संविधान दिवस के पीछे की कहानी, जी हिंदुस्तान की जुबानी

आज जब महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, उस फैसले की एक-एक कर सभी विपक्षी दल ऐतिहासिक बताने लगे. कईयों ने यह भी कहा कि संविधान दिवस के दिन यह फैसला दिखाता है कि भारतीय संविधान सर्वोपरि है. आज के दिन यानी 26 नवंबर को बाबा भीमराव अंबेडकर जिन्हें संविधान निर्माता भी कहा जाता है, उनकी जयंती भी है. 

संविधान दिवस के पीछे की कहानी, जी हिंदुस्तान की जुबानी

नई दिल्ली:  देश की आजादी कैबिनेट मिशन प्लान की मंजूरी के बाद से ही मानी जानी लगी. 15 अगस्त 1947 को आधिकारिक रूप से देश आजाद हुआ कागजों पर, लेकिन असली आजादी मिली भारतीय संविधान के लागू होने किए जाने के बाद. भारतीय संविधान भले 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ हो लेकिन तैयार तो यह 26 नवंबर 1949 को ही कर लिया गया था. आज उसी संविधान के 70 साल हो गए हैं. संविधान सभा के ड्राफ्टिंग कमिशन ने 26 नवंबर को भारतीय संविधान तैयार कर के उसका प्रारूप सौंप दिया. कैबिनेट मिशन की मंजूरी के बाद भारतीय संविधान बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई और संविधान को 2 साल 11 महीने और 18 दिन में तैयार कर लिया गया. 

भारतीय संविधान के कई प्रावधान विदेशों और पहले के कानूनों से

संविधान सभा में तैयार किए गए उस वक्त के ढांचे में एक प्रस्तावना के अलावा 395 अनुच्छेद, 12 भाग और 8 सूचियां थी. अब धीरे-धीरे अनुच्छेद बढ़कर 448 तक पहुंच गई है. जबकि 25 भाग और 12 सूचियां हैं. भारतीय संविधान को जिस वक्त संविधान सभा ने मिलकर तैयार किया था, उस वक्त ज्यादातर चीजें भारत सरकार अधिनियम-1935 के प्रावधानों से लिया गया था. इसके अलावा तकरीबन 60 देशों की यात्रा करते हुए सलाहकार बीएन राव ने 10 देशों की संविधानों को परखा और भारतीय समाज के हिसाब से जिन प्रावधानों को शामिल किया जा सकता था, कर लिया गया. जैसे कि अमेरिका से न्यायालय की आजादी और मौलिक अधिकारों के अलावा राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति की शक्तियां ली गई है तो आयरलैंड से राज्य के नीति निर्देशक तत्व, ब्रिटेन से पार्लियामेंट्री सरकार का प्रावधान तो रूस से मौलिक कर्तव्यों का प्रावधान. 

निर्वाचित प्रतिनिधियों ने किया ड्राफ्टिंग कमिटी का चुनाव

संविधान सभा जिसने पूरे संविधान का निर्माण किया, वह खुद कैसे तैयार की गई थी, इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है. दरअसल, संविधान सभा में चुने गए सभी सदस्य भारत के राज्यों, प्रांतों और अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों  के प्रतिनिधित्वकर्ता थे. कहने का मतलब कि प्रत्यक्ष रूप से चुना गया कोई प्रतिनिधि ही संविधान सभा में शामिल होगा. उस वक्त तक भारत में कुल 389 सदस्य थे, जिसमें से वोटिंग के बाद कुल 299 सदस्य ही बचे. मुस्लिम लीग ने इसका विरोध कर अपना प्रतिनिधित्व वापस ले लिया था. उनका मानना था कि कांग्रेस इसमें अपनी मनमानी कर सकती है क्योंकि उसके सदस्य ज्यादा चुने गए हैं. अब संविधान सभा ने संविधान का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए ड्राफ्टिंग कमिटी का गठन किया जिसके शुरू-शुरू में अंतरिम अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा थे. बाद में बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर को इसका स्थायी अध्यक्ष बना दिया गया. 

ड्राफ्टिंग कमिटी के अलावा भी काम कर रही थीं कुछ कमिटियां

अब ड्राफ्टिंग कमिटी में कुल 7 सदस्यों को शामिल किया गया. डॉ. भीमराव अंबेडकर के अलावा अलादी कृष्णास्वामी, एन गोपालास्वामी, के.एम.मुंशी, मोहम्मद सादुल्लाह, बीएल मित्तर और डी.पी खेतान शामिल थे. डॉ. बीएन राव बाहर से ही अन्य विदेशी स्त्रोतों से संविधान के लिए प्रावधान इकठ्ठा कर रहे थे. इसके अलावा संविधान सभा में कुछ विशेष कमिटियां बनाई गईं थी. फाइनेंस कमिटी से लेकर राज्य कमिटियां तक बनाई गई थी.

 
भारतीय संविधान विश्व का लिखित सबसे लंबा संविधान है. इतने बड़े संविधान के भरोसे कोई भी इस बात के लिए आश्वस्त रहता है कि संविधान अधिकारों की रक्षा करेगा.