हो या चीन, भारत के इस नक्शे से उड़ जाएगी दोनो की नींद
भारत के नए नक्शे से इमरान और जिनपिंग को होगी चिंता

नई दिल्ली: केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख का नया नक्शा जारी किया है. जिसके मुताबिक नियंत्रण रेखा अब अप्रासंगिक हो गई है. नए नक्शे में  जम्मू कश्मीर राज्य को विभाजन के पहले की  स्थिति दर्शाई गई है. 

पाकिस्तानी कब्जे वाला कश्मीर भी भारत में
गृह मंत्रालय के नए नक्शे में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के तीनो जिलों मुजफ्फराबाद, मीरपुर को भी शामिल किया गया है. साथ ही पुंछ जिले का जो हिस्सा पाकिस्तान ने गैर  कानूनी  रुप  से अपने  कब्जे में ले रखा है, उसे भी भारतीय हिस्से में दिखाया गया है. नए नक्शे  के मुताबिक केन्द्र शासित  प्रदेश जम्मू कश्मीर में 20 जिले शामिल किए गए हैं. जिसमें मुजफ्फराबाद और मीरपुर भी हैं.  


1947 में जम्मू एवं कश्मीर राज्य में 14 जिले थे. इनमें कठुआ, जम्मू, उधमपुर, रियासी, अनंतनाग, बारामूला, पुंछ, मीरपुर, मुजफ्फराबाद, लेह और लद्दाख, गिलगित, गिलगित वजरात, चिल्हास और जनजातीय क्षेत्र शामिल थे. 2019 तक भूतपूर्व जम्मू और कश्मीर की राज्य सरकार ने इन 14 ज़िलों के क्षेत्रों को पुनर्गठित करके 28 ज़िले बना दिए थे।  नए जिलों के नाम कुपवाड़ा, बांदीपोरा, गांदरबल, श्रीनगर, बड़गाम, पुलवामा, शोपियां, कुलगाम, राजौरी, रामबन, डोडा, किश्‍तवार, साम्बा और कारगिल हैं। 
संसद की सिफारिश पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अगस्त महीने में भारतीय संविधान से अनुच्छेद-370 को प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया था.

लद्दाख के  नक्शे में भी बदलाव

केन्द्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद लद्दाख के नक्शे में भी बदलाव किया गया है. केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख की सीमा के अंदर ही अक्साई चिन इलाके को भी दिखाया गया है. जिसपर भौगोलिक रुप से चीन ने कब्जा कर रखा है. अक्साई चिन वही इलाका है जिसे पाकिस्तान ने अवैध रुप से चीन को  सौंप  रखा है.  


राष्ट्रपति ने जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन  दूसरे आदेश, 2019 द्वारा नए लद्दाख़ संघ राज्य क्षेत्र के लेह ज़िले को, कारगिल ज़िला बनने के बाद, 1947 के लेह और लद्दाख़ ज़िले के बाक़ी क्षेत्र में 1947 के गिलगित, गिलगित वजारत, चिल्हास और जनजातीय जिलों के क्षेत्रों को शामिल कर लिया गया है. 

सरकार का मानना है कि इन नक्शों में वास्तविक स्थिति को दर्शाया गया है.