MSP पर आखिर क्या बवाल है? अब तो सरकार ने 'ये' भी कह दिया..

सरकार और किसान संगठनों की बातचीत में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने MSP की गारंटी के लिए कानून बनाने की मांग की. सरकार ने पहले ही MSP पर भरोसा दिया है, लेकिन क्या आपको ये पता है कि MSP क्या है और इसे लेकर असल विवाद क्या है?

MSP पर आखिर क्या बवाल है? अब तो सरकार ने 'ये' भी कह दिया..

नई दिल्ली: क्या आप ये जानते हैं कि MSP को लेकर किसानों की परेशानी क्या है? आखिरकार MSP पर असल विवाद क्या है? सरकार और किसानों के बीच चौथे राउंड की वार्ता चल रही है. इस बैठक में 40 संगठनों के किसान नेता शामिल हुए हैं. लेकिन बैठक में एक अनोखी बात देखने को मिली. दरअसल, किसानों ने किसान भवन में बातचीत के दौरान अपना खाना साथ लेकर आए और उन्होंने अपना भोजन ही ग्रहण किया.

MSP की गारंटी के लिए कानून?

सरकार और किसानों के बीच चौथे राउंड की बातचीत चल रही है. बैठक में 40 संगठनों के किसान नेता शामिल हुए हैं. कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर (Narendra Tomar) ने हल निकलने की उम्मीद जताई है. सरकार और किसान संगठनों की बातचीत में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने MSP की गारंटी के लिए कानून बनाने की मांग की. सरकार ने पहले ही MSP पर भरोसा दिया है. आपको सबसे पहले ये समझना चाहिए कि MSP कैसे तय होता है?

MSP कैसे तय होता है?

- मांग और आपूर्ति
उत्पादन की लागत
घरेलू और अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार में क्या कीमत
ग्राहकों पर उसका कितना असर
दूसरे फसलों की क्या कीमत
भंडारण, टैक्स और दूसरे ख़र्च

MSP उत्पाद की मांग और आपूर्ति के आधार पर, उत्पादन की लागत पर तय किया जाता है. MSP का एक सांचा इसके आधार पर भी तय किया जाता है कि घरेलू और अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार में क्या कीमत है? ग्राहकों पर उसका कितना असर होगा? दूसरे फसलों की क्या कीमत है? इसके अलावा भंडारण, टैक्स और दूसरे ख़र्च को देखते हुए MSP तय किया जाता है. यहां सबसे जरूरी बात तो आपको ये समझनी चाहिए कि आखिर ये MSP चीज क्या है?

MSP क्या है?

MSP का पूरा नाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) होता है. जो फसल की एक लागत तय करने का तरीका होता है. सरकार फसलों की एक कीमत तय करती है. किसानों को MSP से कम कीमत नहीं मिलता है. दाम घटने पर भी किसानों के लिए कीमत तय होती है. किसानों को एक तय कीमत मिलने की गारंटी होती है. हर साल के लिए सरकार MSP तय करती है.

दरअसल, सरकार और किसान संगठनों की बातचीत में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने MSP की गारंटी के लिए कानून बनाने की मांग की है. लेकिन किसान आंदोलन ZEE मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सोम प्रकाश (Som Prakash) ने बड़ा बयान देते हुए ये तक कह दिया है कि MSP पर लिखित में देने को तैयार है, लेकिन कानून रद्द नहीं होगा. अब आपको यहां ये समझना जरूरी हो जाता है कि MSP पर किसानों को किस बात का डर सता रहा है?

MSP पर किसानों का क्या डर?

धीरे-धीरे MSP खरीद बंद हो जाएगी
कई कमेटियों की सरकारी खरीद घटाने की सिफारिशें
सरकारी खरीद घटने पर MSP खरीद बंद होने का डर
खरीद के लिए निजी कंपनियों पर निर्भरता बढ़ेगी
निजी कंपनियां मनमाने कीमत पर फसल खरीदेंगी
खुले बाज़ार में कम कीमत पर फसल बेचना होगा

उपर दी जानकारी से आप ये समझ सकते हैं कि किसानों को आखिर किस बात की परेशानी है. उन्हें ऐसा लगता है कि धीरे-धीरे MSP खरीद बंद हो जाएगी. लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है ये सरकार के रुख से समझा जा सकता है. किसानों को लगता है कि सरकार MSP को खत्म कर देगी, लेकिन जब सरकार ने ये साफ कर दिया है कि MSP पर इस कानून का कोई असर नहीं पड़ेगा. कानून में भी इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि MSP पर सरकार कोई बदलाव करने वाली है, तो भला किसानों के ज़ेहन इस झूठ के ज़हर को किसने घोला?

सियासी पार्टियों की असलियत का अंदाजा आप किसान आंदोलन पर हो रही राजनीति से लगा सकते हैं. किसानों को मोहरा बनाकर किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की कोशिश की जा रही है. खुद पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस बात पर चिंता जाहिर की है कि किसान आंदोलन से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है. ऐसे में इस बात को भली भांति समझा जा सकता है कि किसान आंदोलन की आड़ में कुछ न कुछ गंदी करतूत को अंजान देने की तैयारी है. जब किसानों की चिंता इस बात पर है कि सरकार ऐसा कर सकती है, लेकिन सरकार भी ये कह रही है कि वो ऐसा कुछ नहीं करने वाली है. मतलब साफ है कि सरकार विरोधी तत्व इस अफवाह को फैला कर किसानों के कंधे से बंदूक चलाना चाहते हैं.

फिर घिर गई है राजधानी दिल्ली

दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों ने जाम लगा दिया है. गाजीपुर बॉर्डर पर मेरठ जाने वाली रोड को बंद कर दिया है. आंदोलनकारी किसानों ने अपनी मांग दोहराई है. उनका कहना है कि नये कानून वापस लेने तक आंदोलन जारी रहेगा. बीच का कोई रास्ता नहीं है, मांग माने जाने तक पीछे नहीं हटेंगे. पंजाब से सोनीपत के कुंडली बॉडर पर नगाड़ा पहुंच गया है. सोनीपत के ओचंदी बॉर्डर पर कई भारी वाहन फंसे हैं. गाड़ी चालकों की दिल्ली सरकार से मांग है कि खाने पीने के लिए पैसे नहीं है, "मदद करे दिल्ली सरकार.." चारो तरफ से राजधानी दिल्ली को बंधक बना लिया गया है.

ये हालात बिल्कुल वैसी ही शुरुआत है, जब नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पर ब्रेक लगा दिया था. उस प्रदर्शन की आड़ में देश विरोधी साजिशों को अंजाम दिया गया था. दिनदहाड़े पुलिसवाले की हत्या कर दी गई. IB ऑफिसर को मार डाला गया, IPS अधिकारियों पर जानलेवा हमला किया गया. खुलेआम शहरुख जैसे दंगाइयों ने फायरिंग की, पेट्रोल बम से हमले किए. उस वक्त भी शाहीन बाग से आंदोलन शुरू हुआ, जिसकी आग पूरे देश में भड़क गई थी और जिसकी आड़ में दंगाइयों ने देश को आग में झोंकने का प्रयास किया.

शायद यही वजह है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सुरक्षा पर चिंता जाहिर की है. आंदोलन में कई खालिस्तानी समर्थक देखे गए हैं, कई लोगों की जुबान से ये समझा जा सकता देश का किसान ऐसी गंदी बातें नहीं कर सकता है. एक किसान अपनी मेहनत से लोगों का पेट भरता है, वो ये कभी नहीं कह सकता है कि "इंदिरा ठोक दी, ये मोदी की छाती..." 

ऐसी जुबान किसी किसान भाई की तो नहीं हो सकती है. ऐसे में किसान आंदोलन की भीड़ में ये कौन छिपा हुआ है, जो देश जलाने की साजिश को अंजाम देने की फिराक में है. ये बहुत जरूरी है कि किसानों के आंदोलन का जल्द से जल्द समाधान किया जाए, वरना इस आंदोलन का बेहद भयानक फायदा उठाया जा सकता है.

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