ज़ी हिन्दुस्तान के 'ऑपरेशन गृह प्रवेश' में बड़े बिल्डर्स और गुनहगारों का पर्दाफाश

ज़ी मीडिया ने सरकार की कोशिश पर बट्टा लगाने का इरादा रखने वाले चेहरों को बेनकाब करने का बीड़ा उठाया है और इसी सिलसिले में हमारे अंडर कवर रिपोर्टर ने ऑपरेशन गृह प्रवेश को अंजाम दिया है. ज़ी हिन्दुस्तान ने रियल एस्टेट सेक्टर में चल रहे ब्लैक प्लान की काली कहानी का बड़ा खुलासा किया है. 'ऑपरेशन गृह प्रवेश' के जरिए ऐसे गुनहगारों की करतूतों की एक-एक परत खुल गई है.

ज़ी हिन्दुस्तान के 'ऑपरेशन गृह प्रवेश' में बड़े बिल्डर्स और गुनहगारों का पर्दाफाश

नई दिल्ली: ब्लैक मनी के खिलाफ ज़ी हिन्दुस्तान की मुहिम जारी है और इसी कड़ी में हमारे दो अंडर कवर रिपोर्टर निकले 'ऑपरेशन गृह प्रवेश' के लिए. ज़ी मीडिया का मकसद है ऐसे चेहरों को बेनकाब करना जो दीमक की तरह देश की अर्थव्यवस्था को चाट रहे हैं. 

धोखे की तमाम कहानियों का खुलासा

दिल्ली एनसीआर में हजारों बिल्डर हैं, जिन्होंने रियल स्टेट के कारोबार में करोड़ों-अरबों की कमाई की. लेकिन, कभी पब्लिक का भरोसा नहीं कमा पाए. जबकि रियल स्टेट सेक्टर देश का वो सेक्टर है जो लोगों की जिंदगी के सबसे बड़े सपने का निर्माण करता है और साथ ही सबसे ज़्यादा रोजगार देनेवाला सेक्टर है, फिर भी लोगों का भरोसा इसलिए कायम नहीं हुआ. क्योंकि कभी ये बिल्डर पैसे लेकर पजेशन नहीं देते, कभी ये प्रोजेक्ट अधूरा छोड़ देते हैं, खुद को दीवालिया घोषित कर देते हैं, सैंपल फ्लैट में दिखाते कुछ हैं और डिलीवर कुछ और करते हैं, सपनों के इस संसार में धोखे की तमाम कहानियां हैं.

ज़ी मीडिया ने सबूत के साथ एक ऐसा खुलासा किया, जिससे हर कोई सन्न रह जाएगा. हमारे अंडर कवर रिपोर्टर्स के सामने खुफिया कैमरे पर खिलाड़ी 420 ने पूरा तरीका बताया कि कैसे वो रियल स्टेट के धंधे में करोड़ों की नगदी का लेन-देन करते हैं और इसमें शामिल हैं देश के कुछ नामी बिल्डर्स, जो धड़ल्ले से काले धन को घर या दुकान में कनवर्ट करते हैं. 

MMR बिल्डर्स से हुई 'ऑपरेशन गृह प्रवेश' की शुरुआत

इस जोखिम भरे स्टिंग के लिए हमारे अंडर कवर रिपोर्टर्स ने देश के सबसे महंगे प्रॉपर्टी डेस्टिनेशन्स में से एक नोएडा का रुख किया. हमारी स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम ने ऑपरेशन गृह प्रवेश की शुरुआत MMR बिल्डर्स से की. MMR बिल्डर्स नोएडा का जाना-माना बिल्डर है जो बड़े-बड़े मॉल, शॉपिंग काम्प्लेक्सेज़, बिज़नेस सेंटर्स बनाता है. हमारे अंडर कवर रिपोर्टर्स नोएडा सेक्टर 52 में MMR 52ND AVENUE पहुंचे. जहां हमारी मुलाकात खुद को MMR का सीनियर मैनेजर बतानेवाले अजित पांडे से हुई.

