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  • कोरोना वायरस से ठीक / अस्पताल से छुट्टी / देशांतर मामले: 3,59,860 जबकि मरने वाले मरीजों की संख्या 17,834 पहुंची: स्त्रोत PIB
  • कोविड-19 की रिकवरी दर 59.43% से बेहतर होकर 59.51% हुई; पिछले 24 घंटे में 11,881 मरीज ठीक हुए
  • भारत सरकार ने कोविड-19 परीक्षण से जुड़ी बाधाओं को दूर किया और महामारी की रोकथाम के लिए ' टेस्ट-ट्रैक-ट्रीट ' की रणनीति पर जोर
  • विश्व स्तरीय यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए रेलवे ने यात्री ट्रेन सेवाओं के परिचालन में निजी भागीदारी के लिए RFQ आमंत्रित किया
  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना नवंबर 2020 तक प्रभावी रहेगी
  • 80 करोड़ एनएफएसए लाभार्थियों के बीच 200 एलएमटी अनाज वितरित किए जाएंगे
  • 9.78 एलएमटी चना भी लगभग 20 करोड़ परिवारों के बीच वितरित किया जाएगा
  • एमएचआरडी: "स्पोकन ट्यूटोरियल" पर छात्रों के लिए विभिन्न तरह के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं. ज्यादा जानकारी के लिए क्लिक करें
  • आत्मनिर्भर पैकेज के अंतर्गत 30.06.2020 तक 62,870 करोड़ रुपये की राशि के 70.32 लाख किसान क्रेडिट कार्ड स्वीकृत किए गए हैं

आतंकियों की क्रूरता पर भारी पड़ी 'मां की ममता'

अपनी जान की परवाह किए बिना देश की सेवा में निस्वार्थ भावना से लगे सैनिक तो देश का सम्मान व गौरव हैं ही, लेकिन इसबार घाटी में मौजूद सेना ने कुछ ऐसा कर दिखाया जिसका मुरीद हर कोई हो गया. उन्होंने मानवीय तरीके से आतंकवाद के खात्मे का रास्ता तलाश किया है.  

आतंकियों की क्रूरता पर भारी पड़ी 'मां की ममता'

श्रीनगर: कश्मीर में  स्थित भारतीय सेना की 15वीं कोर ने एक मुहिम चलाया है और इस मुहिम का नाम दिया गया ‘ऑपरेशन मां’.  सेना की 15वीं कोर को चिनार कोर भी कहा जाता है.  इस कोर ने जिस पहल की शुरुआत ‘ऑपरेशन मां’ के नाम से की उसका मकसद है कश्मीर के लापता व भटके हुए युवाओं का पता लगाना और उनका मार्गदर्शन करना. इस मुहिम के तहत चिनार कोर ने अब तक कश्मीर के 50 युवाओं को खोजा और इन युवाओं को उनके परिजन तक पहुंचाया है.

कैसे हुई ‘ऑपरेशन मां’ की शुरुआत
15वीं कोर के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल कंवलजीत सिंह ढिल्लो के निर्देशन में इस मुहिम को शुरू किया गया है.  इसके बारे में बताते हुए लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों ने कहा कि इस्लाम के धर्मग्रंथ कुरान में मां के महत्व को समझाया गया है और उसमें लिखा गया है कि हमें पहले अच्छे काम करने चाहिए फिर मां की सेवा करनी चाहिए और उसके बाद पिता के पास जाना चाहिए.

यह पढ़ कर ही उन्हें भटके हुए जवानों को रास्ता दिखाने का सोचा. साथ ही यह भी कहा कि हमें सैनिकों के शव गिनने का शौक नहीं है बल्कि भटके हुए युवाओं को उनके परिजन तक पहुंचा कर उनकी संख्या गिनना पसंद आ रहा है.

50 आतंकवादी लौटे घर
 ‘ऑपरेशन मां’ के तहत एक साल में 50 युवा जो आतंक के रास्ते पर चले गए थे, ऐसे युवा आतंक छोड़ घर लोट आए है. जिस पर लेफिनेंट जनरल ढिल्लो ने खुशी जाहिर की है. बता दें कि पुलवामा हमले के बाद ही सेना ने घाटी के माताओं से अपील की थी कि अपने बच्चों से घर वापसी का आग्रह करें. क्योंकि हर बच्चा अपनी मां से ही सबसे ज्यादा जुड़ा हुआ होता है और बच्चों के जीवन में मां अहम भूमिका निभाती हैं.  इसके अलावा जब भी कोई आतंकवादी मुठभेड़ में फसा होता था तो उसकी पहचान कर उसके मां को बुलाया जाता है. मां को देखकर भी कई आतंकवादियों की घर वापसी हो गई. भारतीय सैनिकों ने कई बार दिशाविहीन युवाओं को आत्मसमर्पण का भी मौका देते हुए उनकी घर वापसी करवाई है.

क्या कहता है आतंकवादियों का डाटा
लेफिनेंट जनरल ढिल्लो ने एक रिपोर्ट की बात करते हुए कहा कि सेना ने एक डाटा तैयार किया जिसके अनुसार 83 प्रतिशत युवा जो आतंक के रास्ते पर जाते हैं वह पत्थरबाज होते हैं.

इसके अलावा 7 प्रतिशत युवा जो आतंकी संगठनों से जुड़े होते हैं उनकी मृत्यु केवल 10 दिनों के अंदर हो जाता है, और 9 प्रतिशत की मौत 1 महीने, 17 प्रतिशत की मौत 3 महीने में व 36 प्रतिशत की मौत 6 महीने में और अधिकतम आयु 1 साल की होती है.

लेफिनेंट जनरल ढिल्लो का मां ऑपरेशन के जरिए चलाया गया यह मुहिम सराहनीय है, जिसने 50 आतंकवादियों को सही रास्ते पर ले आया. ये आतंकवादी एक आम इंसान की तरह ही अब शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं तो कुछ रोजगार करके अपने परिवार के लिए पैसे भी कमा रहे हैं.