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भारत में हुए श्रम सुधार निवेशकों को कर रहे हैं आकर्षित

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कुछ दिनों पहले काम की जगह पर श्रमिकों को शारीरिक क्षति से बचाव, स्वास्थ्य और कार्य की दशाओं से जुड़े 13 केंद्रीय श्रम कानूनों को मिलाकर एक संहिता बनाने से जुड़े विधेयक को मंजूरी दी थी. इसकी बदौलत मजदूरों को उनकी सुरक्षा से जुड़े अधिकार मिले. अब मजदूरों के हित में नियम बनने से व्यापार व उद्योगों के लिए श्रमिक वर्ग की उपलब्धता में बढ़ोतरी हुई है. इससे देश में विदेशी निवेश बढ़ा है.

भारत में हुए श्रम सुधार निवेशकों को कर रहे हैं आकर्षित

नई दिल्लीः तीन दिन की थाइलैंड यात्रा में प्रधानमंत्री मोदी ने इस समय भारत में व्यापार करने के लिए सबसे सुगम बताया. उन्होंने बैंकाक में निवेशकों के एक कार्यक्रम में कहा कि भारत में इस समय निवेश करने के लिए सबसे सही समय है. उन्होंने कराधान में सुधारों की बात की और कहा कि हम व्यापार के लिए एक विकसित प्रणाली का इस्तेमाल कर रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी की इस बात के पीछे का तर्क है पिछले दिनों भारत में हुआ श्रम सुधार. जिसके तहत भारत में नई वेतन सहिंता यानी वेज कोड को मंजूरी दी गई थी. आइए जानते हैं कैसे यह निवेशकों को आकर्षित कर रहा है.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कुछ दिनों पहले काम की जगह पर श्रमिकों को शारीरिक क्षति से बचाव, स्वास्थ्य और कार्य की दशाओं से जुड़े 13 केंद्रीय श्रम कानूनों को मिलाकर एक संहिता बनाने से जुड़े विधेयक को मंजूरी दी थी. इसकी बदौलत मजदूरों को उनकी सुरक्षा से जुड़े अधिकार मिले. 10 अगस्त 2017 को यह विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था. इसके बाद 21 अगस्त 2017 तो यह बिल संसद की स्टैंडिंग कमेटी को भेज दिया गया था. कमेटी ने 18 दिसंबर 2018 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. 16 विधानसभा के भंग होने के कारण यह विधेयक पास नहीं हो सका था. इस विधेयक में वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक सुरक्षा व कल्याण के साथ ही औद्योगिक संबंध पर आधारित चार संहिताओं से तैयार किया गया है. 

क्या है इसमें खास
चार श्रम संहिताओं से मिलकर बना यह विधेयक 44 पुराने श्रम कानूनों की जगह लेगा. इनमें मजदूरी भुगतान अधिनियम 1936, न्यूनतम मजदूरी कानून 1948, बोनस भुगतान कानून 1965 और समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 शामिल होंगे. इस विधेयक के आधार पर केंद्र सरकार को कुछ विशेष सेक्टर के लिए सभी लोगों को न्यूनतम समान वेतन देने का अधिकार है. इसमें रेलवे और खनन सेक्टर प्रमुख हैं. अन्य प्रकार की श्रेणी के लिए वेतनमान तय करने के लिए राज्य स्वतंत्र होंगे. इस विधेयक के जरिए एक राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी तय हो सकेगी. इसके अलावा केंद्र सरकार विभिन्न क्षेत्रों और राज्यों के लिए न्यूनतम मजदूरी तय करेगी. विधेयक में प्रावधान है कि हर पांच साल बाद न्यूनतम वेतन में बदलाव किया जाएगा.

ऐसे होगा लाभ
दरअसल अभी तक नियोक्ताओं को सबसे अधिक मुश्किल श्रमिकों के चयन में होती थी. नीतियां न होने के कारण श्रमिक अपना पूरा श्रम तो देते थे लेकिन उनकी सुरक्षा, भुगतान, मजदूरी नियमित नहीं थी. ऐसे में काम में देरी बहुत होती थी और विदेशी निवेशक मुख्यतः इसी लेटलतीफी के कारण निवेश से हिचकते थे. अब मजदूरों के हित में नियम बनने से व्यापार व उद्योगों के लिए श्रमिक वर्ग की उपलब्धता में बढ़ोतरी हुई है. संहिता के तहत यदि कोई नियोक्ता तय मजदूरी से कम का भुगतान करता है तो उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा. यदि वह पांच साल के दौरान दोबारा ऐसा करता है तो उसे 3 माह तक का कारावास और 1 लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है.