गुनहगार नंबर 1

ज़ी मीडिया के दोनों अंडर कवर रिपोर्टर्स ने MMR बिल्डर्स के सीनियर मैनेजर अजित पांडे से एक ऐसे ग्राहक के तौर पर मुलाकात की, जो करोड़ों की संपत्ति खरीदना चाहता था. लिहाजा पांडे जी ने रूपयों की चमक को देखते हुए कई प्रॉपर्टी के कई विकल्पों को सामने रखने लगे. और हमारे अंडर कवर रिपोर्टर्स ने जैसे ही काली नगदी खपाने की बात रखी वो तुरंत राजी हो गया. खुफिया कैमरे में रिकॉर्ड हुआ MMR बिल्डर्स के सीनियर मैनेजर सेल्स अजित पांडे का ये दावा ये जाहिर कर रहा था कि जैसे MMR बिल्डर्स के लिए ये रोज की बात है.

कड़ी मशक्कत के बाद हमारे अंडर कवर रिपोर्टर ने पहले पड़ाव पर पहले गुनहगार को दबोच लिया था. MMR बिल्डर्स के अधिकारियों के दावों के मुताबिक यहां ज्यादातर कारोबार काले धन में ही होता है. यहां बस जरा सी मशक्कत के बाद कमर्शियल प्रॉपर्टी में ब्लैक मनी को इनवेस्ट किया जा सकता है.

गौर सन्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की पड़ताल

यहां तक पहुंचने के लिए ज़ी मीडिया के अंडर कवर रिपोर्टर्स ने सीढ़ियों का इस्तेमाल किया, इस खुलासे में में अगले किरदार का नाम सुनकर हर कोई हैरान रह जाएगा. ज़ी हिन्दुस्तान को अब तक प्रॉपर्टी के धंधे में अवैध नगदी खपाने का पैंतरा मालूम पड़ चुका था. अब उस बिल्डर का स्टिंग ऑपरेशन की ठानी जिसे दिल्ली एनसीआर में एक रुतबा हासिल है, नाम है 'गौर सन्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड'

ये दिल्ली-एनसीआर का एक जाना-माना नाम है, 45 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स, 25 हजार से ज्यादा प्रॉपर्टीज, 1 लाख से ज्यादा ग्राहक. इतने बड़े बिल्डर के प्रोजेक्ट्स में काला धब्बा लगा होगा, हमें यकीन नहीं था. ग्रेटर नोएडा वेस्ट जिसे नोएडा एक्सटेंशन भी कहते हैं, वहां सबसे बड़े एरिया पर अगर कोई डेवलपमेंट चल रहा है तो वो है गौर. ज़ी मीडिया के अंडर कवर रिपोर्टर्स ने जब गौर सिटी के सेल्स ऑफिस में कदम रखा तो पहले तो एक सेल्स गर्ल से मुलाकात हुई और उसके बाद हम गौर सिटी के असिस्टेंट मैनेजर सेल्स विजय बहादुर से मिले. गौर सिटी के असिस्टेंट मैनेजर सेल्स विजय बहादुर के सामने हमारे अंडर कवर रिपोर्टर्स ने सिर्फ कैश को एडजस्ट करने की बात कही थी और विजय की आंखें 30-35 करोड़ रूपयों के लालच में चमक उठीं.

मैनेजर थोड़ा शातिर था, उसे लग रहा था कि कहीं मेरी बातें रिकॉर्ड तो नहीं हो रहीं, लिहाज़ा उसने बाहर चलकर बात करने को कहा. और ज़ी मीडिया के खुफिया रिपोर्टर्स उसके साथ बाहर चल दिए. बातों-बातों में जब हमारे रिपोर्टर ने ये कहा कि दो दिन बाद आप मैनेजमेंट से हमारी मीटिंग फिक्स कर दीजिए. जिसके बाद हमारा ये पैंतरा काम आ गया. 

