तो इस वजह से बागी तेवर में हैं सिंधिया, यहां पढ़िए असली वजह

कांग्रेस महासचिव और वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया जबदस्त बागी तेवर में दिखाई दे रहे हैं. हालात इतने बदतर हो गए हैं कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद सिंधिया ने सड़क पर उतर कर विरोध करने की धमकी दी है. लेकिन इसके पीछे एक खास वजह है.  

तो इस वजह से बागी तेवर में हैं सिंधिया, यहां पढ़िए असली वजह

भोपाल: ज्योतिरादित्य सिंधिया के बागी तेवर देखकर मध्य प्रदेश कांग्रेस में खलबली मची हुई है. उन्होंने खुल्लमखुल्ला अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री कमलनाथ के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और जनता के किए गए वादों के नाम पर सड़क पर उतरने का ऐलान कर दिया है.

ग्वालियर में सिंधिया ने ठोंकी ताल
कांग्रेस महासचिव जैसे अहम पद पर बैठे ज्योतिरादित्य सिंधिया का मुख्यमंत्री कमलनाथ पर प्रहार भोपाल से लेकर दिल्ली तक सुर्खियां बटोर रहा है. सिंधिया ने ग्वालियर में यहां तक कह दिया कि 'मैं जनता का सेवक हूं, जनता के मुद्दों के लिए लड़ना मेरा धर्म है. सिंधिया ने कहा कि हमें सब्र रखना है और अगर जिन मुद्दों को हमने अपने वचनपत्र में रखा है, उनको हमें पूरा करना ही होगा. अगर नहीं होगा तो हमें सड़क पर उतरना होगा'.

सिंधिया के साथ आने के लिए तैयार हैं कई विधायक
सिंधिया के साथ मुख्यमंत्री कमलनाथ से नाराज कई विधायक आ गए हैं. इसमें सत्ता और प्रतिपक्ष के कई विधायक शामिल हैं. मध्य प्रदेश की महिला बाल विकास मंत्री और सिंधिया की कट्टर समर्थक मानी जाने वाली इमरती देवी ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो कांग्रेस का हर कार्यकर्ता सड़क पर उतरेगा.
 
उधर इंदौर के क्षेत्र क्रमांक दो से से भाजपा विधायक रमेश मेंदोला ने भी ज्योतिरादित्य सिंधिया को पत्र लिखकर उनके प्रति सहानुभूति जताते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ के व्यवहार की आलोचना की है.  मेंदोला ने पत्र में लिखा कि 'कांग्रेस का वचनपत्र याद दिलाने पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सार्वजनिक तौर पर आपके साथ जो व्यवहार किया वो दुखद और पीड़ादायी है.  उससे आपकी पीड़ा की अंदाजा लगाया जा सकता है'.

मामला टाल रहे हैं कमलनाथ
उधर कांग्रेस के बेहद शातिर माने जाने वाले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सिंधिया के साथ तकरार को टालने का फैसला किया है. वह बार बार मामला कांग्रेस आलाकमान पर डाल रहे हैं. उन्होंने बयान दिया है कि 'संगठन में बदलाव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति हमारी नेता सोनिया गांधी ही करेंगी.'
लेकिन कमलनाथ की इन शातिर चालों से सिंधिया और भड़क रहे हैं.

सिंधिया कर रहे हैं दबाव की राजनीति
दरअसल सिंधिया मध्य प्रदेश की राजनीति में अहम भूमिका चाहते हैं. वह खुलकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनने की अपनी ख्वाहिश का इजहार कर चुके हैं. लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ उनकी दाल नहीं गलने दे रहे हैं. इसलिए सिंधिया और कमलनाथ में ठनी हुई है.

राज्यसभा सीट पर भी नजर
इसके अलावा 9 अप्रैल को मध्य प्रदेश के कोटे से राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं. वर्तमान विधानसभा में विधायकों की संख्या के हिसाब से दो सीटें कांग्रेस के खाते में जबकि एक सीट भाजपा के खाते में जाएगी.
ऐसे में सिंधिया की नजर राज्यसभा सीट पर भी है. मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट पर वह अपनी स्वाभाविक दावेदारी मानते हैं. इसलिए राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले सिंधिया मध्य प्रदेश में दबाव की राजनीति शुरु कर चुके हैं. सिंधिया को उम्मीद है कि कांग्रेस आलाकमान उन्हें संतुष्ट करने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष या फिर राज्यसभा की सीट में से कोई एक रेवड़ी थमा देगा.

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