छोटा राजनः मुंबई बम धमाके के बाद दाऊद से हो गया था 36 का आंकड़ा, दोनों बन गए थे जानी दुश्मन

राजन (Chhota Rajan) का जन्म महाराष्ट्र के मुंबई शहर के चेम्बूर इलाके के तिलकनगर में मराठी बुद्धिस्ट परिवार में हुआ था. अपने प्रारंभिक दिनों में वे सिनेमा टिकट बेचा करते थे और यही से 1980 में सिनेमा टिकटों की कालाबाजारी कर उसने अपने क्रिमिनल करियर की शुरुआत की थी.

Written by - Navin Chauhan | Last Updated : May 7, 2021, 05:57 PM IST
  • मुंबई के चेम्बूर में सिनेमा टिकट को ब्लैक में बेचता था छोटा राजन
  • 26 अक्टूबर 2015 को राजन को बाली में पकड़कर भारत लाया गया
छोटा राजनः मुंबई बम धमाके के बाद दाऊद से हो गया था 36 का आंकड़ा, दोनों बन गए थे जानी दुश्मन

नई दिल्लीः अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन (Chhota Rajan) की मौत की खबर अफवाह निकली. शुक्रवार दोपहर सामने आया कि दिल्ली के AIIMS अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी. हालांकि  AIIMS ने साफ किया कि छोटा राजन अभी जीवित है और उसका इलाज जारी है. कोरोना (Coronavirus) से संक्रमित छोटा राजन का पिछले कुछ दिनों से तिहाड़ जेल में ही इलाज चल रहा था. तबीयत बिगड़ने पर जेल प्रशासन ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया था. 

मौत की अफवाह उड़ने के बाद छोटा राजन का आपराधिक जीवन एक बार फिर से चर्चा में है. उसके क्रिमिनल करियर पर डालते हैं एक नजर

ऐसे हुई क्रिमिनल करियर की शुरुआत
राजन (Chhota Rajan) का जन्म महाराष्ट्र के मुंबई शहर के चेम्बूर इलाके के तिलकनगर में मराठी बुद्धिस्ट परिवार में हुआ था.

अपने प्रारंभिक दिनों में वे सिनेमा टिकट बेचा करते थे और यही से 1980 में सिनेमा टिकटों की कालाबाजारी कर उसने अपने क्रिमिनल करियर की शुरुआत की थी.

बड़ा राजन की गैंग में हुआ शामिल
इसके बाद वह बड़ा राजन और हैदराबाद के यादगिरी से मिला, तिलकनगर में रहते हुए, मुंबई के चेम्बूर में कम आय वाले लोगो के समूह में राजन (Chhota Rajan) सहकार सिनेमा में सिनेमा टिकट को ब्लैक में बेचता था. पुलिस कांस्टेबल पर हमला करने के आरोप के बाद जेल से रिहा होने के बाद 1982 में वह बड़ा राजन की गैंग में शामिल हो गया. 

जब बड़ा राजन को मार दिया गया, तब गैंग का पूरा कारोबार छोटा राजन ने अपने हात में ले लिया और मुंबई में रहते हुए दुबई भाग चुके दावूद इब्राहीम के लिए काम करता था.

पापा गवली की हो गई हत्या
गवली के बड़े भाई पापा गवली की एक ड्रग डील में हत्या कर दी गई और इससे इनके बीच दरार भी पड़ गई. इसके बाद राजन (Chhota Rajan) दुबई चला गया, जबकि उसका परिवार तब भी मुंबई में ही रह रहा था. इसके बाद वो कभी लौटकर वापिस नही आया. 1993 में हुई मुंबई बमबारी के बाद दाउद और छोटा राजन दोनों ही भारत से फरार हो चुके थे. 

सितम्बर 2000 राजन पर हुआ हमला
इसके बाद दाउद के मुंबई अंडरवर्ल्ड में स्थापित नेटवर्क को लेकर पुलिस में काफी रिसर्च भी किया और रिपोर्ट्स भी बनवाई. लेकिन अंत में दाउद-राजन की जोड़ी का अंत हो ही गया,

जब सितम्बर 2000 में शकील ने राजन (Chhota Rajan) के बैंकाक होटल रूम में उसपर हमला किया था. जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया और उसके पेट की एक महत्वपूर्ण आंत को खासा नुकसान पहुंचा.

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26 अक्टूबर 2015 को बाली में पकड़ा गया
26 अक्टूबर 2015 को राजन (Chhota Rajan) को बाली में पकड़ा गया. ऑस्ट्रेलियाई पुलिस से आगाह किए जाने के बाद ही इन्डोनेशियाई अधिकारियो ने निकल्जे उर्फ़ छोटा राजन को सिडनी से बाली आते समय पकड़ लिया था.

उस समय सीबीआई डायरेक्टर अनिल सिन्हा ने उनकी गिरफ़्तारी पर कहा था की, “सीबीआई की इंटरपोल द्वारा की गयी प्रार्थना के बाद बाली पुलिस ने छोटा राजन को गिरफ्तार कर लिया.”भारत लाए जाने के बाद भी सुरक्षा कारणों के चलते उसे मुंबई की जेलों में नहीं रखा गया क्योंकि आशंका थी कि दाऊद समर्थित ग्रुप उसके खिलाफ षड्यंत्र रच सकते हैं और मुंबई की जेल में उस पर हमला हो सकता है. 

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खास बातें
छोटा राजन (Chhota Rajan) की तीन बेटियां हैं: अंकिता निकल्जे, निकिता निकल्जे और ख़ुशी निकल्जे. उसका छोटा भाई दीपक निकल्जे, एमपी. रामदास आठवले की रिपब्लिकन पार्टी से जुड़ा हुआ था.

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छोटा राजन (Chhota Rajan) को उनके दोस्त और साथी “नाना” कहकर बुलाते थे.

कहा जाता है की राजन (Chhota Rajan) सामाजिक संस्था “सह्याद्री क्रीडा मंडल” को आर्थिक सहायता भी करता था, यह संस्था हर साल तिलकनगर में गणेश उत्सव का आयोजन करती थी

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