जिन आनंद के जीवन पर फिल्म बनी थी, वह अब कोर्ट-कचहरी में फंस गए हैं

सुपर 30 नाम से आईआईटी की कोचिंग देने के लिए मशहूर आनंद कुमार पर कोर्ट ने नाराजगी जताई है.  आरोप है कि उनके संस्थान के जरिये देश के आम लोगों को भी धोखा दिया जा रहा है.  गुवाहाटी हाईकोर्ट एक जनहित याचिका के सिलसिले में आनंद कुमार के पेश नहीं होने से नाराज है. अदालत ने उन्हें 28 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है.

जिन आनंद के जीवन पर फिल्म बनी थी, वह अब कोर्ट-कचहरी में फंस गए हैं

गुवाहाटीः आनंद कुमार के नाम से बखूबी परिचित होंगे. वही, जिनके पढ़ाए छात्र आईआईटी में झंडा गाड़ते हैं. सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार कोर्ट-कचहरी के मामले में फंस गए हैं. हुआ यह है कि उन पर सुपर-30 में दाखिले के नाम पर धोखाधड़ी का आरोप है. गुवाहाटी हाईकोर्ट एक जनहित याचिका के सिलसिले में आनंद कुमार के पेश नहीं होने से नाराज है. अदालत ने उन्हें 28 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है. मुख्य न्यायाधीश अजय लांबा और न्यायमूर्ति एएम बुजारबरूआ ने आनंद कुमार को उन 5 छात्रों और उनके अभिभावकों को 10-10 हजार रुपया मुआवजा देने का भी आदेश दिया. इन छात्रों ने मंगलवार को अदालत के समक्ष दावा किया कि ‘सुपर 30’ में दाखिले के नाम पर उनसे धोखाधड़ी की गई. 

आर्थिक रूप से कमजोर 30 छात्रों को चुनकर पढ़ाते हैं 
यह संस्थान हर साल आर्थिक रूप से कमजोर तबके के 30 छात्रों का चयन करता है और उन्हें आईआईटी की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराता है. खंड पीठ ने आईआईटी-गुवाहाटी के 4 छात्रों की ओर से दायर एक जनहित याचिका के सिलसिले में 19 नवंबर को कुमार को अदालत के समक्ष मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था. याचिकाकर्ता के वकील अमित गोयल ने कहा कि कुमार ने छात्रों के आरोपों का जवाब नहीं दिया जबकि अदालत ने 21 सितंबर 2018 को निर्देश दिया था.

इन चारों छात्रों ने इस आरोप के साथ अदालत का रुख किया था कि कुमार के झूठे दावों के चलते हर साल देश के विभिन्न हिस्सों से काफी संख्या में छात्र पूरे विश्वास और उम्मीद के साथ उनके पास जाते हैं कि वह आईआईटी की प्रवेश परीक्षा पास करने में उनकी मदद करेंगे.

आरोपः सुपर-30 नाम से कोई कक्षा नहीं चला रहे हैं
जमहित याचिका में कहा गया है कि पटना पहुंचने पर छात्रों को उनके कोचिंग संस्थान रामानुजम स्कूल ऑफ मैथमेटिक्स में दाखिला दिलाया गया और उनमें से प्रत्येक से कुमार ने 30-30 हजार रुपये लिए. इसमें यह आरोप भी लगाया गया है कि कुमार 2008 से ‘सुपर 30’ नाम की कोई कक्षा नहीं चला रहे हैं. लेकिन आईआईटी प्रवेश परीक्षा के नतीजे आने पर वह रामानुजम स्कूल ऑफ मैथमेटिक्स के कुछ छात्रों के साथ मीडिया के सामने आते हैं और दावा करते हैं कि वे उनके संस्थान से हैं तथा उन्होंने आईआईटी की प्रवेश परीक्षा उतीर्ण की है.

पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ में पराली जलाने की समस्या का हुआ निदान

धोखा देने की बात आई सामने
इसमें कहा गया है, कुमार के गलत प्रचार से न सिर्फ आईआईटी के अभ्यर्थियों को और उनके अभिभावकों को बल्कि देश के आम लोगों को भी धोखा दिया जा रहा है. यहां यह उल्लेख करना जरूरी है कि कुमार आईआईटी अभ्यर्थियों को पढ़ाने के लिए योग्य नहीं हैं.

याचिका में एक अन्य प्रतिवादी, सुपर 30 के सह संस्थापक और बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद ने उच्च न्यायालय में दाखिल किए अपने हलफनामे में कहा है कि उन्होंने समाज की समस्याओं का हल करने के विचार से इस अनूठे कार्यक्रम को मूर्त रूप दिया. कुमार के सुपर 30 पर बनी एक बायोपिक इस साल जुलाई में आई थी.

जन्मदिवस विशेष: श्वेत क्रांति के जनक वर्गीज कुरियान को करें याद