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भारतीय वायुसेना में पायलट बनना चाहते थें कलाम... और बन गए 'मिसाइल मैन'

अगर आप सूर्य की तरह चमकना चाहते हैं तो पहले सूर्य की तरह जलना सीखना होगा, ये विचार किसी ऐसे इंसान का ही हो सकता है जिसने संघर्षों के बीच अपनी राह बनाई हो. कलाम के जन्मदिन पर आइए जानते हैं उनके जीवन से जुडे कुछ रोचक किस्से...

 भारतीय वायुसेना में पायलट बनना चाहते थें कलाम... और बन गए 'मिसाइल मैन'

नई दिल्ली: सपने वो नहीं जो हम नींद में देखते हैं, सपने वो हैं जो हमें सोने ही नहीं देते. मिसाइल मैन के नाम से मशहूर अब्दुल कलाम का ये विचार शायद ही किसी के लिए अनसुना हो. ये अपने आप में बड़ा विरोधाभास है कि शांत स्वभाव  वाले कलाम को मिसाइल मैन की उपाधि दी गई. ये उपाधि उन्हें क्यों मिली इसके पीछे भी एक किस्सा है. दरअसल, कलाम के 40 वर्षों के वैज्ञानिक जीवन में लॉंच व्हीकल तकनीक पर उनके कार्य और बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास में उनके योगदान के लिए उन्हें मिसाइल मैन का उपनाम दिया गया. 

एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन सादा जीवन उच्च विचार से प्रेरित था. उनके जीवन की संघर्षी कहानियां किसी न किसी तरह उनके व्यक्तित्व को गढ़ती गईं. तामिलनाडू के रामेश्वरम के एक छोटे से गांव धनुषकोढ़ी में आज ही के दिन जन्में कलाम को उनके 79वें जन्मदिवस पर वो तोहफा मिला जो उन्हें आम भीड़ से अलग ला खड़ा कर देता है. कलाम के जन्मदिन को विश्व विद्यार्थी दिवस के रूप में मनाए जाने के लिए वैश्विक संगठन संयुक्त राष्ट्र से मान्यता मिली. 

कलाम के जन्मदिन पर उनकी कुछ दिलचस्प बातें जो आपको जरूर जानना चाहिए...

  • मिसाइल मैन कलाम बचपन से ही लड़ाकू विमान उड़ाने का सपना देखते थे. लेकिन उनका ये सपना एक रैंक से पीछे रह जाने के कारण अधूरा रह गया. 8 रिक्तियों पर आए परिणाम में कलाम नौंवे स्थान पर आ उस मौके को भूना न सके. हालांकि राष्ट्रपति बनने के बाद कलाम को फाइटर जेट में  उड़ान भरने का मौका मिलता है तो वे भावुक हो जाते हैं और कहते हैं- ड्रीम्स कम्स ट्रू(Dreams Comes True). 
  • 2002-2007 तक देश के सर्वोच्च पद पर रहे कलाम के पास उनकी संपत्ति के रूप में 2500 किताबें, 5 शर्ट, एक जोड़ जूते, एक कलाई घड़ी 4 ट्रॉजर्स और 3 सूट के अलावा कुछ भी न था. यहां तक की  उन्होंने अपना विल तक नहीं बनवाया था.
  • कलाम सरकारी खर्च को कम ही रखने के पक्षधर थे. कलाम के बारे में एक किस्सा यह भी है कि जब राष्ट्रपति रहने के दौरान उनके रिश्तेदार उनसे मिलने आए तो उन्होंने उनके खर्च का एक रूपया भी सरकारी खजाने से न लगने दिया. तकरीबन तीन लाख के खर्च को कलाम ने अपने निजी खर्च से ही चुकता किया. 
  • ये बहुत कम लोगों को ही पता है कि कलाम ने करप्शन के खिलाफ भी एक जंग छेड़ रखी थी. करप्शन को खत्म कर पारदर्शिता लाने के लिए कलाम ने युवाओं के साथ एक प्रोग्राम चलाया था जिसका नाम था " मैं क्या दे सकता हूं." 
  • भारत के परमाणु शक्ति बनने के पीछे कलाम की बहुत बड़ी भागीदारी रही है. 1974 के पोखरण परीक्षण की कोशिश में  और 1998 के पोखरण-2 से भारत को परमाणु संपन्न देश बनाने में कलाम के वैज्ञानिकी परामर्श की महत्ती भूमिका रही है.

एपीजे अब्दुल कलाम युवाओं में काफी लोकप्रिय थे. इसलिए उन्हें लोगों के राष्ट्रपति भी कहा जाता था. कलाम देश के तीसरे राष्ट्रपति हैं जिन्हें 1997 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया. इसके अलावा कलाम को 1990 में पद्म विभूषण, 1981 में पद्म भूषण और 2000 में रामानुजन अवार्ड भी दिया गया है.