Honey नहीं शुगर सिरप खा रहे हैं आप, यहां भी चीन की साजिश!

 CSE की महानिदेशक सुनीता नारायण की ओर से बताया गया कि शहद की शुद्धता की जांच के लिए तय भारतीय मानकों के जरिये इस मिलावट को नहीं पकड़ा जा सकता, क्योंकि चीन की कंपनियां ऐसे शुगर सिरप तैयार कर रही हैं, जो भारतीय जांच मानकों पर आसानी से खरे उतर जाते हैं. 

Honey नहीं शुगर सिरप खा रहे हैं आप, यहां भी चीन की साजिश!

नई दिल्लीः यह मिलावटों का दौर है. यहां न्याय में मिलावट है, फसल-पानी, दूध-दही में केमिकल की मिलावट है. सच में झूठ की मिलावट है. मिलावट इतनी बड़ी है हवा में भी प्रदूषण की मिलावट है. इस मिलावटी दौर में एक और बड़ी मिलावट सामने आई है वह शहद में मिलावट, मधुमक्खियां जिस प्राकृतिक मिठाई को बड़े श्रम से बनाती हैं, हमारे पास प्रकृति का यह उपहार भी शुद्ध तरीके से नहीं पहुंच रहा है. शहद में मिलावट को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आय़ा है. 

गुजरात में हुई जांच
जानकारी के मुताबिक, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने पाया है कि ज्यादातर कंपनियों के शहद में चाइनीज शुगर सिरप यानी चीनी का घोल मिलाया जा रहा है. सीएसई ने 13 कंपनियों के शहद के नमूनों की जांच कराई, जिनमें से 77 फीसद में मिलावट पाई गई है.

CSE ने शहद के नमूनों की जांच पहले गुजरात के राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सेंटर फॉर एनालिसिस एंड लर्निग इन लाइवस्टॉक एंड फूड (सीएएलएफ) में कराई थी. 

अधिकतर नमूने हुए फेल
सामने आया है कि NDDB में सभी बड़ी कंपनियों के नमूने पास हो गए, जबकि कुछ छोटी कंपनियों के नमूने फेल हो गए. जब इन्हीं सैंपल्स को जर्मनी स्थित प्रयोगशाला में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) परीक्षण के लिए भेजा गया तो लगभग सभी बड़े-छोटे ब्रांड्स फेल हो गए.  

सीएसई ने 13 छोटे-बड़े ब्रांड के शहद के नमूने लेकर कराई जांच
परीक्षण में शामिल 13 ब्रांड्स में केवल तीन यहां परीक्षण में सफल रहे. CSE की महानिदेशक सुनीता नारायण की ओर से बताया गया कि शहद की शुद्धता की जांच के लिए तय भारतीय मानकों के जरिये इस मिलावट को नहीं पकड़ा जा सकता, क्योंकि चीन की कंपनियां ऐसे शुगर सिरप तैयार कर रही हैं, जो भारतीय जांच मानकों पर आसानी से खरे उतर जाते हैं. 

संस्था का दावा है कि चीन में ऐसे कई कारोबारी वेब पोर्टल चल रहे हैं जो जांच में पकड़ में नहीं आने वाला शुगर सिरप बेचने का दावा करते हैं. 

डाबर और पतंजलि ने किया दावों का खंडन
जो कंपनियां ऐसा दावा कर रही हैं, वही भारत में अपने प्रोडक्ट्स का निर्यात भी कर रही हैं. इस बीच, डाबर और पतंजलि ने सीएसई के दावों का खंडन किया है. कंपनियों का कहना है कि वह प्राकृतिक तरीके से शहद जुटाती हैं. यह रिपोर्ट उनके ब्रांड की छवि खराब करने की सोची-समझी कोशिश लग रही है. 

फ्रक्टोज के रूप में आता है शुगर सिरप
बीते वर्ष भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) ने आयातकों और राज्यों के खाद्य आयुक्तों को बताया था कि देश में आयात किया जा रहे गोल्डन सिरप, इनवर्ट शुगर सिरप और राइस सिरप का इस्तेमाल शहद में मिलावट के लिए किया जा रहा है. CSE की टीम ने जब इसकी पड़ताल की तो पता चला कि FSSI ने जिन चीजों की मिलावट की बात कही थी, उस नाम से उत्पाद आयात नहीं किए जाते. चीन की कंपनियां फ्रक्टोज के रूप में इस सिरप को यहां भेजती हैं. 

यह भी सामने आया है कि इसके कारोबार के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल किया जाता है. चीन से रिश्ते बिगड़ने के बाद कंपनियां बड़ी चतुराई से उसे हांगकांग के जरिये भारत भेज रही हैं. सुनीता नारायण का कहना है कि शहद में शुगर सिरप की मिलावट खाद्य धोखाधड़ी (Food Fraud) है. यह 2003 और 2006 में CSE द्वारा सॉफ्ट ड्रिंक में की गई मिलावट की खोजबीन से ज्यादा कुटिल और ज्यादा जटिल है. 

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