असिस्टेंट मैनेजर ने फोन करके हमारे अंडर कवर रिपोर्टर को बताया कि वो उसके सीनियर गौर सन्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के जनरल मैनेजर सेल्स से मुलाकात करा सकता है, ऐसे में एक मीटिंग फिक्स की गई. और हम गाजियाबाद के इंदिरापुरम में गौर ग्रुप के कॉर्पोरेट ऑफिस पहुंचे. जहां ज़ी हिन्दुस्तान के खुफिया एजेंट ने गौर सन्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के जनरल मैनेजर सेल्स मिस्टर आलोक श्रीवास्तव से मुलाकात की.

गुनहगार नंबर 2

गौर ग्रुप के इस दफ्तर में हमने थोड़ी सावधानी बरती, यहां भी प्रॉपर्टी के तमाम ऑप्शन्स को लेकर चर्चा करते रहे, करीब 17-18 मिनट के बाद गौर ग्रुप के जनरल मैनेजर आलोक श्रीवास्तव ने खुलकर बात रखी और रेजिडेन्शियल प्रॉपर्टी में 50% तक कैश एडजस्ट करने को तैयार हो गया. खुफिया कैमरे पर अपना कच्चा चिट्ठा खोलते हुए गौर ग्रुप के जनरल मैनेजर सेल्स आलोक श्रीवास्तव ने ये साबित कर दिया कि गौर ग्रुप के रिहायशी और कमर्शियल, दोनों प्रोजेक्ट्स में पक्की प्रॉपर्टी का कच्चा खेल खेला जाता है. इसमें नीचे से लेकर ऊपर के अधिकारियों को पता होता है कि कहां कितना ब्लैक खपाना है.

ऑपरेशन गृह प्रवेश के दूसरे गुनहगार को आपने पहचान लिया, अब आगे आपके सामने उस चेहरे को बेनकाब करते हैं, जो रीयल स्टेट की दुनिया में देश के नामी-गिरामी नाम हैं. 

'इनवेस्टर्स क्लिनिक' को किया बेनकाब

ऑपरेशन गृह प्रवेश में रीयल स्टेट के काले सच की परत खुलने के क्रम में उस ब्रांड का चेहरा बेनकाब हुआ जो देश की सबसे बड़ी रीयल स्टेट ब्रोकर कंपनी है, जो तमाम बिल्डर्स की कंपनियों से भी बड़ी कंपनी है. इसका नाम इनवेस्टर्स क्लिनिक है. ज़ी मीडिया के अंडर कवर रिपोर्टर्स को पता चला कि इस कंपनी के जरिए भी काले धन की बड़ी खेप को रीयल स्टेट सेक्टर में खपाया जा रहा है, लिहाजा हमारे खुफिया रिपोर्टर्स अपने खुफिया कैमरे के साथ निकल पड़े और सेक्टर 126 में इनवेस्टर क्लिनिक के दफ्तर पहुंचे.

यहां पहले तो हमारी मुलाकात इनवेस्टर्स क्लिनिक के मैनेजर सेल्स एंड मार्केटिंग तुषार पांडेय से हुई. तुषार पांडेय से अभी बात शुरू ही हुई थी, तभी उनके सीनियर वहां पहुंचे. नाम मोहित मित्तल खुद को इनवेस्टर क्लिनिक का वाइस प्रेसिडेंट बता रहे थे. मोहित के आते ही हमारे अंडर कवर रिपोर्टर ने एक ऐसा चारा फेंका कि खुद इनवेस्टर क्लिनिक के वाइस प्रेसिडेंट मोहित मित्तल ने तोते की तरह सब कुछ बताना शुरू कर दिया. दरअसल, मित्तल ये साबित करने की कोशिश कर रहे थे कि इनवेस्टर क्लिनिक में 100-150 करोड़ की प्रॉपर्टी डील कराना बहुत मामूली है और ये रोज का धंधा है. हमारे अंडर कवर रिपोर्टर्स ये सब सुनते रहे और अब बारी थी मुद्दे पर आने की.

