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पोषण से खाली है किशोरों की थालीः यूनिसेफ

बीते कुछ सालों में जंक फूड खाने का प्रचलन तेजी से बढ़ा है. ऐसे में बच्चों-किशोरों में जरूरी विटामिन व खनिज पोषक तत्व कम होते जा रहे हैं. हरी पत्तेदार सब्जियां भी न खाने से उनमें आयरन की कमी हो रही है. इसके कारण किशोरों में एनीमिया का असर देखा जा रहा है.

पोषण से खाली है किशोरों की थालीः यूनिसेफ

नई दिल्लीः दैनिक आहार में बच्चों को पोषक तत्व देने के मामले में भारत लगातार पिछड़ता जा रहा है. यूनिसेफ ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में 80 फीसद से अधिक किशोर कम पोषक तत्वों वाले आहार ले रहे हैं. उनके भोजन में आयरन, फोलेट, जिंक, विटामिन ए, बी-12 और विटामिन डी जैसे पोषक तत्वों की कमी है.

यूनिसेफ की रिपोर्ट हाल में जारी किए गए कॉम्प्रेहेंसिव नेशनल न्यूट्रिशन सर्वे पर आधारित है. यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरिटा फोरे ने कहा कि यूनिसेफ के दृष्टिकोण से, हम किशोरों और किशोरियों के आहार, व्यवहार और सेवाओं में हस्तक्षेप की अपील करते हैं. जो इस खराब पोषण के चक्र को तोड़ सकने में मददगार होगा. इसके पीछे की वजह यह है कि 25 प्रतिशत से अधिक किशोर और किशोरियां सप्ताह में एक बार भी हरी पत्तेदार सब्जियां नहीं खाते हैं. दूध के उत्पादों का सेवन भी सिर्फ 50 फीसदी किशोर ही रोज कर पाते हैं.

क्यों आया है यह फर्क ?

दरअसल, बीते कुछ सालों में जंक और तैयार फूड खाने का प्रचलन अधिक हुआ है. ऐसे में खान-पान की विभिन्नता तो रहती है, लेकिन अधिक तले और भुने होने के कारण पोषक तत्व उनमें बिल्कुल नहीं रह जाते हैं. एक सर्वे के मुताबिक आय बढ़ने पर खाने पर अधिक पैसा खर्च किया जाने लगा है. इसमें अधिकतर तले भोजन व मिठाइयां खाईं जाती हैं. इससे तकरीबन 40 प्रतिशत लड़कियां एनीमिया यानी की खून की कमी से ग्रस्त हैं, वहीं 18 प्रतिशत लड़कों भी खून की कमी के शिकार हैं. लड़कियों में एनीमिया होना उनके सेहत पर अधिक असर डालता है.

ऐसे बदला जा सकता है माहौल

यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक ने सुझाव दिया कि इसके लिए स्कूलों में ही जरूरी कदम उठाने की जरूरत है. दरअसल किशोर उम्र मे अधिक समय यहीं बीतता है. उन्होंने कहा कि मिड-डे मील की तरह ही कई अन्य पौष्टिक भोजन का बच्चों में वितरण किया जा सके तो बच्चों को कुपोषण से बचाया जा सकता है. उन्होंने सुझाया कि हमें पोषण, आहार और कृषि में विशेषज्ञता के लिए शिक्षाविदों के साथ काम करना चाहिए. इसके अलावा निजी क्षेत्र के लोगों से भी इस क्षेत्र में निवेश के लिए कहा जा सकता है. इस बारे में नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा है कि कुपोषण से निपटने के लिए व्यवहार परिवर्तन बहुत महत्वपूर्ण है. पोषण अभियान के जरिये कुपोषण से निपटने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं.