क्या था एनएसए अजित डोवल का मकसद? क्यों गए थे कश्मीर

प्रधानमंत्री के खास और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवल अनुच्छेद 370 के हटने के बाद जम्मू-कश्मीर राज्य खासकर घाटी पर बहुत ही सतर्क निगाह रखे हुए हैं. इसके लिए वह जमीन पर आम लोगों के साथ बिरयानी खाने से लेकर हवाई सर्वेक्षण भी कर रहे हैं.

क्या था एनएसए अजित डोवल का मकसद? क्यों गए थे कश्मीर
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवल (File Photo)

नई दिल्ली: अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोवल कश्मीर में एक अलग अंदाज में नजर आए थे. खुलेआम कश्मीर के लोगों के साथ खाना खाते हुए. यह एक अलग ही तरह का नजारा था. आमतौर पर इस तरह का नजारा कम ही देखने को मिलता है. जिस पर देश की सुरक्षा का जिम्मा हो वह इस तरह खुलेआम घूमे. लेकिन यह सब एक रणनीति के तहत हुआ था.  

एक मास्टर प्लान था

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जिस भी जगह जाते हैं, उस यात्रा का कुछ न कुछ उद्देश्य जरूर होता है. दरअसल डोवल एक मास्टर प्लान के तहत श्रीनगर पहुंचे थे. यह केंद्र सरकार की रणनीति का हिस्सा था. इस प्लान में अनुच्छेद 370 पर लोगों का इनपुट लेना था कि वह इस मामले में क्या सोचते हैं. उनकी सरकार के प्रति क्या सोच है.

घाटी में मौजूद 100 आतंकी 

पीएम नरेंद्र मोदी हमेशा से कहते रहे हैं कि घाटी में एक भी आतंकी नहीं रहेगा. अजित डोवल के प्लान में यह भी प्रमुख रूप से था कि घाटी से एक भी आतंकी नहीं बचेगा. असल में पाकिस्तान समर्थित 100 से ज्यादा आतंकी घाटी में मौजूद हैं. जिनका सफाया किया जा जरूरी है. लिहाजा केंद्र सरकार ने डोवल को भेजकर रणनीति बनाने और आतंकियां का सफाया करने का आदेश दिया है. 

आतंकियों का सफाया जरूरी

जब तक घाटी से आतंकियों का सफाया नहीं किया जा सकता है, तब तक पूरी तरह से कश्मीर में शांति नहीं आ सकती, जिहाजा इसके मद्देनजर वहां खास रणनीति बनानी जरूरी है. पिछले दिनों ही सेनाध्यक्ष विपिन रावत ने खुलासा किया था कि 100 से ज्यादा आतंकी भारत की सीमा में प्रवेश कर गए हैं और किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने की तैयारी कर रहे हैं. 

खुफिया सूत्रों को सक्रिय करना

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवल कश्मीर जाकर स्थानीय स्तर पर अपने खुफिया सूत्रों को एक्टिव करना चाहते थे. इसके मद्देनजर डोवल ने सुरक्षा अधिकारियों और नौकरशाहों के साथ कई बैठकें भी कीं. गौरतलब है कि राज्य से अनुच्छेद 370 हटाने और जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में विभाजित करने के बाद दोनों केंद्र शासित क्षेत्र 30 अक्टूबर को अस्तित्व में आएंगे और उसी दिन दोनों क्षेत्रों के पहले उपराज्यपाल शपथ ग्रहण करेंगे.

हवाई सर्वेक्षण कर चुके हैं

पिछले दिनों सुरक्षा को देखते हुए कश्मीर घाटी में अजित डोवल हवाई सर्वेक्षण भी कर चुके हैं. उन्होंने कश्मीर शहर और दक्षिण कश्मीर के ऊपर लगातार उड़ान भरी और यह सुनिश्चित किया कि कहीं भी कोई अप्रिय घटना न हो.