गुनहगान नंबर 3

बातचीत के दौरान सबसे हैरान करने वाली बात ये थी कि इनवेस्टर्स क्लिनिक में सेल्स और मार्केटिंग के अधिकारियों ने काले धन के धंधे के लिए बकायदा कोड वर्ड रखा हुआ है. ये लोग ब्लैक मनी को PNB बोलते हैं. इनवेस्टर क्लिनिक के वाइस प्रेसिडेंट मोहित मित्तल ने यहां बड़ा खुलासा किया कि 13 साल पुरानी इस कंपनी में बहुत तरह के लोग टकराते हैं और ऐसे लोग भी हैं जिनके काले धन का पूरा प्रोफाइल ये खुद संभालते हैं. यानी कई लोगों के काले धन को इधर-उधर करना इनके बाएं हाथ का खेल है. इन्हें व्हाइट में एक रूपया नहीं चाहिए और सारी की सारी रकम अवैध कैश में लेंगे और उसे प्रॉपर्टी में खपा भी देंगे.

इन साहब को किसी भी तरह का पैसा दो, चाहे वो जहां से आया हो, ये उसे इनवेस्ट करा देंगे और इनवेस्टमेंट पर ब्याज भी देने का पूरा वादा है. खुद को इनवेस्टर्स क्लिनिक का वाइस प्रेसिडेंट सेल्स एंड मार्केटिंग बताने वाले मोहित मित्तल ने हर तरह से ब्लैक मनी को खपाने का तरीका समझाया, फायदा समझाया और उसकी डिलीवरी भी किसी भी जगह लेने का भी दावा किया. 

एजेंटों से शुरू हुई थी पड़ताल

ऑपरेशन गृह प्रवेश के इस गुनहगार को आपने पहचान लिया, अब आपको उन गुनहगारों के बारे में बताते हैं जिनसे हमारे अंडर कवर रिपोर्टर्स ने अपनी पड़ताल शुरू की थी. प्रॉपर्टी के धंधे में प्रॉपर्टी डीलर या कहें एजेंट हमेशा पहली सीढ़ी होता है. ये एजेंट कमीशन पर काम करते हैं. बिल्डर को अपने फ्लैट बेचने हैं तो वो ब्रोकर कंपनियों को अपनी यूनिट्स पहले से अलॉट कर देते हैं, जिसे प्रॉपर्टी के धंधे में इनवेंटरी कहा जाता है.

ज़ी मीडिया के अंडर कवर रिपोर्टर ने बिना किसी योजना के और बिना किसी पहचान के जड़ में घुसने के लिए एजेंटों से मुलाकात की. आसानी से इतने बड़े-बड़े बिल्डर्स का नाम लेकर ये एजेंट हमें भरोसा दिला रहे थे कि कहीं भी डील करा देगा और ब्लैक मनी को इनवेस्ट करा देगा. सारे कानून हैं, सारी सरकारी एजेंसियां हैं, फिर भी रीयल स्टेट के धंधे में ऐसे काले कारोबारी हैं जो किसी भी तरह से आपके काले धन को ना सिर्फ प्रॉपर्टी में खपा देते हैं बल्कि ये भी दावा करते हैं कि वो ब्लैक को व्हाइट में तब्दील कर देंगे. 

ज़ी मीडिया एक जिम्मेदार मीडिया हाउस होने के नाते अपनी जिम्मेदारी को समझता है और इस लिए ऑपरेशन गृह प्रवेश के माध्यम से इन काले चेहरों को हिन्दुस्तान के सामने पेश किया गया है. इस अभियान का मकसद सरकारी एजेंसियों को सतर्क करना और जगाना भी है, जिनके पास पूरी मशीनरी है. लेकिन उन्हीं की नाक के नीचे ये गोरखधंधा धड़ल्ले से चल रहा है. ब्लैक मनी के खिलाफ सरकार के अभियान में ज़ी मीडिया भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है और यकीन मानिए जहां इस तरह की हरकत होगी वहां ज़ी मीडिया का कैमरा होगा.