CAA पर UNHRC पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, भारत की कड़ी प्रतिक्रिया

भारत का शुरू से कहना है कि नागरिकता संशोधन कानून पूर्णतया भारत का आंतरिक मामला है लेकिन विपक्ष के फैलाए भ्रमजाल और गुमराह करने वाले बयानों ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भारत पर सवाल खड़े करने का मौका दे दिया.

CAA पर UNHRC पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, भारत की कड़ी प्रतिक्रिया

दिल्ली: नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने भारत के सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. यह जानकारी UNHRC के उच्चायुक्त ने भारत को दी है. आपको बता दें कि भारत के आंतरिक मामले में UNHRC का ये हस्तक्षेप है. इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने जवाब दिया कि कोई भी विदेशी पार्टी भारत के आंतरिक मामले में इस तरह हस्तक्षेप नहीं कर सकती है.

CAA भारत का एक आंतरिक मसला

केंद्रीय विदेश मंत्रालय की ओर से मंगलवार को एक बयान जारी किया गया. बयान में लिखा गया है कि जेनेवा में मौजूद हमारे मिशन को सोमवार को जानकारी मिली है कि संयुक्त राष्ट्र के ह्यूमन राइट्स कमिश्नर की ओर से सुप्रीम कोर्ट में नागरिकता संशोधन एक्ट के मसले पर एक याचिका दायर की गई है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, ‘नागरिकता संशोधन एक्ट भारत का एक आंतरिक मसला है और भारतीय संसद को इस कानून को बनाने की ताकत है. 

जानिये स्पष्टीकरण के बाद भी क्यों है CAA पर भ्रम?

अमित शाह ने 21 जनवरी को लखनऊ में कहा था कि 'मैं लखनऊ की धरती से यह घोषणा करता हूं कि जिसे सीएए का विरोध करना है, करते रहे, ये सिटीजन बिल किसी भी कीमत पर अब वापस नहीं होगा. कांग्रेस, ममता बनर्जी, अखिलेश, मायावती और अरविंद केजरीवाल सभी इस बिल के खिलाफ भ्रम फैला रहे हैं'. प्रधानमंत्री और गृहमंत्री जैसे देश के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग जब ये बोलते हैं कि CAA किसी के खिलाफ नहीं है. इससे किसी की नागरिकता नहीं जा रही है. यह किसी मजहब के खिलाफ नहीं है. 

लोगों को गुमराह कर रहे विपक्षी नेता

कांग्रेस नेताओं के 'आर या पार' के ऐलान और 'डरो मत कांग्रेस आपके साथ है' जैसे बयानों से उत्साहित होकर दिल्ली की कई हिस्सों में शाहीन बाग की तर्ज पर सड़क जाम करके धरना प्रदर्शन करने की प्रयोग शुरु हो गया था. जाफराबाद में मेट्रो और सड़कें घेर ली गई थीं. आम आदमी पार्टी ने उस शाहीन बाग के प्रदर्शन का समर्थन किया जहां भारत को तोड़ने की बातें होती हैं. ये सब देखकर पूरे देश में भारत की छवि बदनाम करने के लिये विपक्ष के लोग ऐसे विवादित बयान देते हैं.

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