वामपंथियों की राह पर चलकर, क्या ममता 'दीदी' उसी तरह हो जाएंगी खत्म?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दोहरे चरित्र का खुलासा हो चुका है. और ये खुलासा उनकी ही एक किताब के माध्यम से हुआ है. साल 2006 में दीदी ने खुद घुसपैठियों का खुलकर विरोध किया था. लेकिन आज वो लेफ्ट की राह पर चलने लगीं.

वामपंथियों की राह पर चलकर, क्या ममता 'दीदी' उसी तरह हो जाएंगी खत्म?

नई दिल्ली: घुसपैठियों पर ममता बनर्जी की पोल खुल गई है. ममता बनर्जी आज जिस CAA के विरोध में बोल रही हैं. उस कानून के खिलाफ उनकी हमेशा से ये राय नहीं थी. जिसका जिक्र उन्होंने अपनी ही लिखी एक किताब में किया है.

दीदी की किताब ने ही खोल दी उनकी पोल

आज जो ममता बनर्जी CAA और NRC के खिलाफ खड़ी हैं और इसके विरोध की सबसे बड़ी आवाज हैं क्या आप मानेंगे कि वो वक्त बहुत पहले का नहीं है जब दीदी ने 2006 में एक किताब लिखी और उसमें लिखा कि कैसे बांग्लादेश से गैरकानूनी तरीके से आ रहे लोग राज्य ही नहीं देश के लिए बड़ी मुसीबत हैं. 'स्लॉटर ऑफ डेमोक्रेसी' किताब में ममता ने खुद इसका जिक्र किया है. स्लॉटर ऑफ डेमोक्रेसी के पेज 45 में ममता लिखती हैं.

घुसपैठियों पर ममता का दोहरा चरित्र

2006 में ममता बनर्जी ने अपनी किताब लिखी थी इस किताब में जो कुछ लिखा है उससे ममता बनर्जी के दोहरे चरित्र का पूरा सच सामने आ जाता है. 

"बड़ी संख्या में घुसपैठ पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती ज़िलों में हर दिन की बात है, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के आस-पास के ज़िलों में बड़ी संख्या में मतदाता दोहरी मतदान सुविधाओं का इस्तमाल कर रहे हैं, जो निश्चित रूप से सत्तारूढ़ पार्टी CPI (M) के उम्मीदवारों की संभावना के पक्ष में प्रभाव डालते हैं"

तो क्या वोटबैंक के चक्कर में फंस गई हैं ममता बनर्जी

उस वक्त ममता बनर्जी ने लेफ्ट पर वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया था. लेकिन दीदी की राजनीति आज उसी ढर्रे पर आ पहुंची है जहां से लेफ्ट का अंत हुआ था. अब सवाल ये भी है कि क्या ममता भी लेफ्ट की राह पर चल रही हैं और वोटबैंक की राजनीति कर रही हैं?

लेकिन अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को कहा कि उनका राज्य 17 जनवरी को नई दिल्ली में केन्द्र सरकार द्वारा बुलाई गई राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) की बैठक में हिस्सा नहीं लेगा. उन्होंने राज्यपाल जगदीप धनखड़ को चुनौती दी कि वह केन्द्र सरकार के इशारों पर नहीं चलने के लिए राज्य सरकार को बर्खास्त' कर दें.

ऐसे चला तो ढह जाएगा दीदी का किला

साल 2006 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को महज 30 सीटें मिली थी. लेकिन ऐसे ही मुद्दों को हवा देते-देते दीदी ने 5 साल बाद लेफ्ट के किले को ध्वस्त कर दिया और साल 2011 के विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल करते हुए 294 सीटों में 184 सीटों पर जीत हासिल की. लेकिन अब ममता दीदी के सुर लेफ्ट की तरह ही राग अलाप लगी हैं. तो क्या दीदी का किला भी ढहने वाला है?

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बता दें, NPR, संशोधित नागरिकता कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) का लगातार मुखर विरोध कर रही बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने पहले ही राज्य में एनपीआर को अपडेट (अद्यतन) करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है.

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