क्या अशोक गहलोत बनेंगे कांग्रेस अध्यक्ष? देखिए 5 प्रबल संकेत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का प्रोफाइल कांग्रेस में लगातार मजबूत होता जा रहा है. हर कठिन परिस्थिति में पार्टी को उनपर ही भरोसा दिखाई देता है. इन दिनों गहलोत सभी भाजपा विरोधी दलों को एक मोर्चे पर लाने में जुटे हुए हैं. इसके अलावा महाराष्ट्र चुनाव संकट के समय भी वहां के कांग्रेस विधायकों को गहलोत की निगरानी में भेजा गया था. जिसे देखकर लगता है कि अशोक गहलोत के हाथ में जल्दी ही पार्टी की कमान भी आ सकती है.  

क्या अशोक गहलोत बनेंगे कांग्रेस अध्यक्ष? देखिए 5 प्रबल संकेत
कांग्रेस में अशोक गहलोत का बढ़ता जा रहा है कद

नई दिल्ली: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पिछले कुछ महीनों से कई मोर्चों पर पार्टी के तारणहार बनकर उभरते दिखाई दे रहे हैं. जिसे देखकर लगता है कि उन्हें एक सदी पुरानी कांग्रेस पार्टी की कमान सौंपी जा सकती है.

1. कांग्रेस ने गहलोत को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी
 राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस पार्टी के लिए अब राष्ट्रीय स्तर पर भी एक बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं.  पार्टी आलाकमान उन्हें जल्द ही समान विचारधारा के नेताओं को एक मंच पर एक साथ लाने की जिम्मेदारी सौंपने जा रहा है.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ना केवल बेहतर रणनीतिकार हैं बल्कि देश के समान विचारधारा के नेताओं के के साथ उनका तालमेल भी बेहद अच्छा है.  ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि 14 दिसंबर को दिल्ली में होने वाली कांग्रेस पार्टी के बड़े प्रदर्शन में अन्य दलों के नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हो सकते हैं.

2. दिल्ली में दिखा गहलोत का दम
मुख्यमंत्री गहलोत दो दिनों से दिल्ली और गुजरात के अहमदाबाद दौरे पर हैं. हालांकि मुख्यमंत्री अक्सर दिल्ली जाते रहते हैं लेकिन इस बार यह कार्यक्रम साधारण नहीं है. दिल्ली के जोधपुर हाउस में गहलोत ने दिल्ली में शुक्रवार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ जो बैठक की. उसके मुख्य रणनीतिकार वह खुद ही थे. इस बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, कोषाध्यक्ष अहमद पटेल और राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे सहित कई नेता मौजूद रहे.

दो दौर में चली इस बैठक में भाजपा और विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आक्रामक रूख अपनाने को लेकर चर्चा हुई. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 14 दिसंबर को दिल्ली में होने वाले केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की योजना बनाना था और साथ ही भाजपा और नरेंद्र मोदी के खिलाफ हमले तेज करना था.

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इसके अगले दिन ही सीएम का अहमदाबाद के कार्यक्रम में भी जाना पार्टी की तय रणनीति का ही हिस्सा है.  इसकी वजह है कि  पार्टी आलाकमान अब अशोक गहलोत प्रदेश में सरकार चलाने के साथ ही केंद्रीय स्तर पर पार्टी के समन्वयक की भूमिका देने जा रहा है.

3. सभी दलों में गहलोत के अच्छे संबंध
अशोक गहलोत कांग्रेस के संगठन महासचिव भी रह चुके हैं. गहलोत ने भाजपा विरोधी दलों को एकजुट करने में भूमिका अदा की थी.  गुजरात और पंजाब विधानसभा चुनाव में भाजपा विरोधियों को एकजुट करने का काम भी गहलोत ने ही किया था.

माना जा रहा है कि एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव, शरद यादव और आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू से अच्छे संबंधों के चलते एक बार फिर गहलोत को राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के समन्‍वय की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।

जानकारी के अनुसार आगामी दिनों में गहलोत पवार, अखिलेश यादव, शरद यादव, तेजस्वी यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला और माकपा नेताओं से मिलकर भाजपा के खिलाफ संयुक्त रणनीति तय करेंगे। गुजरात के प्रभारी रहते हुए गहलोत ने जिन जातिगत युवा नेताओं को पार्टी से जोड़ा था,उन्हे वे फिर से सक्रिय करेंगे। ये नेता पिछले कुछ समय से सक्रिय नहीं है।

4. महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट के दौरान भी बचा चुके हैं कांग्रेस की लाज
महाराष्ट्र में राजनीतिक हंगामे के बीच गहलोत ने कांग्रेस पार्टी की लाज बचाई थी. पार्टी आलाकमान ने महाराष्ट्र के अपने 44 विधायकों को राजस्थान भेजा था. जिससे उनकी पार्टी में किसी तरह की टूट नहीं हो. 
8 नवंबर की शाम को महाराष्ट्र कांग्रेस के सभी विधायकों को जयपुर से 20 किलोमीटर दूर एक रिसॉर्ट में ठहरने का इंतजाम किया गया. अशोक गहलोत और उनकी विश्वसनीय नेताओं की टीम ने 5 दिन तक लगातार मुंबई कांग्रेस के विधायकों की ना केवल खातिरदारी की बल्कि उनकी निगरानी का भी पूरी तरीके से जिम्मा संभाले रखा.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार पांच दिन इन विधायकों के संपर्क में रहे. राजस्थान के सरकारी कामकाज में व्यस्तता के बावजूद  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत रोजाना जयपुर से 20 किलोमीटर बाहर रिजोर्ट में जाकर ना केवल उनके साथ मैराथन बैठकें की बल्कि पार्टी आलाकमान की आगामी रणनीतियों के बारे में भी उन्हें जानकारी देते रहे.

महाराष्ट्र में कांग्रेस ने शिवसेना और एनसीपी के साथ जो सफलतापूर्वक सरकार बनाई और उसके विधायकदल में किसी तरह की टूट नहीं हुई उसका श्रेय बहुत हद तक गहलोत को ही जाता है. 

5. गांधी परिवार के हैं बेहद करीबी
लोकसभा चुनाव के परिणामों के बाद राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद  से इस्तीफा देने के बाद जिस नेता को अध्यक्ष पद सौंपने  पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई थी, वह अशोक गहलोत ही थे. उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी  का पूरा विश्वास हासिल है. 

शायद यही वजह है कि अशोक गहलोत को भाजपा  विरोधी सभी दलों को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है. जिससे कि अगर पार्टी के अंदर गहलोत के विरोधी खेमे को चुप कराया जा सके. 

क्या सोचते हैं अशोक गहलोत भविष्य  की राजनीति के बारे में जानिए यहां