Turkey Apache delay: तुर्की अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. भारत विरोधी हरकतें खुलकर सामने आ रही हैं. पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को आत्मघाती ड्रोन मुहैया कराना, उसके बाद उल जलूल बयानबाजी करने के बाद अपाचे हेलीकॉप्टर की डिलीवरी में अड़चन डालने की कोशिश की. जिसको लेकर भारत जैसा को तैसा के तहत जवाब देने की तैयारी में है. IDRW की रिपोर्ट के मुताबिक,भारत सरकार तुर्की के उन हथियारों के शिपमेंट के ट्रांजिट को रोक सकती है, जो बांग्लादेश और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों तक पहुंचते हैं. यह भारत की ओर से तुर्की को एक स्पष्ट संदेश होगा कि रक्षा सौदों में रुकावट डालने की उसकी नीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
भारत रोकेगा तुर्की का शिपमेंट ट्रांजिट?
तुर्की, जो लंबे समय से कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देता आया है, अब भारत के महत्वपूर्ण रक्षा सौदों में भी खुद को उलझा रहा है. खबरों के मुताबिक, तुर्की ने भारत को मिलने वाले अपाचे हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी में अड़ंगा डाला है. इसके जवाब में, भारत सरकार अब अपनी 'टिट-फॉर-टैट' की नीति के तहत एक्शन लेने का मन बना रही है.
आपको बता दें, भारत, तुर्की के हथियारों को एयरस्पेस और समुद्री रूट से बांग्लादेश, मलेशिया या इंडोनेशिया जैसे देशों तक पहुंचने के लिए एक जरूरी ट्रांजिट पॉइंट है. भारत, अब तुर्की के हथियारों के ट्रांजिट को रोक सकता है या उसे बेहद मुश्किल बना सकता है.
तुर्की ने अपाचे में क्या रुकावट डाली?
तुर्की की भूमिका अपाचे हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी में अप्रत्यक्ष रूप से सामने आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपाचे हेलीकॉप्टरों में तुर्की में बने कुछ पुर्जे या सब-सिस्टम इस्तेमाल होते हैं. तुर्की सरकार ने इन पुर्जों के निर्यात पर जानबूझकर देरी की या उन्हें रोकने की कोशिश की, जिससे हेलीकॉप्टरों की फाइनल डिलीवरी में रुकावट आई.
भारत के संभावित जवाबी एक्शन का असर
भारत का जवाबी एक्शन तुर्की की अर्थव्यवस्था और रक्षा बिक्री पर सीधा असर डालेगा. अगर भारत, तुर्की के हथियारों का ट्रांजिट रोकता है, तो तुर्की को अपने ग्राहकों तक सामान पहुंचाने के लिए लंबे, महंगे और जटिल समुद्री रूट का इस्तेमाल करना पड़ेगा. इससे तुर्की का निर्यात बाजार प्रभावित होगा. इतना ही नहीं, तुर्की के इन देशों के साथ अच्छे रक्षा संबंध हैं. ट्रांजिट रुकने से इन देशों को समय पर हथियार मिलने में देरी हो सकती है.
कुल मिलाकर, भारत का यह 'जैसे को तैसा' वाला फैसला बताता है कि भारत अब अपनी रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में किसी भी बाहरी देश की दखलंदाजी को सहन नहीं करेगा और अपने हितों की रक्षा के लिए हर संभव एक्शन लेगा.
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