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मोदी सरकार में मालामाल हो रहे हैं भारतीय

भारत में विपक्ष भले ही आर्थिक मंदी और अर्थव्यवस्था की तबाही का शोर मचा रहा है. लेकिन वास्तविकता इसके उलट है. दुनिया की कई संस्थाओं की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लोगों की निजी संपत्ति में तेजी से इजाफा हो रहा है. 

मोदी सरकार में मालामाल हो रहे हैं भारतीय
भारतीयों की निजी संपत्ति बढ़ी

नई दिल्ली: भारत में आर्थिक मंदी का हौवा खड़ा करने वालों के लिए ये खबर आंख खोलने वाली है. दुनिया भर की कुछ अहम वित्तीय संस्थाओं की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीयों की निजी संपत्ति बढ़ रही है. 

स्विट्जरलैण्ड की बैंकिंग सेवा क्रेडिट सुइस का दावा
क्रेडिट सुइस ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट जारी की. जिसमें दावा किया गया कि इस साल यानी 2019 में भारतीयों की घरेलू संपत्ति में दोगुना से ज्यादा इजाफा होगा. यह 12.6 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगी. साल 2018 में भारतीयों की घरेलू संपत्ति 5.97 लाख करोड़ रुपए थी. इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि साल 2000 से 2019 के बीच भारत के घरों में निजी संपत्ति में चार गुना इजाफा हुआ है. कंपनी का अनुमान है कि अगले पांच सालों में भारतीय घरों की संपत्ति में और 43 फीसदी का इजाफा होगा. 

कार्वी वेल्थ ने भी किया ऐसा ही दावा
वित्तीय संस्था कार्वी वेल्थ के मुताबिक भी इस साल यानी 2019 में भारतीयों की व्यक्तिगत संपत्ति में 9.62 फीसदी का इजाफा हुआ है. इस संस्था ने भारतीय करेंसी रुपए में अपने आंकड़े जारी किए हैं. जिसमें बताया गया है कि भारतीयों की संपत्ति इस साल बढ़कर 430 लाख करोड़ रुपए हो गई है. यही नहीं भारतीय परिवारों के पास सोने चांदी, जवाहरातों या कैश के रुप में 167 लाख करोड़ की संपत्ति उपलब्ध है. 
कार्वी वेल्थ का यह भी अनुमान है कि साल 2025 तक भारतीय शेयर सूचकांक यानी सेंसेक्स एक लाख पर पहुंच सकता है. 

इंटरनेशल अफ्रेशिया बैंक और न्यू वर्ल्ड वेल्थ ने भी दिखाई सुनहरी तस्वीर
विकासशील देशों की संपत्ति पर नजर रखने वाली इन दोनों संस्थाओं ने भी भारतीयों की आर्थिक स्थिति के बारे में उत्साहजनक तस्वीर पेश की है. इसके मुताबिक आने वाले 10 सालों में भारतीय संपत्ति का मूल्य 200 प्रतिशत बढ़ सकता है. यानी अगर कोई संपत्ति फिलहाल 1 करोड़ की है तो आने वाले 10 सालों में वह 3 करोड़ की हो जाएगी. इन दोनों संस्थाओं की रिपोर्ट बताती है कि भारत की इस तेज गति से होने वाली ग्रोथ जल्दी ही ब्रिटेन और जर्मनी को पीछे छोड़ सकती है. जिसकी वजह से भारत दुनिया के दौलतमंद देशों में चौथे नंबर पर पहुंच जाएगा. 

लेकिन चिन्ता का एक कारण भी है मौजूद
स्विस बैंक की रिपोर्ट में भारतीयों की संपत्ति बढ़ाने का पूर्वानुमान तो लगाया ही गया है. लेकिन साथ में चिंताजनक बात यह भी है कि देश में कर्ज भी 11.5 फीसदी की तेजी से बढ़ रहा है. जो कि अब 120 अरब डॉलर हो गया है.