उत्तराखंडः PM Modi की देहरादून रैली से पहले सीएम धामी का बड़ा ऐलान, भंग होगा देवस्थानम बोर्ड

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार ने चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड बिल को वापस लेने का फैसला किया है. यह फैसला पीएम मोदी की 4 दिसंबर को होने वाली देहरादून रैली से पहले लिया गया है. 

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Nov 30, 2021, 12:27 PM IST
  • देवस्थानम बोर्ड को लेकर तीर्थ पुरोहितों में थी भारी नाराजगी
  • CM धामी ने पलटा पूर्ववर्ती त्रिवेंद्र सरकार के समय का फैसला

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उत्तराखंडः PM Modi की देहरादून रैली से पहले सीएम धामी का बड़ा ऐलान, भंग होगा देवस्थानम बोर्ड

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराखंड दौरे से पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवस्थानम बोर्ड भंग करने का ऐलान किया है.

उन्होंने मंगलवार को पूर्ववर्ती त्रिवेंद्र सरकार के चारधाम देवस्थानम बोर्ड के फैसले को पलट दिया. 

तीर्थ पुरोहितों की नाराजगी दूर करने की कोशिश
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार ने चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड बिल को वापस लेने का फैसला किया है. यह फैसला पीएम मोदी की 4 दिसंबर को होने वाली देहरादून रैली से पहले लिया गया है. उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने तीर्थ पुरोहितों की नाराजगी को दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया.   

बता दें कि इससे पहले देवस्थानम बोर्ड को लेकर उत्तराखंड सरकार की तरफ से बनाई गई उच्चस्तरीय समिति ने सीएम पुष्कर सिंह धामी और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. इसके बाद से देवस्थानम बोर्ड को भंग करने का अनुमान लगाया जा रहा था. 

केंद्रीय राज्य मंत्री ने भी दिया था संकेत
वहीं, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट ने भी कहा था कि देवस्थानम बोर्ड को लेकर तीर्थ पुरोहित चिंता न करें. देवस्थानम बोर्ड को लेकर प्रदेश सरकार काफी गंभीर है. उम्मीद नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि इस मामले का निपटारा हो जाएगा.

नवंबर 2019 में बनाया गया था देवस्थानम बोर्ड
गौरतलब है कि नवंबर 2019 में तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चारधाम समेत 51 मंदिरों को श्राइन बोर्ड की तर्ज पर देवस्थानम बोर्ड के अधीन कर दिया था. जिन मंदिरों को देवस्थानम बोर्ड के अधीन कर दिया गया, उनके तीर्थ पुरोहितों और हक हकूकधारियों ने आरोप लगाया था कि उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया. 

इसे लेकर चारों धाम के तीर्थ पुरोहित और हकहकूकधारी बेहद नाराज थे. वे लगातार आंदोलन कर सरकार पर दबाव बना रहे थे. त्रिवेंद्र सिंह रावत के सत्ता से हटने के बाद भी ये मुद्दा गर्म रहा. बाद में पुष्कर सिंह धामी ने सीएम बनने के बाद इस मुद्दे पर पूर्व सांसद मनोहर कांत ध्यानी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमिटी का गठन किया था. 

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