कश्मीर में बदल रही है तस्वीर, विकास की इबारत लिख रहे इटली से आए सेब प्लांट

कश्मीर का सोपोर जहां आये दिन आतंकियों के साथ मुठभेड़ की खबरें आती रहती है, वहां की तस्वीर तेजी से बदल रही है. लोग हिंसा से तंग आ चुके है और अब सेब के कारोबार से विकास की ओर बढ़ रहे हैं. सोपोर में सरकार अब high quality सेबों की पैदावार पर जोर दे रही है, जिससे लोगों का कारोबार बढ़े और रोजगार के मौके भी मिले.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Aug 3, 2021, 10:21 AM IST
  • कश्मीर में High Quality सेबों की पैदावार
  • रोजगार का बड़ा जरिया है सेब की खेती
कश्मीर में बदल रही है तस्वीर, विकास की इबारत लिख रहे इटली से आए सेब प्लांट

नई दिल्ली: सोपोर में सेब के बागान और सेब की मिठास पूरे देश में मशहूर है. इसकी मिठास का कोई जवाब नहीं है. यहीं वजह है कि कश्मीर के सेब की बाजार में अलग मांग होती है. पूरे कश्मीर में लगभग 18 लाख टन सेब पैदा होता है और ये पूरे देश की कुल पैदावार का 75 फीसदी है. कश्मीर में सेब करोबार 8,000-10,000 करोड़ रुपये का माना जाता है.

कश्मीर में सेब की खेती

कश्मीर के सोपोर और आसपास के इलाकों में सेब की खेती होती है. यहां पर ज्यादातर लोग की इनकम का ये एक बड़ा जरिया है. सोपोर को उसके हरे भरे बागों और बड़े बड़े घरों की वजह से सोपोर को "लिटिल लंदन" भी कहते हैं.

धारा 370 हटने के बाद से अब किसानों की आमदनी को और बढ़ाने के लिए उन्नत किस्म के सेब की पैदावार पर ध्यान दिया जा रहा है. इटली से मंगाए गए खास तरीके के हाई डेन्सिटी एपल प्लांट किसानों को मुहैया कराए जा रहे है साथ ही हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट किसानों को इन नए किस्म के सेब की पैदावार बढ़ाने के तरीके सीखा रहा है.

सोपोर के 'सेब' का इटली कनेक्शन!

अब तक जो किसान सेब के पेड़ लगाते है, वो करीब 9 साल में तैयार होते है और सेब के फल लगने में काफी वक्त लगता है. लेकिन सरकार ने इटली से हाई डेन्सिटी एपल प्लांट मंगाए. इटली वाले ये सेब के फल 2-3 साल में तैयार हो जाते है, जिससे किसानों की आमदनी 2-3 गुना बढ़ जाती है.

सोपोर में एशिया की सबसे बड़ी फल मंडी है. लेकिन साल में कई बार कभी मौसम और कभी आतंकी वारदातों की वजह से जम्मू से श्रीनगर हाइवे बन्द जिसके वजह से यहां के लोगों को कारोबार में कई नुकसान उठाना पढ़ता है.

सोपोर, बारामुला, पुलवामा, शोपियां और कुलगाम सेब उत्पादन के बड़े केंद्र हैं. दिसंबर की शुरुआत तक वादी से सेब निर्यात होता है और सेब की ये खेती कश्मीर में रोजगार का एक बड़ा जरिया है.

पेट पालने का सहारा है सेब

सेब की खेती कश्मीर का अहम कारोबार है. कश्मीर की 67% आबादी सेब की खेती पर निर्भर है, सेब की खेती से 33 लाख लोगों को रोजगार है. कश्मीर के 7 लाख किसान सेब की खेती करते हैं. हर साल कश्मीर में करीब 18 लाख टन सेब की पैदावार होती है.

सेब की खेती के बाद बेकरी भी जम्मू-कश्मीर के लोगों का अहम कारोबार है. कश्मीर में करीब 500 Trained bakers हैं. जम्मू-कश्मीर में करीब 3000 बेकरी तंदूर हैं. यहां तक कि सेना महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम (Women Empowerment Programe) के तहत महिलाओं को Bakery Trainning देती है, ताकी उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके.

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