राहुल गांधी का विरोध किया तो, MU के निदेशक को जबरन छुट्टी पर भेजा

महाराष्ट्र में थिएटर आर्टिस्ट और मुंबई विश्वविद्यालय के थिएटर विभाग के निदेशक योगेश सोमण को जरबन छुट्टी पर भेजने का मामला सामने आया है. और इसके पीछे की वजह ये है कि उन्होंने राहुल गांधी के विचारों का विरोध किया था.

राहुल गांधी का विरोध किया तो, MU के निदेशक को जबरन छुट्टी पर भेजा

नई दिल्ली: कांग्रेस हमेशा मोदी सरकार पर निशाना बनाने के लिए ज्यादातर एक ही वाक्य अभिव्यक्ति की आजादी का इस्तेमाल करती है. लेकिन खुद कांग्रेस अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ खड़ी दिखती है. कांग्रेस गठबंधन शासित राज्य महाराष्ट्र में ऐसा ही मामला सामने आया है. थिएटर आर्टिस्ट और मुंबई विश्वविद्यालय के थिएटर विभाग के निदेशक योगेश सोमण को सिर्फ इसलिए छुट्टी पर भेज दिया गया. क्योंकि उन्होंने राहुल गांधी के सावरकर वाले बयान को लेकर सोशल मीडिया पर अपना विरोध दर्ज कराया था.

राहुल का विरोध किया तो हो मिल गई छुट्टी

फिल्म उरी में मनोहर पर्रिकर का किरदार निभाने वाले योगेश सोमण एक थिएटर आर्टिस्ट हैं और मुंबई विश्वविद्यालय के अकादमी ऑफ थिएटर और ऑर्ट के डायरेक्टर भी हैं. सोमण को मुंबई विश्वविद्यालय ने जबरन छुट्टी पर भेज दिया है. वजह सिर्फ इतनी है कि सोमण ने अभिव्यक्ति की आजादी के तहत राहुल गांधी के बयान के विरोध में एक वीडियो शेयर किया था.

सोमण का वीडियो

प्रोफेसर सोमण ने पिछले महीने 14 दिसंबर को ट्वीट कर ये 51 सेकेंड का वीडिया शेयर किया था. योगेश ने राहुल गांधी पर ये हमला उनके सावरकर वाले बयान को लेकर दिया था, जिससे विवाद खड़ा हुआ था. 

इस वीडियो में उन्होंने कहा है कि, 'राहुल गांधी आपने कहा था कि आप वीर सावरकर नहीं हो, और आपको इस बात की कोई टेंशन भी नही हैं. ना त्याग, ना तेज, ना भाषा का तेज लेकिन मुझे लगता है कि आप गांधी ही नहीं हो, आपको इस बात की कोई टेंशन नहीं है. जैसा आपको मालूम हो कि आपकी दादी और फिरोज की शादी के बाद गांधी जी ने आपको ये नाम दिया. तो इस इतिहास के बारे में जानकारी रखो, मैं सावरकर पर दिए गए आपके बयान का विरोध करता हूं. सावरकर के सामने खड़ा होने की आपकी हैसियत नहीं है.

एनसीपी ने कार्रवाई को बताया जायज

प्रोफेसर योगेश सोमण पर कार्रवाई को महाराष्ट्र सरकार में सहयोगी एनसीपी ने जायज करार दिया. इतना ही नहीं इशारों में इशारों में NCP ने सरकारी अफसरों को चेतावनी भी दी है.

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सवाल है कि जो कांग्रेस अभिव्यक्ति की आज़ादी की दुहाई देती है, वो कांग्रेस प्रोफेसर को जबरन छुट्टी भेजने पर क्यों खामोश है? क्या किसी विश्वविद्यालय या सरकारी संस्था में काम करने वाले व्यक्ति को अपनी बात कहने का हक नहीं है?

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